प्रशांत भूषण के 'रेजीम चेंज' बयान पर फडणवीस का पलटवार: 'मन की बात होठों पर आ ही गई'
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को विपक्ष और सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) पर तीखा हमला बोला। वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में 'सत्ता परिवर्तन' (रेजीम चेंज) के उद्देश्यों पर की गई खुली चर्चा को फडणवीस ने विपक्ष के 'असली एजेंडे' का खुलासा बताया। उन्होंने कहा कि जो बात अब तक छिपी थी, वह अब सार्वजनिक हो गई है।
मुख्यमंत्री ने क्या कहा
मुख्यमंत्री फडणवीस ने प्रशांत भूषण का एक वीडियो क्लिप साझा करते हुए लिखा, 'हो गया भाई, सब कुछ सामने आ गया। आखिरकार, यह सब 'सत्ता परिवर्तन' (रेजीम चेंज) के बारे में ही तो था।' उन्होंने आगे अपनी पोस्ट में जोड़ा, 'आखिर मन में छुपी बात होठों पर आ ही गई। सारा खेल सत्ता की कुर्सी पाने का है, फिर उसके लिए विद्यार्थियों और किसानों को उकसाना ही क्यों ना पड़े। जाति और भाषा के नाम पर द्वेष फैलाना पड़े, या देश की प्रतिष्ठित संस्थाओं की प्रतिमा मलीन करनी पड़े।'
विवाद की जड़
यह विवाद तब उठा जब प्रशांत भूषण ने CJP प्रतिनिधियों और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान खुलकर 'सत्ता परिवर्तन' से जुड़े उद्देश्यों पर चर्चा की। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आरोप लगाया कि विपक्ष शांतिपूर्ण आंदोलनों की आड़ में सुनियोजित तरीके से अराजकता फैला रहा है।
CJP की सफाई
तीखी आलोचना के बाद CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने देर रात हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्टीकरण दिया। उनका कहना था कि उनके विरोध-प्रदर्शन का उद्देश्य 'सत्ता परिवर्तन' नहीं, बल्कि केवल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग करना था। हालाँकि, सत्ताधारी गठबंधन के नेताओं ने इस सफाई को नकाफी बताया।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
गौरतलब है कि महाराष्ट्र में चुनावी माहौल के बीच यह विवाद राजनीतिक रूप से संवेदनशील समय पर उठा है। फडणवीस ने विपक्षी दलों पर 'आंदोलन की आड़ में अराजकता फैलाने' का सीधा आरोप लगाया। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है।
आगे क्या
इस पूरे प्रकरण ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई तल्खी पैदा की है। विपक्षी दलों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक खंडन सामने नहीं आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयानबाज़ी आने वाले दिनों में और तेज़ हो सकती है।