फडणवीस का उद्धव पर तंज: 'शिवसेना की रिजीम चेंज नहीं रोक पाए, देश की क्या रोकेंगे'
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 18 अक्टूबर 2026 को नागपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान शिवसेना (यूबीटी) अध्यक्ष उद्धव ठाकरे पर तीखा प्रहार किया। फडणवीस ने कहा कि ठाकरे अपनी ही पार्टी शिवसेना में 'रिजीम चेंज' नहीं रोक पाए, तो देश में किस 'रिजीम चेंज' की बात कर रहे हैं, यह उन्हें समझ नहीं आता। यह टिप्पणी उद्धव ठाकरे द्वारा 'रिजीम चेंज' के समर्थन में दिए गए बयानों की प्रतिक्रिया में आई है।
फडणवीस का सीधा वार
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, 'जिस वक्त उनकी पार्टी ने हिंदुत्व और बाला साहेब ठाकरे के विचारों को छोड़ा, तो उन्हीं की पार्टी में ऐसा बवाल आया कि जो बाला साहेब के विचारों पर चलना चाहते थे, उन्होंने असली शिवसेना तैयार कर ली।' उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत के संविधान से लड़ना बंद होना चाहिए और यहाँ फैसले संसद और संविधान के तहत होते हैं, सड़क पर नहीं।
फडणवीस ने आगे कहा कि लोकतंत्र में बदलाव केवल चुनाव के ज़रिए संभव है। उनका कहना था, 'लोगों का दिल जीतना होगा और चुनाव जीतने होंगे।' उन्होंने नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और पाकिस्तान जैसे देशों का हवाला देते हुए कहा कि भारत में संविधान को नकारकर 'रिजीम चेंज' के मंसूबे कभी पूरे नहीं होंगे, क्योंकि यहाँ डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर का संविधान है।
संजय राउत का पलटवार
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने फडणवीस के बयान पर पलटवार करते हुए कहा, 'क्या लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन की माँग करना कोई अपराध है?' राउत ने मौजूदा सरकार को 'तानाशाही और अवैध' करार दिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भाजपा का एजेंट होने का आरोप लगाते हुए उन्हें 'माफिया' तक कह दिया। उन्होंने चुनावों में घोटाले होने का भी आरोप लगाया।
राउत ने कहा कि लोकतंत्र बचाने के लिए सत्ता परिवर्तन ज़रूरी है और इसमें प्रशांत भूषण, राहुल गांधी, उद्धव ठाकरे और ममता बनर्जी सब एकजुट हैं। उन्होंने दावा किया कि 6 महीने के भीतर महाराष्ट्र और पूरे देश में यह बदलाव लाया जाएगा।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि शिवसेना में विभाजन के बाद से फडणवीस और उद्धव ठाकरे गुट के बीच वाकयुद्ध लगातार जारी है। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुए विभाजन और उसके बाद चुनाव आयोग द्वारा 'असली शिवसेना' की मान्यता मिलने के बाद ठाकरे गुट को कई मोर्चों पर झटके लगे हैं। यह बयानबाज़ी ऐसे समय में आई है जब विपक्षी दल आगामी चुनावों के मद्देनज़र एकजुटता का प्रयास कर रहे हैं।
आगे क्या
राउत के 6 महीने में बदलाव के दावे और फडणवीस के संविधान-केंद्रित जवाब के बाद यह विवाद आने वाले दिनों में और गहरा सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 'रिजीम चेंज' की यह बहस विपक्षी एकता की कोशिशों का हिस्सा है, हालाँकि इसकी व्यावहारिक सफलता संदिग्ध बनी हुई है।