सीजेआई के रुख का बचाव: फडणवीस बोले — संवैधानिक संस्थाओं को कमज़ोर करने की साजिश
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को मुंबई में मीडिया से बातचीत के दौरान विपक्षी दलों और एक्टिविस्ट समूहों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत के उस फैसले का खुलकर बचाव किया जिसमें उन्होंने प्रदर्शनकारियों से मिलने से इनकार कर दिया था। फडणवीस ने आरोप लगाया कि देश की प्रमुख संवैधानिक संस्थाओं को व्यवस्थित रूप से कमज़ोर करने की एक सुनियोजित कोशिश चल रही है।
सीजेआई के रुख का बचाव
फडणवीस ने पूछा, 'किस संविधान में लिखा है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश को प्रदर्शनकारियों और मार्च करने वालों से मिलना चाहिए?' उन्होंने स्पष्ट किया कि सीजेआई ने अपने संवैधानिक अधिकारों के दायरे में रहते हुए काम किया है। मुख्यमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि शिकायतों का समाधान अदालतों के भीतर कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए, न कि सड़कों पर दबाव की राजनीति से।
संवैधानिक संस्थाओं पर कथित साजिश का आरोप
फडणवीस ने आरोप लगाया कि सर्वोच्च न्यायालय, चुनाव आयोग (ECI) और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) जैसे लोकतंत्र के स्वतंत्र स्तंभों को कमज़ोर करने का प्रयास किया जा रहा है। उनका दावा था कि इन समूहों का अंतिम लक्ष्य नागरिकों के मन में यह धारणा बिठाना है कि संवैधानिक ढाँचे न्याय दिलाने में सक्षम नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि यह रणनीति अल्ट्रा-लेफ्टिस्ट प्रकार की अराजकता से मेल खाती है, जहाँ संस्थाओं की विश्वसनीयता को जन-आक्रोश के ज़रिए चुनौती दी जाती है।
विरोध प्रदर्शन और अराजकता के बीच की रेखा
फडणवीस ने कानूनी-लोकतांत्रिक विरोध और अराजकता के बीच स्पष्ट अंतर करने की बात कही। उन्होंने उन घटनाओं का हवाला दिया जहाँ भीड़ ने कथित तौर पर भड़काऊ नारेबाज़ी करते हुए सीमाएँ लाँघीं। उनके शब्दों में, 'जब आपराधिक रिकॉर्ड वाले हज़ारों लोग सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने के लिए इकट्ठा होते हैं, तो यह शांतिपूर्ण विरोध नहीं, बल्कि पूरी तरह से अराजकता है।'
इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनका प्रशासन हर पक्ष से बातचीत के लिए तैयार है — यहाँ तक कि नक्सलवाद जैसी हिंसक विद्रोही विचारधाराओं से जुड़े लोगों के साथ भी लोकतांत्रिक तरीकों से संवाद की कोशिशें की गई हैं।
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन की राष्ट्रीय राजधानी में टिप्पणी
फडणवीस का यह बयान उस वक्त आया जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने नई दिल्ली में वोटर लिस्ट में बदलाव और मुख्य चुनाव आयुक्त की जवाबदेही को लेकर प्रदर्शन कर रहे विपक्षी दलों और युवा समूहों पर निशाना साधा था।
नवीन ने इंडिया ब्लॉक पर आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक चुनावों में जनता द्वारा नकारे जाने के बाद वे देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जारी विरोध प्रदर्शन कथित तौर पर विदेशी ताकतों के इशारे पर हो रहे हैं, जिनका उद्देश्य भारत की शांति और आर्थिक विकास को नुकसान पहुँचाना है।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब देश में संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता और नागरिक समाज के विरोध के अधिकार पर राजनीतिक बहस तेज़ हो रही है। फडणवीस के बयान और नितिन नवीन की टिप्पणियों से साफ़ है कि BJP विपक्ष के इस आंदोलन को चुनावी और वैधानिक — दोनों स्तरों पर चुनौती देने की तैयारी में है।