एसआईआर पर विपक्ष 'झूठा नैरेटिव' गढ़ रहा है: केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल का पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय कानून व न्याय तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने 22 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) की प्रक्रिया पर विपक्ष की आलोचनाओं को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष जनता के बीच मेहनत करने के बजाय झूठे नैरेटिव का सहारा ले रहा है।
मुख्य आरोप और बयान
मेघवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'यह एक नैरेटिव गढ़ने की कोशिश है — झूठ बोलो और भाग जाओ।' उन्होंने तर्क दिया कि एसआईआर कोई नई प्रक्रिया नहीं है और इस पर लोकसभा तथा राज्यसभा में पहले ही विस्तृत चर्चा हो चुकी है। उनके अनुसार, 'जब विपक्ष एसआईआर कराता है तो वह स्वीकार्य होता है, लेकिन जब हम ऐसा करते हैं तो वह गलत हो जाता है — यह बर्ताव स्वीकार्य नहीं है।'
2024 चुनावों का संदर्भ
मंत्री ने 2024 के आम चुनावों का हवाला देते हुए कहा कि विपक्ष ने उस दौरान दो 'झूठे नैरेटिव' फैलाए थे — पहला, कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) सत्ता में लौटने पर संविधान बदल देगी, और दूसरा, कि वह आरक्षण समाप्त कर देगी। मेघवाल ने दोनों दावों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि कभी-कभी ऐसे झूठे नैरेटिव से विपक्ष को अल्पकालिक राजनीतिक फायदा भी मिलता है।
केरल का उदाहरण और राहुल गांधी पर निशाना
मेघवाल ने केरल का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर एसआईआर वास्तव में कोई समस्या होती, तो केरल के कांग्रेस नेता यह नहीं कहते कि इसके बिना वे चुनाव नहीं जीत पाते। उन्होंने कहा, 'केरल के नेताओं ने स्वीकार किया है कि वे एसआईआर की वजह से जीते हैं।' मंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से अपील की कि वे अपनी ही पार्टी के राज्य नेताओं के बयानों पर ध्यान दें।
विधि आयोग सम्मेलन में भागीदारी
मेघवाल ने 22 अक्टूबर को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में विधि आयोग के राष्ट्रीय सम्मेलन में भी हिस्सा लिया। उन्होंने बताया कि इस कार्यशाला में सहकारी संघवाद की परिभाषा और व्याख्या पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। उनके अनुसार, 'हम पूरे दिन इस बात पर विमर्श करेंगे कि भारत के संघीय ढाँचे को लेकर संविधान निर्माताओं की क्या सोच थी।' तकनीकी सत्रों का भी आयोजन निर्धारित था।
आगे क्या
एसआईआर को लेकर राजनीतिक बहस थमने के आसार नहीं हैं। विपक्ष ने इस मुद्दे को संसद में भी उठाया है और आगामी सत्र में भी इस पर तीखी नोकझोंक की संभावना है। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि विधि आयोग का सम्मेलन सहकारी संघवाद पर क्या ठोस सिफारिशें सामने रखता है।