इंडिया ब्लॉक संवैधानिक संस्थाओं को नकारकर अराजकता फैला रहा है: केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने 4 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' रैली को संबोधित करते हुए इंडिया ब्लॉक पर गंभीर आरोप लगाए। मेघवाल ने कहा कि विपक्षी गठबंधन संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा करने के बजाय जानबूझकर 'अराजकता फैलाने' पर उतारू है। उन्होंने अक्टूबर में दिल्ली में हुई कई घटनाओं का विस्तार से हवाला दिया।
मुख्य आरोप और घटनाक्रम
मेघवाल ने रैली में कहा, 'मैं दिल्ली में 6, 7, 9, 10, 11, 12 और 13 अक्टूबर को हुई तीन-चार घटनाओं का जिक्र करूंगा।' उन्होंने बताया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और इंडिया ब्लॉक के अन्य नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिलना चाहते थे। मुख्य चुनाव आयुक्त ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के नाम माँगे और मिलने की सहमति दी, परंतु विपक्षी नेताओं ने नाम देने के बजाय आकाशवाणी भवन में इकट्ठा होना बेहतर समझा।
मंत्री ने इसे 'अराजकता का पहला उदाहरण' करार देते हुए कांग्रेस से पूछा कि क्या उनके शासनकाल में कभी 300 सांसद या पूर्व सांसद एक साथ मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलने गए थे?
राष्ट्रपति भवन मार्च पर निशाना
मेघवाल ने अक्टूबर में इंडिया ब्लॉक के नेताओं द्वारा राष्ट्रपति भवन तक किए गए मार्च को 'अराजकता की पराकाष्ठा' बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी नेताओं से कथित चुनावी अनियमितताओं के ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा था, किंतु अभी तक कोई सबूत नहीं दिए गए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष लगातार चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाता रहा है।
सर्वोच्च न्यायालय मार्च और सीजेआई की प्रतिक्रिया
कानून मंत्री ने बताया कि इंडिया ब्लॉक ने सर्वोच्च न्यायालय तक मार्च की योजना भी बनाई थी। इस पर भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कथित तौर पर मिलने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि अदालत को प्रशासनिक स्तर पर किसी भी राजनीतिक दल के प्रतिनिधिमंडल से मिलने का अधिकार नहीं है। सीजेआई ने कथित तौर पर यह भी कहा कि जो मुद्दे उठाए जाने थे, वे पहले से ही सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं।
व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि इंडिया ब्लॉक ने हाल के महीनों में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कई बार सवाल उठाए हैं और कथित चुनावी अनियमितताओं को केंद्र में रखकर जनआंदोलन की रणनीति अपनाई है। आलोचकों का कहना है कि संवैधानिक संस्थाओं के बाहर दबाव बनाना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है, जबकि विपक्ष का तर्क है कि यह उसका संवैधानिक अधिकार है। यह बहस ऐसे समय में तेज हो रही है जब देश में कई राज्यों में चुनावी प्रक्रियाएँ चल रही हैं या आसन्न हैं।
आगे की राह
मेघवाल की इस रैली के बाद भाजपा और इंडिया ब्लॉक के बीच टकराव और गहरा होने के संकेत हैं। विपक्ष ने अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका और विपक्ष के प्रतिरोध के तरीकों पर यह बहस आगामी चुनावी माहौल में और तीखी हो सकती है।