मनीषा भनवाला का वर्ल्ड चैंपियन सफर: '10 दिन सो नहीं सकी थी, अब सुकून से सोई'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय पहलवान मनीषा भनवाला ने 4 नवंबर 2026 को केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया से मुलाकात कर उस भावुक सफर को साझा किया, जो कजाकिस्तान के अस्ताना में आयोजित सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के 59 किलोग्राम वर्ग में ऐतिहासिक गोल्ड मेडल तक पहुँचा। 30 अक्टूबर को स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय पहलवान बनीं मनीषा ने बताया कि सिलेक्शन ट्रायल के बाद मानसिक दबाव इतना था कि वह 10 दिनों तक ठीक से सो नहीं सकी थीं।
चयन प्रक्रिया का मानसिक दबाव
मांडविया से बातचीत में मनीषा ने खुलकर कहा, 'सर, मैं सिलेक्शन ट्रायल से होकर आई थी। मैं 10 दिनों तक सो नहीं सकी थी।' यह बयान उस तीव्र मानसिक संघर्ष को उजागर करता है जो भारतीय एथलीट अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए चयन के दौरान झेलते हैं। गौरतलब है कि भारतीय कुश्ती में सिलेक्शन ट्रायल की प्रक्रिया वर्षों से विवाद और दबाव का विषय रही है।
फाइनल में ऐतिहासिक वापसी
30 अक्टूबर को खेले गए 59 किलोग्राम वर्ग के फाइनल मुकाबले में मनीषा ने अमेरिका की अबीगेल नेट्टे के खिलाफ 0-6 से पिछड़ने के बाद शानदार वापसी करते हुए 8-6 से जीत दर्ज की। यह जीत न केवल मनीषा के लिए, बल्कि भारतीय कुश्ती के इतिहास में एक मील का पत्थर बन गई — वह सीनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय पहलवान बन गईं।
जब उनसे पूछा गया कि 6 अंकों से पीछे होने के बाद उन्होंने क्या किया, तो मनीषा का जवाब सरल लेकिन गहरा था: 'मैंने फिर से शुरुआत की।' गोल्ड जीतने के बाद उनके भावों को व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, 'लेकिन सर, अब मैं सुकून से सो पाई।'
खेल मंत्री की प्रतिक्रिया और संवाद
इस मुलाकात के दौरान केंद्रीय खेल मंत्री मांडविया ने मनीषा से पूछा, 'आप भी आई हैं यहां, दो साल पहले मेरे सामने धरना दिया था कि नहीं?' मनीषा ने स्पष्ट किया, 'सर, मैं उस समय वर्ल्ड चैंपियनशिप में गई हुई थी।' इस पर मांडविया ने कहा, 'हां, मैंने ही तो आपको भेजा था। किसी के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। आपको भेजा जाना ही चाहिए था। आप सभी मेरे एथलीट हो। आप मेरे देश के एथलीट हो।'
कड़ी मेहनत और समर्पण का संदेश देते हुए मांडविया ने भगवद गीता का श्लोक उद्धृत किया: 'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। अपने कर्म पर भरोसा रखें। आपको उसका फल जरूर मिलेगा।'
चैंपियनशिप में भारत का प्रदर्शन
अस्ताना में आयोजित इस सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में भारत के पास 2 और गोल्ड मेडल जीतने के अवसर थे। हालाँकि, 50 किलोग्राम वर्ग में नीलम और 76 किलोग्राम वर्ग में काजल अपने-अपने फाइनल मुकाबले हार गईं और उन्हें सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय महिला पहलवान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।
क्या होगा आगे
मनीषा की इस ऐतिहासिक जीत से भारतीय कुश्ती को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है। खेल मंत्रालय की ओर से एथलीटों को प्रोत्साहित करने के इस संकेत के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आगामी ओलंपिक चक्र के लिए भारतीय पहलवानों को किस तरह का समर्थन और संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं।