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मानसून सत्र गतिरोध: मेघवाल का आरोप — राहुल गांधी के इशारे पर बाधित हुई संसद

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मानसून सत्र गतिरोध: मेघवाल का आरोप — राहुल गांधी के इशारे पर बाधित हुई संसद

सारांश

केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सीधे राहुल गांधी पर मानसून सत्र बाधित कराने का आरोप लगाया। नीट चर्चा के बाद विपक्ष ने मुद्दे बदले, नोटिस नहीं दिया और हंगामा जारी रखा — यह संसदीय गतिरोध की उस पुरानी लकीर को और गहरा करता है जो हर सत्र में दोहराई जाती है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने 14 अगस्त को आरोप लगाया कि मानसून सत्र बाधित करने के निर्देश सीधे राहुल गांधी से आ रहे थे।
19 जुलाई की सर्वदलीय बैठक में विपक्ष की प्रमुख माँग नीट पेपर लीक पर चर्चा थी, जो बाद में हुई भी।
चर्चा के बाद विपक्ष ने मुद्दे बदले — समाजवादी पार्टी ने अयोध्या और कांग्रेस ने छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया।
मेघवाल के अनुसार, विपक्ष ने नियम 193 या नियम 184 के तहत कोई औपचारिक नोटिस नहीं दिया।
मंत्री ने राहुल गांधी पर 'झूठ बोलने' और संवैधानिक पदों के प्रति अपमानजनक भाषा के प्रयोग का आरोप लगाया।

केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने 14 अगस्त को संसद के मानसून सत्र में लगातार बने गतिरोध के लिए विपक्ष को सीधे जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि सदन की कार्यवाही बाधित करने के निर्देश सीधे कांग्रेस नेता राहुल गांधी से आ रहे थे। मेघवाल के अनुसार, विपक्ष न तो सदन को सुचारू रूप से चलने देना चाहता था और न ही चर्चा के माध्यम से किसी मुद्दे का समाधान चाहता था।

मुख्य घटनाक्रम

मानसून सत्र शुरू होने से पहले 19 जुलाई को सभी दलों के फ्लोर लीडर्स की बैठक हुई थी। उस बैठक में विपक्ष की प्रमुख माँग नीट पेपर लीक पर चर्चा कराने की थी। मेघवाल ने बताया कि चर्चा के नियमों और प्रक्रिया को लेकर शुरुआती दो दिनों में गतिरोध रहा, लेकिन अंततः इस विषय पर चर्चा हुई।

चर्चा के बाद विपक्ष ने अपने मुद्दे बदल दिए। समाजवादी पार्टी अयोध्या और राम मंदिर से जुड़े विषय पर चर्चा चाहती थी, जबकि कांग्रेस छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाना चाहती थी। मेघवाल के अनुसार, विपक्ष इस बात पर भी एकमत नहीं था कि सदन में किस विषय पर चर्चा की जाए।

बिना चर्चा विधेयक पारित होने का विवाद

विपक्ष के इस आरोप पर कि सरकार बिना चर्चा के विधेयक पारित करा रही है, मेघवाल ने स्पष्ट किया कि सरकार की ऐसी कोई मंशा नहीं थी। उन्होंने कहा कि विपक्ष के लगातार हंगामे के कारण कई बार बिना चर्चा के कानून पारित करने की विवश स्थिति बनी और इसकी जिम्मेदारी विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस पर है।

प्रक्रियागत सवाल: नोटिस और नियम

मानसून सत्र के अंतिम दिन गृह मंत्री अमित शाह के सदन में उपस्थित न रहने को लेकर विपक्ष के सवालों पर मेघवाल ने कहा कि सरकार ने विपक्ष से चर्चा के लिए औपचारिक नोटिस देने को कहा था। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि विपक्ष नियम 193 या नियम 184 के तहत चर्चा चाहता था, तो उसे संबंधित नोटिस देना अनिवार्य था। विपक्ष ने ऐसा कोई नोटिस नहीं दिया, जिससे संबंधित मंत्री की सदन में उपस्थिति की बाध्यता नहीं बनती थी।

राहुल गांधी पर सीधा हमला

मेघवाल ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर 'झूठ बोलने' और सदन की मर्यादा का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के विरुद्ध अपमानजनक भाषा का प्रयोग कांग्रेस नेतृत्व की आदत बन गई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कांग्रेस के नवनिर्वाचित सांसद भी इस प्रकार के व्यवहार से असहज हैं।

आगे क्या

मेघवाल ने संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने की जिम्मेदारी सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों पर बताई। उन्होंने स्वीकार किया कि सत्ता पक्ष की जिम्मेदारी बड़ी होती है, किंतु साथ ही यह भी कहा कि यदि विपक्ष लगातार हंगामा करता रहे और चर्चा में भाग न ले, तो सदन को सुचारू रूप से चलाना असंभव हो जाता है। मानसून सत्र की समाप्ति के बाद अब अगले सत्र में दोनों पक्षों के रुख पर नजर रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह सच है; लेकिन विपक्ष के 'मुद्दे बदलने' को सरकार की सुविधा के अनुसार परिभाषित करना एकतरफा है। संसदीय प्रक्रिया में सत्ता पक्ष की जिम्मेदारी केवल नोटिस माँगने तक सीमित नहीं होती — विपक्ष को चर्चा की मेज तक लाना भी सरकार का काम है। बिना चर्चा पारित विधेयकों की जिम्मेदारी केवल विपक्ष पर डालना उस संवैधानिक जवाबदेही से बचना है जो बहुमत के साथ आती है।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अर्जुन राम मेघवाल ने राहुल गांधी पर क्या आरोप लगाया?
मेघवाल ने आरोप लगाया कि मानसून सत्र में संसद की कार्यवाही बाधित करने के निर्देश सीधे राहुल गांधी से आ रहे थे। उनके अनुसार, विपक्ष न तो सदन को चलने देना चाहता था और न ही चर्चा के जरिए मुद्दों का समाधान चाहता था।
मानसून सत्र में विपक्ष की मूल माँग क्या थी?
19 जुलाई की सर्वदलीय बैठक में विपक्ष की प्रमुख माँग नीट पेपर लीक पर संसद में चर्चा कराने की थी। मेघवाल के अनुसार यह चर्चा हुई, लेकिन बाद में विपक्ष ने अपने मुद्दे बदलकर छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और अयोध्या जैसे विषय उठाने शुरू कर दिए।
बिना चर्चा विधेयक पारित होने की जिम्मेदारी किस पर है?
मेघवाल ने इसकी जिम्मेदारी विपक्ष पर डाली, यह कहते हुए कि सरकार विधेयकों को चर्चा के बाद पारित कराना चाहती थी। उन्होंने कहा कि विपक्ष के लगातार हंगामे के कारण कई बार बिना बहस के कानून पारित करने की स्थिति बनी।
गृह मंत्री अमित शाह सत्र के अंतिम दिन सदन में क्यों नहीं आए?
मेघवाल ने स्पष्ट किया कि विपक्ष ने नियम 193 या नियम 184 के तहत कोई औपचारिक नोटिस नहीं दिया था। उनके अनुसार, निर्धारित प्रक्रिया का पालन होने पर ही संबंधित मंत्री चर्चा में भाग लेने के लिए बाध्य होते हैं।
संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने की जिम्मेदारी किसकी है?
मेघवाल ने कहा कि यह जिम्मेदारी सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की है। उन्होंने माना कि सत्ता पक्ष की जिम्मेदारी बड़ी होती है, लेकिन साथ ही कहा कि विपक्ष के लगातार हंगामे से सदन को सुचारू रूप से चलाना कठिन हो जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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