12 अक्टूबर 2026
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फडणवीस का राहुल गांधी पर बड़ा हमला: 'संवैधानिक संस्थाओं को कमज़ोर करने की साजिश'

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फडणवीस का राहुल गांधी पर बड़ा हमला: 'संवैधानिक संस्थाओं को कमज़ोर करने की साजिश'

सारांश

राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया ब्लॉक का सर्वोच्च न्यायालय मार्च और CEC को हटाने की माँग — और फडणवीस का जवाबी वार। यह सिर्फ राजनीतिक बयानबाज़ी नहीं, संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर एक बड़ी राष्ट्रीय बहस की आहट है।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र के CM देवेंद्र फडणवीस ने 12 अक्टूबर 2026 को राहुल गांधी पर सर्वोच्च न्यायालय, CAG और RBI को कमज़ोर करने की साजिश का आरोप लगाया।
इंडिया ब्लॉक ने नई दिल्ली में सर्वोच्च न्यायालय तक मार्च निकाला और CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग की।
फडणवीस ने 1975 के आपातकाल का हवाला देते हुए कहा, 'हम संविधान में किसी को भी छेड़छाड़ नहीं करने देंगे।' कांग्रेस ने तमिलनाडु (59 साल) , उत्तर प्रदेश (46 साल) , गुजरात (31 साल) सहित 18 राज्यों में दशकों से सत्ता खोई है: फडणवीस।
फडणवीस ने विपक्ष को EVM दोष देना बंद कर अपनी 'नाकाम लीडरशिप' पर ध्यान देने को कहा।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 12 अक्टूबर 2026 को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और इंडिया ब्लॉक पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी सर्वोच्च न्यायालय, भारतीय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) तथा भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाने और उनकी साख घटाने की सुनियोजित कोशिश कर रहे हैं। फडणवीस की यह तीखी प्रतिक्रिया उसी दिन आई जब राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने नई दिल्ली में सर्वोच्च न्यायालय तक बड़ा मार्च निकाला।

मार्च की पृष्ठभूमि

विपक्षी नेता मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की माँग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि ज्ञानेश कुमार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चुनावी निष्पक्षता को कमज़ोर किया है। इंडिया ब्लॉक ने इस मार्च को लोकतंत्र की रक्षा के लिए जरूरी बताया, जबकि सत्तापक्ष ने इसे न्यायपालिका को दबाने की कोशिश करार दिया।

फडणवीस के मुख्य आरोप

मुख्यमंत्री फडणवीस ने विपक्ष पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'एक तरफ वे संविधान की प्रतियाँ दिखाते हैं और दूसरी तरफ संवैधानिक संस्थाओं को लगातार कमज़ोर करते हैं।' उनके अनुसार, मौजूदा विरोध प्रदर्शन एक 'चरम वामपंथी साजिश' का हिस्सा हैं जिसका उद्देश्य डॉ. बी.आर. अंबेडकर के संविधान को नकारना और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर से जनता का विश्वास उठाना है।

फडणवीस ने सीधे सवाल उठाया कि संविधान की कौन सी धारा भारत के मुख्य न्यायाधीश से मिलने की माँग के लिए राजनीतिक मार्च की अनुमति देती है। उनके शब्दों में, 'सर्वोच्च न्यायालय पर दबाव बनाने की कोशिश डॉ. अंबेडकर के संविधान का सीधा अपमान है।'

आपातकाल का संदर्भ

फडणवीस ने 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल का हवाला दिया। उन्होंने याद दिलाया कि उस दौर में कांग्रेस सरकार ने नागरिकों के मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए थे और उन्हें उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय जाने से रोका गया था। उन्होंने कहा, 'हमने 1975 में संविधान के साथ छेड़छाड़ के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी और आज भी हम लड़ेंगे। हम कभी किसी को डॉ. अंबेडकर के संविधान में बदलाव नहीं करने देंगे।'

ईवीएम और कांग्रेस की घटती ताकत

फडणवीस ने कहा कि बार-बार चुनाव हारने की वजह से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) अराजकता का मार्ग अपना रही है। उन्होंने विपक्ष को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को दोष देना बंद करने और अपनी नेतृत्व क्षमता पर ध्यान देने की नसीहत दी। उनके अनुसार, तमिलनाडु में 59 वर्षों, पश्चिम बंगाल में 50 वर्षों, उत्तर प्रदेश में 46 वर्षों, सिक्किम में 42 वर्षों, बिहार में 36 वर्षों, त्रिपुरा में 33 वर्षों, गुजरात में 31 वर्षों और मध्य प्रदेश व ओडिशा में 23 वर्षों से अधिक समय से मतदाताओं ने कांग्रेस को नकारा है।

