फडणवीस का राहुल गांधी पर हमला: संवैधानिक संस्थाओं को कमज़ोर करने की साजिश का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 12 अक्टूबर 2026 को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और इंडिया ब्लॉक पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि वे देश की संवैधानिक संस्थाओं — जिनमें सर्वोच्च न्यायालय, भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) शामिल हैं — पर दबाव बनाने और उनकी विश्वसनीयता को व्यवस्थित तरीके से नष्ट करने की सोची-समझी साजिश रच रहे हैं। उनकी यह तीखी प्रतिक्रिया उस दिन आई जब राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने नई दिल्ली में सर्वोच्च न्यायालय की ओर एक बड़ा मार्च निकाला।
मार्च की पृष्ठभूमि और विपक्ष की माँगें
विपक्षी नेता मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग को लेकर सड़क पर उतरे। उनका आरोप है कि ज्ञानेश कुमार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चुनावी निष्पक्षता को कमज़ोर किया है। इंडिया ब्लॉक ने भारत के मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात की माँग को इस मार्च का आधार बनाया।
यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष पहले से ही इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता रहा है और चुनाव आयोग की स्वायत्तता को लेकर संसद के भीतर और बाहर सरकार को घेरने की कोशिश करता रहा है।
फडणवीस के मुख्य आरोप
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि विपक्ष एक तरफ तो संविधान की प्रतियाँ लहराता है, और दूसरी तरफ संवैधानिक संस्थाओं को निरंतर कमज़ोर करता है। उनके अनुसार, मौजूदा प्रदर्शन एक 'चरम वामपंथी साजिश' का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य डॉ. बी. आर. अंबेडकर के संविधान को नकारना और लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के प्रति जनता में अविश्वास पैदा करना है।
उन्होंने सीधा सवाल दागा: 'संविधान की कौन-सी धारा भारत के मुख्य न्यायाधीश से मिलने की माँग को लेकर राजनीतिक मार्च निकालने की इजाजत देती है? सर्वोच्च न्यायालय पर दबाव बनाने की कोशिश डॉ. अंबेडकर के संविधान का सीधा अपमान है।'
आपातकाल का संदर्भ और ऐतिहासिक तुलना
फडणवीस ने 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल का उल्लेख करते हुए याद दिलाया कि कांग्रेस सरकार ने उस दौर में मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए थे और नागरिकों को उच्च न्यायालय तथा सर्वोच्च न्यायालय जाने से रोक दिया था। उन्होंने कहा, 'हमने 1975 में संविधान के साथ छेड़छाड़ के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी और आज भी हम लड़ेंगे। हम कभी भी किसी को डॉ. बी. आर. अंबेडकर के संविधान में बदलाव या छेड़छाड़ नहीं करने देंगे।'
गौरतलब है कि यह तर्क भारतीय जनता पार्टी (BJP) की उस रणनीति का हिस्सा है जिसमें कांग्रेस पर 'असली संविधान-विरोधी' होने का लेबल चिपकाया जाता है — विशेष रूप से तब जब विपक्ष संवैधानिक संरक्षण के नाम पर सड़क पर उतरे।
कांग्रेस की चुनावी पराजय और क्षेत्रीय उपेक्षा
फडणवीस ने कांग्रेस के घटते जनाधार की विस्तार से व्याख्या की। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु में 59 वर्षों, पश्चिम बंगाल में 50 वर्षों, उत्तर प्रदेश में 46 वर्षों, सिक्किम में 42 वर्षों, बिहार में 36 वर्षों, त्रिपुरा में 33 वर्षों, गुजरात में 31 वर्षों और मध्य प्रदेश व ओडिशा में 23 वर्षों से अधिक समय से मतदाताओं ने कांग्रेस को नकारा है। उनका कहना है कि 18 राज्यों में पार्टी दशकों से सत्ता से बाहर है और अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए DMK, आज़ाद जनशक्ति पार्टी (AJD) और बहुजन समाज पार्टी (BSP) जैसे क्षेत्रीय सहयोगियों पर निर्भर है।
EVM पर भी फडणवीस ने निशाना साधा: 'कांग्रेस को अपनी हार की वजह EVM में नहीं, बल्कि अपनी लीडरशिप में ढूंढनी चाहिए। यह ऐसी लीडरशिप है जिसे बार-बार दोबारा लॉन्च किया जाता है, लेकिन हर बार वह नाकाम ही रहती है।'
सोशल मीडिया और आगे की राह
मुख्यमंत्री ने जंतर-मंतर पर हुए पिछले आंदोलनों का भी उल्लेख किया, जहाँ उनके अनुसार सोशल मीडिया एल्गोरिदम का उपयोग करके माहौल बिगाड़ा गया था। उन्होंने यह भी बताया कि मेटा जैसे प्लेटफॉर्म ने विज्ञापन-आधारित कंटेंट और प्रधानमंत्री मोदी की पोस्ट से जुड़ी गलतियों के लिए माफी माँगी थी। फडणवीस ने विपक्ष पर लोकतांत्रिक संस्थाओं और कानून के शासन के प्रति जनमानस में सुनियोजित अविश्वास पैदा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि BJP इसका हर मोर्चे पर मुकाबला करेगी।