7 नवंबर 2026
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गिरिराज सिंह का तीखा हमला: निशा भगत को सुरक्षा देने में नाकाम रही हेमंत सोरेन सरकार, प्रियंका गांधी की चुप्पी पर सवाल

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गिरिराज सिंह का तीखा हमला: निशा भगत को सुरक्षा देने में नाकाम रही हेमंत सोरेन सरकार, प्रियंका गांधी की चुप्पी पर सवाल

सारांश

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने एक ही बयान में हेमंत सोरेन सरकार, प्रियंका गांधी, राहुल गांधी, सोनिया गांधी, ओवैसी और अखिलेश यादव को एक साथ घेरा — निशा भगत की मौत को ढाल बनाकर। आदिवासी सुरक्षा का दर्द और चुनावी राजनीति यहाँ एक ही मंच पर दिखती है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने 7 नवंबर 2026 को आदिवासी नेत्री निशा कुमारी भगत की मौत के लिए हेमंत सोरेन सरकार को जिम्मेदार ठहराया।
निशा भगत पर कई बार हमले हुए, फिर भी झारखंड सरकार सुरक्षा देने में नाकाम रही — गिरिराज सिंह का आरोप।
प्रियंका गांधी वाड्रा के नारे 'मैं बेटी हूं, लड़ सकती हूं' का हवाला देते हुए उनकी चुप्पी पर सवाल उठाया।
गाजियाबाद की वसुंधरा पुलिस चौकी पर हुए धमाके को लेकर ओवैसी और अखिलेश यादव की खामोशी पर भी निशाना साधा।
सोनिया गांधी के लोकतंत्र पर लेख को खारिज करते हुए उनके भारत आने के बाद 12 वर्षों तक नागरिकता न लेने का मुद्दा उठाया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम लेकर कहा कि वे किसी भी धमकी से नहीं डरते।

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने 7 नवंबर 2026 को झारखंड की आदिवासी नेत्री निशा कुमारी भगत की आत्महत्या के मामले में हेमंत सोरेन सरकार पर सुरक्षा में विफलता का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने साथ ही कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कई विपक्षी दलों को एक साथ घेरा।

निशा भगत की मौत और हेमंत सरकार पर आरोप

गिरिराज सिंह ने कहा कि निशा कुमारी भगत एक निडर आदिवासी नेत्री थीं जिन्होंने आदिवासी ज़मीन और आदिवासी लड़कियों की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनके अनुसार, निशा भगत पर एक-दो नहीं, बल्कि कई बार हमले हुए, फिर भी झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार उन्हें पर्याप्त सुरक्षा देने में असमर्थ रही।

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की इस विफलता ने ही अंततः इस त्रासदी को जन्म दिया। गिरिराज सिंह के अनुसार, यह मामला केवल एक घटना नहीं, बल्कि आदिवासी महिलाओं की सुरक्षा के प्रति राज्य की उदासीनता का प्रमाण है।

प्रियंका गांधी और राहुल गांधी की चुप्पी पर सवाल

केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के चर्चित नारे 'मैं बेटी हूं, लड़ सकती हूं' का हवाला देते हुए पूछा कि निशा भगत की मौत के बाद उनकी आवाज़ कहाँ है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी इस संवेदनशील मुद्दे पर पूरी तरह मौन हैं।

गिरिराज सिंह ने सोनिया गांधी से भी सवाल किया कि वे इस मामले पर सार्वजनिक रूप से अपनी राय क्यों नहीं रख रही हैं। उनका कहना था कि यदि नेता केवल चुनावी फायदे के लिए महिला सशक्तिकरण की भाषा बोलते हैं और असल घटनाओं पर चुप रहते हैं, तो यह दोहरा चरित्र उजागर होता है।

इरफान अंसारी के बयान और गाजियाबाद विस्फोट पर प्रतिक्रिया

झारखंड सरकार के मंत्री इरफान अंसारी के विवादित बयान पर भी गिरिराज सिंह ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने अब तक अंसारी के बयान की निंदा नहीं की है और यह पूरा घटनाक्रम कथित तौर पर एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है।

गाजियाबाद की वसुंधरा पुलिस चौकी पर हुए धमाके का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि देश के मुसलमानों को सड़कों पर उतरकर इस घटना की खुलकर निंदा करनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें देश के आम मुसलमानों से कोई नफ़रत नहीं है, लेकिन वे किसी भी चरमपंथी गतिविधि का पुरज़ोर विरोध करते हैं।

