मेघवाल का राहुल गांधी पर पलटवार: '1975 की इमरजेंसी याद करें, अराजकता किसने फैलाई'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने 7 नवंबर 2026 को बीकानेर में मीडिया से बातचीत के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं को लेकर भ्रम फैला रहा है और राजनीतिक माहौल को जानबूझकर बिगाड़ने का प्रयास कर रहा है। राहुल गांधी के वोटर आईडी कार्ड को लाभार्थियों से जोड़ने संबंधी बयान को लेकर मेघवाल ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
राहुल गांधी की आलोचना पर मेघवाल का पलटवार
मेघवाल ने कहा, 'राहुल गांधी आजकल हर अच्छी पहल की आलोचना करते हैं, बिना यह सोचे कि इसके पीछे क्या कारण हैं या इसे क्यों लागू किया जा रहा है। टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट होते रहते हैं, तो इसमें आलोचना करने वाली क्या बात है?' उन्होंने याद दिलाया कि राहुल गांधी ने पहले सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक की भी आलोचना की थी। केंद्रीय मंत्री ने कहा, 'हम चाहे कितना भी अच्छा काम क्यों न करें, उन्हें आलोचना के लिए कुछ न कुछ मिल ही जाता है।'
गहलोत और आकाशवाणी प्रकरण पर निशाना
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की टिप्पणियों पर पलटवार करते हुए मेघवाल ने पूछा, 'अशोक गहलोत को देखना चाहिए कि वे दिल्ली में आकाशवाणी परिसर में क्या कर रहे थे — क्या वे वहाँ अव्यवस्था नहीं फैला रहे थे?' उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत निर्वाचन आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) से मिलने के लिए प्रतिनिधिमंडल की सूची और ज्ञापन देना अनिवार्य प्रक्रिया है। मेघवाल के अनुसार गहलोत ने न तो सदस्यों की सूची दी, न ही ज्ञापन तैयार किया, और बस इसी बात पर अड़े रहे कि मुलाकात आकाशवाणी में ही हो।
आपातकाल का इतिहास और कांग्रेस पर आरोप
मेघवाल ने अराजकता के आरोपों का जवाब देते हुए 1975 के आपातकाल का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, 'इंदिरा गांधी के शासनकाल में देश ने इमरजेंसी का दौर देखा है — उस दौर में उनका रवैया लोकतंत्र को कमज़ोर करने का था। अब वे अराजकता फैलाना चाहते हैं और सत्ता परिवर्तन लाना चाहते हैं। क्या इसे ही वे लोकतंत्र का पाठ पढ़ाना कहते हैं?' उन्होंने यह भी कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाने और विरोध के नाम पर अशांति फैलाने की राजनीति लोकतंत्र के हित में नहीं है। गौरतलब है कि विपक्ष को समझाने के लिए स्वयं चीफ जस्टिस तक को सामने आना पड़ा, यह बात मेघवाल ने रेखांकित की।
'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान
मेघवाल ने बताया कि इसी पृष्ठभूमि में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान चलाना पड़ा है। उन्होंने कहा, 'हम लोगों को यह बात समझाने के लिए आगे आए हैं — लोकतंत्र को बचाना है और इस अराजकता को खत्म करना है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब केंद्र और विपक्ष के बीच चुनावी प्रक्रियाओं और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर तनातनी चल रही है।
आगे का राजनीतिक घटनाक्रम
मेघवाल के इस बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच वाकयुद्ध और तेज़ होने की संभावना है। राजस्थान की राजनीति में गहलोत बनाम केंद्र सरकार का यह टकराव नया नहीं है, लेकिन निर्वाचन आयोग और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर दोनों दलों की नोकझोंक आने वाले दिनों में और गहरी हो सकती है।