10 जुलाई 2026
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फडणवीस का राज ठाकरे पर तंज: 'स्टैंड-अप कॉमेडी में होते तो किसी कॉमेडियन का मार्केट न बचता'

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फडणवीस का राज ठाकरे पर तंज: 'स्टैंड-अप कॉमेडी में होते तो किसी कॉमेडियन का मार्केट न बचता'

सारांश

महाराष्ट्र विधानसभा में सीएम फडणवीस ने राज ठाकरे पर व्यंग्य का तीर चलाया — कहा कि अगर वे स्टैंड-अप कॉमेडी में होते, तो देश का कोई कॉमेडियन टिक नहीं पाता। भाषा-विवाद, 'भाड़े के गधे' वाला 'सुसंस्कृत विकल्प' और 'हवा में उछाली टोपी' — सदन में जुबानी जंग पूरे शबाब पर रही।

मुख्य बातें

सीएम देवेंद्र फडणवीस ने 10 जुलाई 2026 को महाराष्ट्र विधानसभा में राज ठाकरे पर व्यंग्यात्मक हमला किया।
फडणवीस ने कहा — राज ठाकरे स्टैंड-अप कॉमेडी में होते तो किसी दूसरे कॉमेडियन का मार्केट बंद हो जाता।
भाषा-विवाद पर फडणवीस ने 'आपत्तिजनक शब्द' वापस लेकर 'भाड़े के गधे' और 'सुपारीबाज' को 'सुसंस्कृत विकल्प' बताया।
राज ठाकरे के हिंदी भाषण वाले आरोप को फडणवीस ने खारिज किया — कहा, पूरा भाषण मराठी में था।
सत्ता पक्ष ने मेजें थपथपाकर समर्थन दिया, विपक्ष ने आपत्ति जताई।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 10 जुलाई 2026 को महाराष्ट्र विधानसभा में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे की आलोचना पर तीखा और व्यंग्यात्मक पलटवार किया। फडणवीस ने कहा कि उनके हालिया विधानसभा भाषण को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा किया गया है, और इसी क्रम में उन्होंने राज ठाकरे को स्टैंड-अप कॉमेडी की दुनिया का संभावित 'एकछत्र सम्राट' बताया।

मुख्यमंत्री का व्यंग्य-बाण

फडणवीस ने विधानसभा में कहा, 'राज ठाकरे हमारे मित्र हैं और राजनीति में उनसे हमें कोई खतरा नहीं है। मुझे खुशी है कि वह राजनीति में हैं। अगर वह मिमिक्री या स्टैंड-अप कॉमेडी के क्षेत्र में चले जाते तो देश के किसी भी दूसरे कॉमेडियन का मार्केट बंद हो जाता।' इस टिप्पणी पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने मेजें थपथपाकर उनका जोरदार समर्थन किया, जबकि विपक्ष ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई।

भाषा-विवाद और 'सुसंस्कृत विकल्प'

फडणवीस ने अपने पिछले भाषण में इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर उठे सवालों का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा, 'विपक्ष के लोग कह रहे हैं कि मुख्यमंत्री को सुसंस्कृत भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए। अगर मेरे किसी शब्द पर आपत्ति है तो मैं वह शब्द वापस लेता हूँ और उसकी जगह एक सुसंस्कृत विकल्प देता हूँ। अब से हम ऐसे लोगों को 'भाड़े के गधे' या 'सुपारीबाज' कह सकते हैं।' यह बयान स्पष्ट रूप से व्यंग्यात्मक था और सदन में तत्काल प्रतिक्रिया का कारण बना।

राज ठाकरे की भाषाई आपत्ति का खंडन

मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने आरोप लगाया था कि फडणवीस ने विधानसभा में हिंदी में भाषण दिया, जो महाराष्ट्र की भाषाई अस्मिता के विरुद्ध है। फडणवीस ने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उनका पूरा भाषण मराठी में था। उन्होंने यह भी जोड़ा, 'मैंने तो सिर्फ हवा में टोपी उछाली थी, लेकिन न जाने क्यों कई लोगों ने उसे अपने सिर पर फिट मान लिया।' यह टिप्पणी इस बात का संकेत थी कि उनकी पूर्व की टिप्पणी किसी विशेष व्यक्ति पर नहीं, बल्कि सामान्य रूप से की गई थी।

