6 अक्टूबर 2026
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फडणवीस का कांग्रेस पर बड़ा हमला: संवैधानिक संस्थाएं बदनाम कर वामपंथी शासन लाने की साजिश

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फडणवीस का कांग्रेस पर बड़ा हमला: संवैधानिक संस्थाएं बदनाम कर वामपंथी शासन लाने की साजिश

सारांश

महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कांग्रेस और सहयोगी दलों पर संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करके देश में वामपंथी शासन लाने की सुनियोजित साजिश का आरोप लगाया। साथ ही DMK ने एसआईआर में वोटर सूची से नाम हटाने और संसद मार्च रोके जाने पर विरोध दर्ज कराया।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 6 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाएं बदनाम करने और वामपंथी शासन लाने की साजिश का आरोप लगाया।
फडणवीस ने कहा कि विपक्ष 'हाथ में संविधान लेकर असंवैधानिक काम करता है' — यह महज विरोध नहीं, एक सुनियोजित षड्यंत्र है।
सीजेपी प्रवक्ता सौरभ दास ने मुंबई-दिल्ली उड़ान BJP फंडिंग से कराने का आरोप लगाया; फडणवीस ने इसे 'मूर्खतापूर्ण' कहकर खारिज किया।
DMK प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने एसआईआर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर वोटरों के नाम सूची से हटाए जाने पर आपत्ति जताई।
धारापुरम उपचुनाव में एक मतदाता को विशेष चिह्न पर वोट देने के लिए उकसाने के आरोपी पोलिंग अधिकारी का तबादला किया गया।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 6 अक्टूबर 2026 को मुंबई में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और उसके सहयोगी दलों पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत देश की संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने में जुटा है। फडणवीस के अनुसार, इस रणनीति का अंतिम उद्देश्य भारत में 'कट्टर वामपंथी शासन' स्थापित करना है।

मुख्यमंत्री फडणवीस के प्रमुख आरोप

मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा, 'जिस प्रकार की अराजकता का परिचय कांग्रेस पार्टी और उनके साथी दे रहे हैं, उन सभी का उद्देश्य बिल्कुल स्पष्ट है। वो भारत की संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करना चाहते हैं, ताकि संवैधानिक संस्थाओं से लोगों का विश्वास उठ जाए।' उन्होंने कहा कि इस क्रम में 'रोज झूठ बोलना, फिर लोगों में यह विश्वास पैदा करना कि भारत की संवैधानिक संस्थाएं चरमराई हैं, ये संस्थाएं आपको इंसाफ नहीं दे सकती, उसके बाद भारत के संविधान को ही नकारना — इस प्रकार का षणयंत्र चल रहा है। ये आंदोलन उसी का एक भाग है।'

फडणवीस ने यह भी कहा कि ये दल 'हाथ में संविधान लेकर असंवैधानिक काम करते हैं' और निश्चित रूप से भारत में कट्टर वामपंथी शासन लाने की कोशिश में हैं। उन्होंने इसे 'कलाकारी' करार देते हुए कहा कि लोगों के मन में संविधान के प्रति नकारात्मकता भरना इस आंदोलन का मूल एजेंडा है।

सीजेपी प्रवक्ता के आरोप और फडणवीस का जवाब

इस बीच, सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास ने आरोप लगाया कि मुंबई से दिल्ली की उड़ान भारतीय जनता पार्टी (BJP) की फंडिंग से की गई थी और उन्होंने कहा कि उनकी फंडिंग जाँचने से पहले BJP के इलेक्टोरल बॉन्ड्स और खातों की जाँच होनी चाहिए। इस पर फडणवीस ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि 'कोई भी मूर्खतापूर्ण बात करेगा और मैं उस पर टिप्पणी करूं, इतना खाली नहीं हूं।'

