14 अगस्त 2026
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अर्जुन राम मेघवाल का आरोप: विपक्ष ने बाध्य किया बिना चर्चा कानून पारित करने पर, राहुल गांधी पर सीधा निशाना

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अर्जुन राम मेघवाल का आरोप: विपक्ष ने बाध्य किया बिना चर्चा कानून पारित करने पर, राहुल गांधी पर सीधा निशाना

सारांश

संसद के मानसून सत्र में हंगामे की जिम्मेदारी को लेकर आरोप-प्रत्यारोप के बीच केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विपक्ष पर एजेंडा बदलने और चर्चा से भागने का आरोप लगाया। उन्होंने राहुल गांधी को संसदीय गतिरोध का सूत्रधार बताया और कहा कि सरकार चर्चा चाहती थी, लेकिन संवैधानिक बाध्यताओं के चलते बिना बहस के कानून पारित करने पड़े।

मुख्य बातें

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि सरकार मानसून सत्र में चर्चा के बाद कानून पारित करना चाहती थी, लेकिन विपक्ष ने बाध्य किया।
19 जुलाई को हुई सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने नीट पेपर लीक पर चर्चा का आश्वासन दिया था, जो पूरा नहीं हुआ।
विपक्ष ने बार-बार अपना मुद्दा बदला — नीट से लाठीचार्ज, फिर अयोध्या राम मंदिर चढ़ावे तक।
इस सत्र में सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने और NTC सुधार से जुड़े दो विधेयक पारित हुए।
मेघवाल ने राहुल गांधी को संसदीय गतिरोध का सीधा जिम्मेदार बताया।
BJP अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने मल्लिकार्जुन खड़गे पर कथित हमले की निंदा की।

केंद्रीय कानून और न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने 14 अगस्त 2026 को एक विशेष साक्षात्कार में स्पष्ट किया कि सरकार मानसून सत्र के दौरान पारित विधेयकों पर पहले विस्तृत चर्चा चाहती थी, लेकिन विपक्ष की रणनीतिक बाधाओं ने सरकार को बिना बहस के कानून पारित करने पर मजबूर किया। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सीधे तौर पर संसदीय व्यवधान का जिम्मेदार ठहराया।

मानसून सत्र में व्यवधान का घटनाक्रम

मेघवाल के अनुसार, मानसून सत्र शुरू होने से पहले 19 जुलाई को सभी दलों के सदन नेताओं की बैठक बुलाई गई थी। विपक्ष ने तब माँग रखी थी कि नीट पेपर लीक पर चर्चा को प्राथमिकता दी जाए और आश्वासन दिया था कि पहले दो दिन सदन नहीं चलने देंगे, तीसरे दिन से चर्चा शुरू होगी। लेकिन तीसरा, चौथा और पाँचवाँ दिन भी इसी गतिरोध में बीत गया।

उन्होंने बताया कि जैसे ही नीट मुद्दे पर चर्चा की स्थिति बनी, विपक्ष ने अपना एजेंडा बदल दिया — कुछ दलों ने छात्रों पर लाठीचार्ज का मुद्दा उठाया, तो समाजवादी पार्टी (सपा) ने अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे का मुद्दा उठाया। मेघवाल ने कहा, 'ऐसा कोई एक मुद्दा नहीं था जिस पर विपक्ष लगातार चर्चा करना चाहता हो।'

सरकार ने दिए कई अवसर, विपक्ष ने ठुकराए

मंत्री ने बताया कि लोकसभा अध्यक्ष ने सदन के भीतर चर्चा कराने के प्रयास किए और गृह मंत्री ने सार्वजनिक रूप से मीडिया को बयान देकर कहा कि वे चर्चा के लिए तैयार हैं और दोपहर 3 बजे से जवाब देने को तत्पर हैं। मेघवाल का आरोप है कि विपक्ष को जब लगा कि चर्चा में उनके पास कहने के लिए पर्याप्त तथ्य नहीं हैं, तभी वे पीछे हट गए।

उन्होंने कहा, 'हम बिना चर्चा किए कानून पारित नहीं करना चाहते थे, लेकिन संवैधानिक बाध्यताएँ थीं — कुछ अध्यादेशों की समय-सीमा थी और कुछ वित्तीय लेन-देन को पूरा करना संवैधानिक कर्तव्य था।'

न्यायपालिका सुधार विधेयक: क्या बदलेगा

इस सत्र में विधि एवं न्याय मंत्रालय के अंतर्गत दो महत्वपूर्ण विधेयक पारित हुए — एक सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने से संबंधित और दूसरा राष्ट्रीय न्यायाधिकरण (NTC) में सुधार से जुड़ा। मेघवाल ने कहा कि न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी और एक समर्पित पीठ का गठन होगा जो संविधान से जुड़े पुराने मामलों को सुन सकेगी।