ओवैसी, अखिलेश और सोनिया गांधी पर निशाना

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी, समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव और राहुल गांधी की चुप्पी पर गिरिराज सिंह ने आरोप लगाया कि ये नेता मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति के कारण विस्फोट की घटना पर खुलकर नहीं बोल रहे। उनके अनुसार, यह मौन कथित तौर पर जिम्मेदार तत्वों को अप्रत्यक्ष समर्थन देने जैसा है।

उन्होंने उत्तर प्रदेश में डर का माहौल बनाने की कोशिशों पर भी विपक्ष को चेतावनी देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ऐसी किसी भी धमकी से डरने वाले नहीं हैं।

सोनिया गांधी के लेख और नागरिकता पर टिप्पणी

केंद्र सरकार की आलोचना करने वाले सोनिया गांधी के लेख पर प्रतिक्रिया देते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि जब सोनिया गांधी लोकतंत्र की चिंता जताती हैं, तो उन्हें दुख होता है। उनका सवाल था कि क्या यह लोकतंत्र की सच्ची चिंता है या अपने पुत्र राहुल गांधी को राजनीतिक रूप से स्थापित करने की कोशिश।

उन्होंने यह भी कहा कि सोनिया गांधी ने भारत आने के बाद 12 वर्षों तक भारतीय नागरिकता नहीं ली थी और इस तथ्य को लेकर जवाब मिलना चाहिए। गौरतलब है कि ये सभी आरोप और सवाल गिरिराज सिंह के अपने बयान हैं और इन पर संबंधित नेताओं की ओर से कोई तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब झारखंड में राजनीतिक सरगर्मी तेज़ है और आदिवासी अधिकारों का मुद्दा चुनावी चर्चा के केंद्र में बना हुआ है। आने वाले दिनों में इस मामले पर विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया और झारखंड सरकार का जवाब राजनीतिक परिदृश्य को और तीखा बना सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह राजनीतिक रणनीति की ओर इशारा करता है, न कि सिर्फ़ शोक और जवाबदेही की माँग की ओर। झारखंड में आदिवासी ज़मीन, सुरक्षा और राजनीतिक प्रतिनिधित्व का सवाल वाकई गंभीर है — लेकिन इसका जवाब तब अधिक विश्वसनीय होगा जब वह दलगत हमलों की भीड़ में न खो जाए।
RashtraPress
7 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

निशा कुमारी भगत कौन थीं और उनकी मौत क्यों चर्चा में है?
निशा कुमारी भगत झारखंड की एक आदिवासी नेत्री थीं जो आदिवासी ज़मीन और महिलाओं के अधिकारों के लिए काम करती थीं। गिरिराज सिंह के अनुसार, उन पर कई बार हमले हुए लेकिन हेमंत सोरेन सरकार उन्हें सुरक्षा देने में नाकाम रही, जिसके बाद उन्होंने आत्महत्या कर ली।
गिरिराज सिंह ने प्रियंका गांधी पर क्या आरोप लगाए?
गिरिराज सिंह ने प्रियंका गांधी वाड्रा के चर्चित नारे 'मैं बेटी हूं, लड़ सकती हूं' का हवाला देते हुए सवाल किया कि निशा भगत की मौत पर वे मौन क्यों हैं। उनका कहना था कि सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी दोनों इस मामले पर खुलकर नहीं बोल रहीं।
गाजियाबाद वसुंधरा पुलिस चौकी विस्फोट से यह मामला कैसे जुड़ता है?
गिरिराज सिंह ने वसुंधरा पुलिस चौकी पर हुए धमाके का जिक्र करते हुए ओवैसी, अखिलेश यादव और राहुल गांधी की चुप्पी पर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि ये नेता मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति के कारण इस घटना की खुलकर निंदा नहीं कर रहे।
गिरिराज सिंह ने सोनिया गांधी के लेख पर क्या कहा?
केंद्र सरकार की आलोचना करने वाले सोनिया गांधी के लेख पर गिरिराज सिंह ने सवाल किया कि यह लोकतंत्र की सच्ची चिंता है या राहुल गांधी को राजनीतिक रूप से स्थापित करने की कोशिश। उन्होंने यह भी कहा कि सोनिया गांधी ने भारत आने के बाद 12 वर्षों तक भारतीय नागरिकता नहीं ली थी।
इस मामले पर झारखंड सरकार या विपक्षी दलों की क्या प्रतिक्रिया आई?
गिरिराज सिंह के बयान के बाद तत्काल हेमंत सोरेन सरकार, कांग्रेस, या किसी अन्य विपक्षी दल की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में इन आरोपों पर संबंधित पक्षों का जवाब राजनीतिक परिदृश्य को और स्पष्ट करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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