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अर्जुन राम मेघवाल का विपक्ष पर हमला: महिला आरक्षण विधेयक का न गिरना महिलाओं के अधिकारों पर अन्याय

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अर्जुन राम मेघवाल का विपक्ष पर हमला: महिला आरक्षण विधेयक का न गिरना महिलाओं के अधिकारों पर अन्याय

सारांश

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि महिला आरक्षण विधेयक का न गिरना महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ है। उन्होंने विपक्ष के इस कदम को एक बड़ा विश्वासघात बताया और कहा कि देश की महिलाएं इसका जवाब देंगी।

मुख्य बातें

महिला आरक्षण विधेयक का न गिरना महिलाओं के अधिकारों के लिए एक बड़ा झटका है।
विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए मंत्री ने कहा कि यह अन्याय है।
महिला सशक्तिकरण के लिए यह विधेयक एक महत्वपूर्ण कदम था।
संसद में बिल का पास न होना लोकतंत्र के मूल्यों पर प्रश्न उठाता है।
देश की महिलाएं विपक्ष के इस कदम का जवाब देंगी।

नई दिल्ली, 18 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विपक्ष पर कड़ा हमला किया। उन्होंने कहा कि यदि महिला आरक्षण विधेयक पारित हो जाता, तो महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व प्राप्त होता। लेकिन विपक्ष इससे चिंतित था, क्योंकि इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता में वृद्धि होती। इसी डर से विपक्ष ने इस बिल को पारित नहीं होने दिया।

मेघवाल ने राष्ट्र प्रेस से चर्चा करते हुए कहा, "प्रधानमंत्री ने सदन में कहा था कि विपक्ष इस बिल का श्रेय ले सकता है, लेकिन इसे पारित होने दें। फिर भी, राजनीतिक कारणों से विपक्ष ने इसे रोक दिया। यह महिलाओं के साथ एक बड़ा अन्याय है। बिल के पास नहीं होने पर विपक्ष का सदन में जश्न मनाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। वे महिलाओं के अधिकारों को रोकते हैं और फिर जश्न मनाते हैं। संसद में ऐसा जश्न मनाना निंदनीय है। देश की महिलाएं इसे कभी माफ नहीं करेंगी और विपक्ष को सबक सिखाएंगी।"

मंत्री ने यह भी कहा कि विपक्ष ने न केवल महिलाओं के अधिकारों को रोका, बल्कि सेना का भी अपमान किया और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को मजाक में लिया।

केंद्रीय राज्य मंत्री और आरपीआई प्रमुख रामदास आठवले ने भी विपक्ष पर महिलाओं के साथ धोखा देने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मोदी सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा रही थी, लेकिन विपक्ष को डर था कि इससे सरकार और मजबूत हो जाएगी। इसलिए उन्होंने इस बिल को हराने की साजिश रची।

आठवले ने कहा, "यह महिलाओं के हितों के साथ बड़ा विश्वासघात है। 2023 में महिला आरक्षण बिल पास हो चुका था। अब विशेष सत्र में परिसीमन संबंधी प्रावधानों के साथ इसे लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही थी, ताकि महिलाओं के लिए सीटें बढ़ाई जा सकें, लेकिन विपक्ष ने इसे रोक दिया।"

संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र में महिला आरक्षण अधिनियम 2023 में संशोधन और परिसीमन बिल पर गंभीर बहस हुई। सरकार ने दावा किया कि इस बिल से महिलाओं को न्याय मिलेगा और दक्षिणी राज्यों के साथ भेदभाव नहीं होगा। हालांकि, लोकसभा में मतदान के दौरान बिल को दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका और वह पास नहीं हो पाया।

संपादकीय दृष्टिकोण

न केवल महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रयासों को बाधित करता है, बल्कि यह लोकतंत्र के मूल्यों पर भी प्रश्न उठाता है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महिला आरक्षण विधेयक क्या है?
महिला आरक्षण विधेयक का उद्देश्य लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करना है।
इस विधेयक का विरोध क्यों हो रहा है?
विपक्ष का मानना है कि इससे सरकार की शक्ति बढ़ेगी, जिसे वे स्वीकार नहीं करना चाहते।
केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष पर क्या आरोप लगाया?
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ एक बड़ा विश्वासघात किया है।
महिला आरक्षण विधेयक का क्या महत्व है?
यह विधेयक महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व में भागीदारी बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस विधेयक का पारित न होना किसे प्रभावित करेगा?
यह महिलाओं के अधिकारों और राजनीतिक सशक्तिकरण को सीधे प्रभावित करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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