रंजीत रंजन का आरोप: सरकार चर्चा से भाग रही है, अमरा राम ने पुलिस कार्रवाई पर साधा निशाना
सारांश
मुख्य बातें
मानसून सत्र में 31 जुलाई को भी संसद के भीतर और बाहर विपक्षी दलों का विरोध-प्रदर्शन जारी रहा। लगातार हंगामे के कारण लोकसभा और राज्यसभा दोनों की कार्यवाही बाधित होकर स्थगित करनी पड़ी। संसद परिसर में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने केंद्र सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन किया।
रंजीत रंजन के आरोप
कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने मीडिया से बातचीत में केंद्र सरकार पर महत्वपूर्ण मुद्दों पर जवाब देने से बचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ, लेकिन मंत्री संसद में सही जानकारी नहीं दे रहे। रंजन के अनुसार, डीसीपी ने स्वयं माना है कि दो राउंड फायरिंग हुई थी, इसलिए इसकी पूरी जिम्मेदारी केंद्रीय गृह मंत्रालय की बनती है, क्योंकि दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करती है।
रंजन ने सवाल उठाया कि यदि सरकार के पास छिपाने को कुछ नहीं है, तो वह सदन में खुलकर चर्चा से क्यों कतरा रही है। उनका कहना था कि विपक्ष लगातार जवाब माँग रहा है, लेकिन सरकार चर्चा करने के बजाय कार्यवाही बाधित होने का हवाला देकर बचने की कोशिश कर रही है।
नीट पेपर लीक और राम मंदिर चढ़ावा विवाद
रंजीत रंजन ने नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए नया कानून पारित किया, लेकिन उसके तुरंत बाद ओडिशा में पेपर लीक की खबर सामने आ गई।
इसके अलावा उन्होंने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में भी सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि भगवान राम के नाम पर मिले चढ़ावे में चोरी हुई है, जबकि सरकार इस पर चुप्पी साधे हुए है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सीधे संबोधित करते हुए रंजन ने कहा, '56 इंच का सीना दिखाते थे। आज दोनों अपना मुंह क्यों छिपा रहे हैं? सदन के भीतर आइए, बताइए चंदा किसने चोरी किया? सदन के भीतर आइए और जवाब दीजिए।'
उन्होंने यह भी कहा, 'पूरा देश महंगाई, बेरोजगारी, ईंधन और शिक्षा व्यवस्था से परेशान है।' रंजन ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार शायद इसी डर से सदन में नहीं आ रही कि एक बार आने पर गृह मंत्री को भी इस्तीफा देना पड़ेगा।
अमरा राम का पक्ष: पुलिस कार्रवाई पर सवाल
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — सीपीआई(एम) — के सांसद अमरा राम ने छात्रों के प्रदर्शन पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उनका तर्क था कि पुलिस केवल आदेशों का पालन करती है, इसलिए इस पूरे प्रकरण की सबसे बड़ी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है।
अमरा राम ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में छात्रों की बात सुनना चाहती, तो 25 जुलाई को बातचीत करने के बजाय 18 या 19 जुलाई को ही संवाद शुरू कर सकती थी। उनके अनुसार, पहले छात्रों को बदनाम करने की कोशिश हुई, फिर आंदोलन दबाने का प्रयास हुआ और अंत में बल प्रयोग किया गया।
अमरा राम ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध लाठीचार्ज और पैलेट गन जैसी कार्रवाई की गई, जो टाली जा सकती थी। उन्होंने कहा कि समय रहते बातचीत का रास्ता अपनाया जाता तो स्थिति इतनी नहीं बिगड़ती।
आगे क्या
मानसून सत्र में विपक्ष की माँगों और सरकार की चुप्पी के बीच गतिरोध जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब पेपर लीक, छात्र आंदोलन और राम मंदिर चढ़ावा जैसे कई संवेदनशील मुद्दे एक साथ संसद में उठ रहे हैं। आने वाले दिनों में सरकार इन मुद्दों पर क्या रुख अपनाती है, यह सत्र की दिशा तय करेगा।