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सीजेआई के रुख का बचाव: फडणवीस बोले — संवैधानिक संस्थाओं को कमज़ोर करने की साजिश

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सीजेआई के रुख का बचाव: फडणवीस बोले — संवैधानिक संस्थाओं को कमज़ोर करने की साजिश

सारांश

महाराष्ट्र के सीएम फडणवीस ने सीजेआई सूर्यकांत के प्रदर्शनकारियों से न मिलने के फैसले का बचाव करते हुए विपक्ष पर सर्वोच्च न्यायालय, चुनाव आयोग और RBI जैसी संस्थाओं को कमज़ोर करने की 'सुनियोजित साजिश' का आरोप लगाया। BJP अध्यक्ष नितिन नवीन ने विदेशी हाथ की बात कही।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 12 अक्टूबर 2026 को सीजेआई सूर्यकांत के प्रदर्शनकारियों से न मिलने के रुख का खुलकर समर्थन किया।
फडणवीस ने सर्वोच्च न्यायालय , चुनाव आयोग और RBI को कमज़ोर करने की 'सोची-समझी साजिश' का आरोप विपक्ष पर लगाया।
उन्होंने कहा कि 'आपराधिक रिकॉर्ड वाले हज़ारों लोग' जब इकट्ठा होते हैं तो वह शांतिपूर्ण विरोध नहीं, 'पूरी तरह से अराजकता' है।
BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इंडिया ब्लॉक पर लोकतांत्रिक चुनावों में हार के बाद देश अस्थिर करने और विदेशी ताकतों के इशारे पर प्रदर्शन कराने का आरोप लगाया।
फडणवीस ने स्पष्ट किया कि उनका प्रशासन बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन सड़कों पर दबाव बनाकर संस्थाओं को झुकाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं होगी।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को मुंबई में मीडिया से बातचीत के दौरान विपक्षी दलों और एक्टिविस्ट समूहों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत के उस फैसले का खुलकर बचाव किया जिसमें उन्होंने प्रदर्शनकारियों से मिलने से इनकार कर दिया था। फडणवीस ने आरोप लगाया कि देश की प्रमुख संवैधानिक संस्थाओं को व्यवस्थित रूप से कमज़ोर करने की एक सुनियोजित कोशिश चल रही है।

सीजेआई के रुख का बचाव

फडणवीस ने पूछा, 'किस संविधान में लिखा है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश को प्रदर्शनकारियों और मार्च करने वालों से मिलना चाहिए?' उन्होंने स्पष्ट किया कि सीजेआई ने अपने संवैधानिक अधिकारों के दायरे में रहते हुए काम किया है। मुख्यमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि शिकायतों का समाधान अदालतों के भीतर कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए, न कि सड़कों पर दबाव की राजनीति से।

संवैधानिक संस्थाओं पर कथित साजिश का आरोप

फडणवीस ने आरोप लगाया कि सर्वोच्च न्यायालय, चुनाव आयोग (ECI) और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) जैसे लोकतंत्र के स्वतंत्र स्तंभों को कमज़ोर करने का प्रयास किया जा रहा है। उनका दावा था कि इन समूहों का अंतिम लक्ष्य नागरिकों के मन में यह धारणा बिठाना है कि संवैधानिक ढाँचे न्याय दिलाने में सक्षम नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि यह रणनीति अल्ट्रा-लेफ्टिस्ट प्रकार की अराजकता से मेल खाती है, जहाँ संस्थाओं की विश्वसनीयता को जन-आक्रोश के ज़रिए चुनौती दी जाती है।

विरोध प्रदर्शन और अराजकता के बीच की रेखा

फडणवीस ने कानूनी-लोकतांत्रिक विरोध और अराजकता के बीच स्पष्ट अंतर करने की बात कही। उन्होंने उन घटनाओं का हवाला दिया जहाँ भीड़ ने कथित तौर पर भड़काऊ नारेबाज़ी करते हुए सीमाएँ लाँघीं। उनके शब्दों में, 'जब आपराधिक रिकॉर्ड वाले हज़ारों लोग सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने के लिए इकट्ठा होते हैं, तो यह शांतिपूर्ण विरोध नहीं, बल्कि पूरी तरह से अराजकता है।'

इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनका प्रशासन हर पक्ष से बातचीत के लिए तैयार है — यहाँ तक कि नक्सलवाद जैसी हिंसक विद्रोही विचारधाराओं से जुड़े लोगों के साथ भी लोकतांत्रिक तरीकों से संवाद की कोशिशें की गई हैं।

भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन की राष्ट्रीय राजधानी में टिप्पणी

फडणवीस का यह बयान उस वक्त आया जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने नई दिल्ली में वोटर लिस्ट में बदलाव और मुख्य चुनाव आयुक्त की जवाबदेही को लेकर प्रदर्शन कर रहे विपक्षी दलों और युवा समूहों पर निशाना साधा था।

नवीन ने इंडिया ब्लॉक पर आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक चुनावों में जनता द्वारा नकारे जाने के बाद वे देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जारी विरोध प्रदर्शन कथित तौर पर विदेशी ताकतों के इशारे पर हो रहे हैं, जिनका उद्देश्य भारत की शांति और आर्थिक विकास को नुकसान पहुँचाना है।

आगे क्या

यह ऐसे समय में आया है जब देश में संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता और नागरिक समाज के विरोध के अधिकार पर राजनीतिक बहस तेज़ हो रही है। फडणवीस के बयान और नितिन नवीन की टिप्पणियों से साफ़ है कि BJP विपक्ष के इस आंदोलन को चुनावी और वैधानिक — दोनों स्तरों पर चुनौती देने की तैयारी में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

चुनाव आयोग और RBI की आलोचना भारतीय लोकतंत्र में हमेशा से नागरिक समाज और विपक्ष का अधिकार रही है — इसे 'साजिश' कहना स्वयं एक राजनीतिक आरोप है, तथ्य नहीं। 'विदेशी ताकतों' के इशारे का आरोप बिना किसी सार्वजनिक साक्ष्य के लगाया गया है, जो इसे जाँच योग्य दावे की बजाय चुनावी बयानबाज़ी बनाता है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह चूक जाती है कि इन बयानों का असल संदर्भ — वोटर लिस्ट संशोधन का विवाद — अभी भी अनुत्तरित है।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीएम फडणवीस ने किस मुद्दे पर बयान दिया?
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 12 अक्टूबर 2026 को सीजेआई सूर्यकांत के प्रदर्शनकारियों से न मिलने के फैसले का बचाव किया और विपक्ष पर सर्वोच्च न्यायालय, चुनाव आयोग एवं RBI जैसी संवैधानिक संस्थाओं को कमज़ोर करने की साजिश का आरोप लगाया।
सीजेआई सूर्यकांत ने प्रदर्शनकारियों से क्यों नहीं मिले?
सीजेआई के इनकार की आधिकारिक वजह सार्वजनिक रूप से विस्तार से नहीं बताई गई है। फडणवीस ने इसे संवैधानिक अधिकारों के दायरे में लिया गया फैसला बताया और तर्क दिया कि शिकायतें अदालतों के अंदर कानूनी तरीके से उठाई जानी चाहिए, न कि सड़क-दबाव से।
BJP अध्यक्ष नितिन नवीन ने क्या आरोप लगाए?
BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इंडिया ब्लॉक पर चुनावों में हार के बाद देश को अस्थिर करने की कोशिश का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी दावा किया कि जारी विरोध प्रदर्शन कथित तौर पर विदेशी ताकतों के इशारे पर हो रहे हैं, हालाँकि इस दावे का कोई सार्वजनिक साक्ष्य नहीं दिया गया।
फडणवीस के अनुसार शांतिपूर्ण विरोध और अराजकता में क्या फर्क है?
फडणवीस ने कहा कि जब 'आपराधिक रिकॉर्ड वाले हज़ारों लोग' सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने के इरादे से एकत्र होते हैं और भड़काऊ नारेबाज़ी करते हैं, तो वह लोकतांत्रिक विरोध नहीं बल्कि अराजकता है। उन्होंने कहा कि उनका प्रशासन संवैधानिक दायरे में किसी से भी बातचीत के लिए तैयार है।
इन विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि क्या है?
ये विरोध प्रदर्शन वोटर लिस्ट में कथित बदलाव और मुख्य चुनाव आयुक्त की जवाबदेही को लेकर हो रहे हैं। विपक्षी दल और युवा समूह नई दिल्ली सहित कई शहरों में इन मुद्दों पर सड़क पर उतरे, जिसके बाद BJP नेताओं के तीखे जवाबी बयान आए।
राष्ट्र प्रेस
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