एसआईआर विवाद पर डीएमके का पक्ष

इसी संदर्भ में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने मतदाता सूची संशोधन (SIR) विवाद पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में वोटरों के नाम सूची से हटा दिए गए, जो उनके दल की प्रमुख चिंता है। एलंगोवन ने यह भी कहा कि जब विपक्ष संसद तक जुलूस निकालना चाहता था तो उसे BJP सरकार ने रोका, जबकि 'विरोध करना हर व्यक्ति का बुनियादी अधिकार है।'

धारापुरम उपचुनाव में पोलिंग अधिकारी विवाद

धारापुरम उपचुनाव के दौरान एक अधिकारी पर एक बुजुर्ग महिला को विशेष चुनाव चिह्न पर मतदान करने के लिए उकसाने का आरोप लगा, जिसके बाद उस अधिकारी का तबादला कर दिया गया। डीएमके प्रवक्ता एलंगोवन ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कोई भी पोलिंग अधिकारी किसी मतदाता को किसी खास निशान पर वोट देने के लिए नहीं कह सकता और यह 'बिल्कुल गलत' था। उन्होंने राज्य प्रशासन पर भी निशाना साधा।

राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस जारी है। गौरतलब है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव के आरोप पहले भी उठते रहे हैं और अदालतों तक पहुँचे हैं। फडणवीस के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में प्रतिक्रियाओं का दौर जारी रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

संवैधानिक संस्थाओं की साख को लेकर आरोप-प्रत्यारोप तेज हो जाते हैं। असली सवाल यह है कि क्या ये आरोप ठोस साक्ष्य पर टिके हैं या महज राजनीतिक आख्यान का निर्माण है। एसआईआर में वोटरों के नाम हटाए जाने का डीएमके का आरोप और धारापुरम उपचुनाव का पोलिंग अधिकारी प्रकरण यह दर्शाते हैं कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल सिर्फ एक दल नहीं, कई दल उठा रहे हैं। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है, वह यह है कि संस्थाओं पर भरोसे का संकट केवल विपक्ष की 'साजिश' से नहीं, बल्कि जवाबदेही के तंत्र की कमज़ोरी से भी पैदा होता है।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीएम फडणवीस ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल भारत की संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करके लोगों का उनसे विश्वास तोड़ना चाहते हैं और अंततः देश में कट्टर वामपंथी शासन लाना चाहते हैं। उन्होंने इसे एक सुनियोजित षड्यंत्र का हिस्सा बताया।
एसआईआर विवाद क्या है और DMK ने क्या कहा?
मतदाता सूची संशोधन (SIR) प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में वोटरों के नाम सूची से हटाए जाने का आरोप है। DMK प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने कहा कि सभी वोटरों के नाम सूची में होने चाहिए थे, लेकिन एसआईआर के दौरान यह नहीं हुआ — यही उनके दल का मुख्य विरोध है।
धारापुरम उपचुनाव में पोलिंग अधिकारी के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई?
धारापुरम उपचुनाव के दौरान एक अधिकारी पर एक बुजुर्ग महिला को विशेष चुनाव चिह्न पर मतदान करने के लिए उकसाने का आरोप लगा, जिसके बाद उस अधिकारी का तबादला कर दिया गया। DMK ने इस घटना की कड़ी निंदा की और कहा कि यह 'बिल्कुल गलत' था।
सीजेपी प्रवक्ता सौरभ दास ने BJP पर क्या आरोप लगाया?
सीजेपी प्रवक्ता सौरभ दास ने आरोप लगाया कि मुंबई से दिल्ली की उनकी उड़ान BJP की फंडिंग से कराई गई थी, और उन्होंने कहा कि उनकी फंडिंग जाँचने से पहले BJP के इलेक्टोरल बॉन्ड्स और खातों की जाँच होनी चाहिए। सीएम फडणवीस ने इस आरोप को 'मूर्खतापूर्ण' कहकर खारिज कर दिया।
फडणवीस के बयान का राजनीतिक महत्व क्या है?
यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस चल रही है। फडणवीस का यह बयान BJP की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है जिसमें विपक्ष के आंदोलनों को 'संविधान-विरोधी' और 'वामपंथी षड्यंत्र' के रूप में चित्रित किया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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