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मनीषा भनवाला का वर्ल्ड चैंपियन सफर: '10 दिन सो नहीं सकी थी, अब सुकून से सोई'

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मनीषा भनवाला का वर्ल्ड चैंपियन सफर: '10 दिन सो नहीं सकी थी, अब सुकून से सोई'

सारांश

10 दिन की नींद न आने से लेकर सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के गोल्ड तक — मनीषा भनवाला की कहानी सिर्फ एक पदक की नहीं, एक पहलवान के मानसिक जज्बे की है। 0-6 से पिछड़कर 8-6 से जीतना भारतीय कुश्ती का नया अध्याय है।

मुख्य बातें

मनीषा भनवाला सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय पहलवान बनीं।
फाइनल में अमेरिका की अबीगेल नेट्टे को 0-6 से पिछड़ने के बाद 8-6 से हराया।
मनीषा ने खेल मंत्री को बताया कि सिलेक्शन ट्रायल के बाद 10 दिनों तक नींद नहीं आई थी।
50 किग्रा में नीलम और 76 किग्रा में काजल फाइनल हारकर सिल्वर मेडल पर रहीं।
केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने भगवद गीता का श्लोक उद्धृत कर मनीषा को सम्मानित किया।

भारतीय पहलवान मनीषा भनवाला ने 4 नवंबर 2026 को केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया से मुलाकात कर उस भावुक सफर को साझा किया, जो कजाकिस्तान के अस्ताना में आयोजित सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के 59 किलोग्राम वर्ग में ऐतिहासिक गोल्ड मेडल तक पहुँचा। 30 अक्टूबर को स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय पहलवान बनीं मनीषा ने बताया कि सिलेक्शन ट्रायल के बाद मानसिक दबाव इतना था कि वह 10 दिनों तक ठीक से सो नहीं सकी थीं।

चयन प्रक्रिया का मानसिक दबाव

मांडविया से बातचीत में मनीषा ने खुलकर कहा, 'सर, मैं सिलेक्शन ट्रायल से होकर आई थी। मैं 10 दिनों तक सो नहीं सकी थी।' यह बयान उस तीव्र मानसिक संघर्ष को उजागर करता है जो भारतीय एथलीट अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए चयन के दौरान झेलते हैं। गौरतलब है कि भारतीय कुश्ती में सिलेक्शन ट्रायल की प्रक्रिया वर्षों से विवाद और दबाव का विषय रही है।

फाइनल में ऐतिहासिक वापसी

30 अक्टूबर को खेले गए 59 किलोग्राम वर्ग के फाइनल मुकाबले में मनीषा ने अमेरिका की अबीगेल नेट्टे के खिलाफ 0-6 से पिछड़ने के बाद शानदार वापसी करते हुए 8-6 से जीत दर्ज की। यह जीत न केवल मनीषा के लिए, बल्कि भारतीय कुश्ती के इतिहास में एक मील का पत्थर बन गई — वह सीनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय पहलवान बन गईं।

जब उनसे पूछा गया कि 6 अंकों से पीछे होने के बाद उन्होंने क्या किया, तो मनीषा का जवाब सरल लेकिन गहरा था: 'मैंने फिर से शुरुआत की।' गोल्ड जीतने के बाद उनके भावों को व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, 'लेकिन सर, अब मैं सुकून से सो पाई।'

खेल मंत्री की प्रतिक्रिया और संवाद

इस मुलाकात के दौरान केंद्रीय खेल मंत्री मांडविया ने मनीषा से पूछा, 'आप भी आई हैं यहां, दो साल पहले मेरे सामने धरना दिया था कि नहीं?' मनीषा ने स्पष्ट किया, 'सर, मैं उस समय वर्ल्ड चैंपियनशिप में गई हुई थी।' इस पर मांडविया ने कहा, 'हां, मैंने ही तो आपको भेजा था। किसी के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। आपको भेजा जाना ही चाहिए था। आप सभी मेरे एथलीट हो। आप मेरे देश के एथलीट हो।'

कड़ी मेहनत और समर्पण का संदेश देते हुए मांडविया ने भगवद गीता का श्लोक उद्धृत किया: 'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। अपने कर्म पर भरोसा रखें। आपको उसका फल जरूर मिलेगा।'

चैंपियनशिप में भारत का प्रदर्शन

अस्ताना में आयोजित इस सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में भारत के पास 2 और गोल्ड मेडल जीतने के अवसर थे। हालाँकि, 50 किलोग्राम वर्ग में नीलम और 76 किलोग्राम वर्ग में काजल अपने-अपने फाइनल मुकाबले हार गईं और उन्हें सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय महिला पहलवान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।

क्या होगा आगे

मनीषा की इस ऐतिहासिक जीत से भारतीय कुश्ती को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है। खेल मंत्रालय की ओर से एथलीटों को प्रोत्साहित करने के इस संकेत के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आगामी ओलंपिक चक्र के लिए भारतीय पहलवानों को किस तरह का समर्थन और संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

ताकि अगला चैंपियन बनने के लिए किसी को 10 रातें जागते हुए न बितानी पड़ें।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनीषा भनवाला ने वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में क्या उपलब्धि हासिल की?
मनीषा भनवाला सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय पहलवान बनीं। उन्होंने 30 अक्टूबर 2026 को कजाकिस्तान के अस्ताना में 59 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में अमेरिका की अबीगेल नेट्टे को 8-6 से हराया।
मनीषा भनवाला का फाइनल मुकाबला कैसा रहा?
मनीषा 59 किग्रा फाइनल में 0-6 से पिछड़ रही थीं, लेकिन उन्होंने शानदार वापसी करते हुए अंततः 8-6 से जीत दर्ज की। यह वापसी भारतीय कुश्ती इतिहास के सबसे यादगार फाइनल में से एक मानी जा रही है।
मनीषा ने खेल मंत्री को 10 दिन न सोने की बात क्यों बताई?
मनीषा ने बताया कि सिलेक्शन ट्रायल के दौरान मानसिक दबाव इतना अधिक था कि वह 10 दिनों तक ठीक से सो नहीं सकी थीं। गोल्ड जीतने के बाद उन्होंने कहा, 'अब मैं सुकून से सो पाई।'
इस चैंपियनशिप में भारत के बाकी पहलवानों का प्रदर्शन कैसा रहा?
50 किलोग्राम वर्ग में नीलम और 76 किलोग्राम वर्ग में काजल अपने-अपने फाइनल मुकाबले हार गईं और दोनों को सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा। भारत के पास इस चैंपियनशिप में 2 और गोल्ड जीतने के अवसर थे।
केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने मनीषा को क्या संदेश दिया?
मांडविया ने मनीषा को सम्मानित करते हुए भगवद गीता का श्लोक 'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन' उद्धृत किया और कहा कि सभी भारतीय एथलीट उनके देश के एथलीट हैं और किसी के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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