फडणवीस का कांग्रेस पर बड़ा हमला: संवैधानिक संस्थाएं बदनाम कर वामपंथी शासन लाने की साजिश
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 6 अक्टूबर 2026 को मुंबई में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और उसके सहयोगी दलों पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत देश की संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने में जुटा है। फडणवीस के अनुसार, इस रणनीति का अंतिम उद्देश्य भारत में 'कट्टर वामपंथी शासन' स्थापित करना है।
मुख्यमंत्री फडणवीस के प्रमुख आरोप
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा, 'जिस प्रकार की अराजकता का परिचय कांग्रेस पार्टी और उनके साथी दे रहे हैं, उन सभी का उद्देश्य बिल्कुल स्पष्ट है। वो भारत की संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करना चाहते हैं, ताकि संवैधानिक संस्थाओं से लोगों का विश्वास उठ जाए।' उन्होंने कहा कि इस क्रम में 'रोज झूठ बोलना, फिर लोगों में यह विश्वास पैदा करना कि भारत की संवैधानिक संस्थाएं चरमराई हैं, ये संस्थाएं आपको इंसाफ नहीं दे सकती, उसके बाद भारत के संविधान को ही नकारना — इस प्रकार का षणयंत्र चल रहा है। ये आंदोलन उसी का एक भाग है।'
फडणवीस ने यह भी कहा कि ये दल 'हाथ में संविधान लेकर असंवैधानिक काम करते हैं' और निश्चित रूप से भारत में कट्टर वामपंथी शासन लाने की कोशिश में हैं। उन्होंने इसे 'कलाकारी' करार देते हुए कहा कि लोगों के मन में संविधान के प्रति नकारात्मकता भरना इस आंदोलन का मूल एजेंडा है।
सीजेपी प्रवक्ता के आरोप और फडणवीस का जवाब
इस बीच, सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास ने आरोप लगाया कि मुंबई से दिल्ली की उड़ान भारतीय जनता पार्टी (BJP) की फंडिंग से की गई थी और उन्होंने कहा कि उनकी फंडिंग जाँचने से पहले BJP के इलेक्टोरल बॉन्ड्स और खातों की जाँच होनी चाहिए। इस पर फडणवीस ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि 'कोई भी मूर्खतापूर्ण बात करेगा और मैं उस पर टिप्पणी करूं, इतना खाली नहीं हूं।'
एसआईआर विवाद पर डीएमके का पक्ष
इसी संदर्भ में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने मतदाता सूची संशोधन (SIR) विवाद पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में वोटरों के नाम सूची से हटा दिए गए, जो उनके दल की प्रमुख चिंता है। एलंगोवन ने यह भी कहा कि जब विपक्ष संसद तक जुलूस निकालना चाहता था तो उसे BJP सरकार ने रोका, जबकि 'विरोध करना हर व्यक्ति का बुनियादी अधिकार है।'
धारापुरम उपचुनाव में पोलिंग अधिकारी विवाद
धारापुरम उपचुनाव के दौरान एक अधिकारी पर एक बुजुर्ग महिला को विशेष चुनाव चिह्न पर मतदान करने के लिए उकसाने का आरोप लगा, जिसके बाद उस अधिकारी का तबादला कर दिया गया। डीएमके प्रवक्ता एलंगोवन ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कोई भी पोलिंग अधिकारी किसी मतदाता को किसी खास निशान पर वोट देने के लिए नहीं कह सकता और यह 'बिल्कुल गलत' था। उन्होंने राज्य प्रशासन पर भी निशाना साधा।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस जारी है। गौरतलब है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव के आरोप पहले भी उठते रहे हैं और अदालतों तक पहुँचे हैं। फडणवीस के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में प्रतिक्रियाओं का दौर जारी रहने की संभावना है।