न्यायाधिकरण सुधार के तहत NTC के अध्यक्ष पद पर आने वाले सदस्यों में एकरूपता सुनिश्चित होगी, जिससे कार्य निष्पादन में गति आएगी और संपत्ति-संबंधी विवादों में आम नागरिकों की भागीदारी बनी रहेगी।

राहुल गांधी और खड़गे प्रकरण पर भाजपा का रुख

मेघवाल ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि संसदीय बहस को आगे न बढ़ाने के पीछे उन्हीं का निर्देश था। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर हुए कथित हमले के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने स्पष्ट रूप से ऐसी किसी भी गतिविधि की निंदा की है और पार्टी इस तरह के व्यवहार का समर्थन नहीं करती।

विपक्ष के इस दावे पर कि उनके सदस्यों को सदन में बोलने की आजादी नहीं दी गई, मेघवाल ने पलटवार करते हुए कहा कि यदि बोलने की स्वतंत्रता नहीं थी, तो विपक्ष के सदस्य अपमानजनक भाषा का प्रयोग कैसे कर सके — यह अपने आप में विरोधाभास है।

परिसीमन और आगे की राह

परिसीमन के मुद्दे पर मेघवाल ने कहा कि संविधान में 2026 का उल्लेख स्पष्ट रूप से है और यह प्रक्रिया संवैधानिक रूप से अनिवार्य है। उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि वे संविधान को पढ़ें और समझें। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिणी राज्यों सहित कई दलों ने परिसीमन को लेकर गहरी आपत्तियाँ जताई हैं। आने वाले सत्रों में यह मुद्दा और भी तीखा होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उतना ही वैध है जितना सरकार का संवैधानिक बाध्यता का तर्क। असली सवाल यह है कि जब दोनों पक्ष 'चर्चा के लिए तैयार' होने का दावा करते हैं, तो वह चर्चा हुई क्यों नहीं — और इसका जवाब केवल एक पक्ष के बयान से नहीं मिलेगा। न्यायपालिका सुधार विधेयक जैसे दूरगामी प्रभाव वाले कानूनों का बिना संसदीय बहस के पारित होना, चाहे कारण कुछ भी हो, संस्थागत जवाबदेही के लिए चिंताजनक मिसाल है।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अर्जुन राम मेघवाल ने मानसून सत्र के व्यवधान के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया?
मेघवाल ने विपक्ष, विशेष रूप से कांग्रेस नेता राहुल गांधी को जिम्मेदार ठहराया। उनका आरोप है कि विपक्ष ने बार-बार अपना एजेंडा बदला और चर्चा से जानबूझकर पीछे हटा।
सरकार ने बिना चर्चा कानून क्यों पारित किए?
मेघवाल के अनुसार, कुछ अध्यादेशों की संवैधानिक समय-सीमा थी और कुछ वित्तीय लेन-देन को पूरा करना संवैधानिक कर्तव्य था। सरकार पहले चर्चा चाहती थी, लेकिन विपक्ष के गतिरोध के कारण ऐसा संभव नहीं हो सका।
मानसून सत्र में न्यायपालिका से जुड़े कौन-से विधेयक पारित हुए?
इस सत्र में दो विधेयक पारित हुए — एक सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने से संबंधित और दूसरा राष्ट्रीय न्यायाधिकरण (NTC) में सुधार से जुड़ा। इनका उद्देश्य लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा और न्यायाधिकरण में एकरूपता लाना है।
नीट पेपर लीक पर संसद में चर्चा क्यों नहीं हो सकी?
मेघवाल के अनुसार, 19 जुलाई की सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने नीट पर चर्चा का आश्वासन दिया था, लेकिन जैसे ही चर्चा की स्थिति बनी, विपक्ष ने अपना मुद्दा बदल दिया। सरकार ने नीट पेपर लीक से जुड़ा एक विधेयक भी पेश किया जिस पर लोकसभा और राज्यसभा दोनों में चर्चा हुई।
परिसीमन को लेकर सरकार का क्या रुख है?
मेघवाल ने कहा कि संविधान में 2026 में परिसीमन का स्पष्ट उल्लेख है और यह संवैधानिक रूप से अनिवार्य है। उन्होंने विपक्ष से संविधान पढ़ने की अपील की। यह मुद्दा दक्षिणी राज्यों सहित कई दलों की आपत्तियों के कारण राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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