फडणवीस ने कहा कि कांग्रेस अब DMK, AJD और BSP जैसे क्षेत्रीय सहयोगियों पर निर्भर होकर अपना अस्तित्व बचा रही है। उन्होंने जंतर-मंतर के पिछले आंदोलनों का भी ज़िक्र किया, जहाँ कथित तौर पर सोशल मीडिया एल्गोरिदम के ज़रिए अफरा-तफरी फैलाई गई थी, और यह भी बताया कि मेटा जैसे प्लेटफॉर्म ने विज्ञापन-आधारित कंटेंट में गड़बड़ियों के लिए बाद में माफी माँगी थी।

आगे क्या

इंडिया ब्लॉक ने अपने मार्च को जारी रखने का संकेत दिया है, जबकि सत्तापक्ष इसे संवैधानिक संस्थाओं को अस्थिर करने की कोशिश बता रहा है। यह राजनीतिक टकराव ऐसे समय में तेज़ हुआ है जब कई राज्यों में चुनावी गतिविधियाँ बढ़ रही हैं और चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर बहस नए सिरे से उठ रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो विपक्ष की माँग को सिरे से खारिज करना कितना न्यायसंगत है। आपातकाल का संदर्भ भावनात्मक रूप से प्रभावशाली है, लेकिन यह मौजूदा बहस को — जो चुनाव आयोग की स्वायत्तता के बारे में है — दूसरी दिशा में मोड़ देता है। मुख्यधारा की कवरेज आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रह जाती है, जबकि असली सवाल यह है कि संवैधानिक संस्थाओं में जन-विश्वास बनाए रखने की ज़िम्मेदारी किसकी है — सत्ता की, विपक्ष की या दोनों की।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

देवेंद्र फडणवीस ने राहुल गांधी पर क्या आरोप लगाया?
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 12 अक्टूबर 2026 को आरोप लगाया कि राहुल गांधी सर्वोच्च न्यायालय, CAG और RBI जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाकर उनकी विश्वसनीयता घटाने की सुनियोजित साजिश कर रहे हैं। उन्होंने इसे डॉ. अंबेडकर के संविधान का अपमान बताया।
इंडिया ब्लॉक ने सर्वोच्च न्यायालय तक मार्च क्यों निकाला?
इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग को लेकर नई दिल्ली में सर्वोच्च न्यायालय तक मार्च निकाला। उनका आरोप है कि ज्ञानेश कुमार, प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने चुनावी निष्पक्षता को नुकसान पहुँचाया है।
फडणवीस ने 1975 के आपातकाल का ज़िक्र क्यों किया?
फडणवीस ने 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल का हवाला देते हुए कहा कि उस दौर में कांग्रेस ने नागरिकों के मौलिक अधिकार निलंबित किए थे और उन्हें न्यायालय जाने से रोका था। उन्होंने इसे कांग्रेस के संविधान-विरोधी इतिहास के प्रमाण के रूप में पेश किया।
फडणवीस ने कांग्रेस की घटती राजनीतिक ताकत के बारे में क्या कहा?
फडणवीस ने दावा किया कि 18 राज्यों में मतदाता दशकों से कांग्रेस को नकार रहे हैं — जैसे तमिलनाडु में 59 साल, उत्तर प्रदेश में 46 साल और गुजरात में 31 साल से। उन्होंने कहा कि पार्टी अपने अस्तित्व के लिए DMK, AJD और BSP जैसे क्षेत्रीय दलों पर निर्भर हो गई है।
फडणवीस ने EVM पर कांग्रेस के रुख पर क्या कहा?
फडणवीस ने कहा कि कांग्रेस को अपनी चुनावी हार के लिए EVM को दोष देना बंद करना चाहिए और इसके बजाय अपनी नाकाम नेतृत्व क्षमता पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह ऐसी लीडरशिप है जिसे बार-बार 'रिलॉन्च' किया जाता है, लेकिन हर बार नाकाम रहती है।
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