सदन में राजनीतिक माहौल

यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र विधानसभा के भीतर और बाहर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज हो रही है। विभिन्न दलों के नेताओं के बीच तीखी जुबानी जंग देखी जा रही है। गौरतलब है कि मनसे और सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के बीच संबंध हाल के महीनों में उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं।

आगे क्या

फडणवीस के इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर जारी रहने की संभावना है। राज ठाकरे की ओर से जवाबी बयान की प्रतीक्षा है। महाराष्ट्र की राजनीति में इस तरह की व्यंग्यात्मक नोकझोंक अक्सर बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों की आहट होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो कभी मुंबई की सड़कों पर राजनीतिक भूचाल लाते थे, आज विधानसभा में सत्तारूढ़ मुख्यमंत्री के व्यंग्य का विषय बन रहे हैं — यह शक्ति-संतुलन का स्पष्ट संकेत है। भाषा-विवाद को 'सुसंस्कृत विकल्प' के ज़रिए पलटना फडणवीस की संसदीय चतुराई दिखाता है, लेकिन यह सवाल भी उठता है कि क्या मुख्यमंत्री पद की गरिमा इस स्तर की नोकझोंक की अनुमति देती है। मुख्यधारा की कवरेज इसे महज़ 'राजनीतिक मनोरंजन' मान सकती है, लेकिन असल मुद्दा यह है कि महायुति सरकार अपने आलोचकों को सदन के भीतर किस तरह से जवाब देती है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फडणवीस ने राज ठाकरे पर क्या तंज कसा?
सीएम फडणवीस ने महाराष्ट्र विधानसभा में कहा कि अगर राज ठाकरे राजनीति छोड़कर स्टैंड-अप कॉमेडी या मिमिक्री में चले जाते, तो देश के किसी भी दूसरे कॉमेडियन के लिए मार्केट नहीं बचता। यह टिप्पणी उन्होंने राज ठाकरे की आलोचना के जवाब में व्यंग्यात्मक अंदाज़ में की।
राज ठाकरे ने फडणवीस पर क्या आरोप लगाया था?
मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने आरोप लगाया था कि फडणवीस ने विधानसभा में हिंदी में भाषण दिया, जो महाराष्ट्र की भाषाई अस्मिता के खिलाफ है। फडणवीस ने इसे गलत बताते हुए कहा कि उनका पूरा भाषण मराठी में था।
फडणवीस ने 'भाड़े के गधे' वाली टिप्पणी क्यों की?
विपक्ष द्वारा 'सुसंस्कृत भाषा' की माँग पर फडणवीस ने व्यंग्यात्मक रूप से अपना आपत्तिजनक शब्द वापस लेते हुए 'भाड़े के गधे' और 'सुपारीबाज' को 'सुसंस्कृत विकल्प' बताया। यह उनके पूर्व भाषण में इस्तेमाल हुए किसी शब्द पर उठे विवाद के जवाब में था।
विधानसभा में इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया हुई?
फडणवीस के बयान पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने मेजें थपथपाकर समर्थन जताया, जबकि विपक्ष ने इस टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। सदन का माहौल तनावपूर्ण लेकिन राजनीतिक रूप से जीवंत रहा।
फडणवीस और राज ठाकरे के बीच यह विवाद किस बात से शुरू हुआ?
विवाद की शुरुआत फडणवीस के एक पूर्व विधानसभा भाषण से हुई, जिसमें उनकी भाषा पर सवाल उठे। राज ठाकरे ने इस पर आलोचना की, जिसके जवाब में फडणवीस ने 10 जुलाई 2026 को विधानसभा में यह व्यंग्यात्मक पलटवार किया।
राष्ट्र प्रेस
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