मनीषा भनवाला वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियन: जींद के घर में जश्न, मां बोलीं — ओलंपिक गोल्ड है अगला सपना
सारांश
मुख्य बातें
हरियाणा के जींद की बेटी मनीषा भनवाला ने 31 अक्टूबर 2026 को इतिहास रचते हुए सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता और यह खिताब हासिल करने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गईं। इस ऐतिहासिक जीत की खबर मिलते ही जींद स्थित उनके पारिवारिक घर में देर रात तक जश्न का माहौल रहा और परिवार ने उनके भव्य स्वागत की तैयारियाँ शुरू कर दी हैं।
मां मीना देवी की भावुक प्रतिक्रिया
मनीषा की माँ मीना देवी ने अपनी बेटी की इस उपलब्धि पर गर्व और खुशी व्यक्त करते हुए कहा, 'हम मनीषा का मैच फोन पर देख रहे थे। छह मिनट की कुश्ती में वो बहुत तगड़ा खेलती हैं।' उन्होंने बताया कि मनीषा के घर लौटने पर जोरदार स्वागत करने की पूरी तैयारी कर ली गई है। मीना देवी ने यह भी जाहिर किया कि अब उनकी और उनके स्वर्गीय पति की आँखें ओलंपिक गोल्ड पर टिकी हैं — यह सपना पूरे परिवार का है।
भाई रिंकू का त्याग और समर्पण
मनीषा को रेसलर बनाने में उनके भाई रिंकू का योगदान अहम रहा है। माँ मीना देवी ने बताया कि कुश्ती के लिए पहले रिंकू तैयार हुए थे, लेकिन जब मनीषा की रुचि इस खेल में दिखी तो भाई ने खुद पीछे हटकर बहन को आगे बढ़ाया और उनके लिए सारे इंतजाम भी किए। मीना देवी ने बताया, 'गाँव में जब कबड्डी हुआ करती थी, मनीषा भाई को खेलते देखने वहाँ जाती थी। धीरे-धीरे उनकी इस खेल में रुचि बन गई।'
भाई रिंकू ने खुद कहा, 'हमारी खुशियों का ठिकाना नहीं है। हम सुबह 4 बजे सोए और खूब जश्न मनाया। हर जगह से फोन आ रहे थे। यूडब्ल्यूडब्ल्यू, रेसलिंग फेडरेशन, सरकार और गाँव के लोगों का पूरा सहयोग रहा।' उन्होंने स्पष्ट किया कि मनीषा ने जो भी हासिल किया है वह अपनी कड़ी मेहनत के दम पर किया है।
परिवार की भावनाएँ और आगे का सपना
मनीषा की भाभी ममता ने भी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि घर की बेटी ने इतने बड़े मंच पर देश और गाँव का नाम रोशन किया है, यह पूरे परिवार के लिए सबसे बड़ी खुशी है। रिंकू ने बताया कि अब मनीषा का अगला लक्ष्य ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम ऊँचा करना है।
ऐतिहासिक उपलब्धि का महत्व
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय महिला पहलवानों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अपनी पहचान बनाई है। सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतना भारतीय महिला कुश्ती के लिए एक नई ऊँचाई है — इससे पहले कोई भारतीय महिला पहलवान यह खिताब नहीं जीत पाई थी। गौरतलब है कि हरियाणा के छोटे-छोटे गाँवों से निकलकर विश्व मंच पर तिरंगा फहराने की यह परंपरा भारतीय खेल इतिहास में नई इबारत लिख रही है।
आगे क्या
परिवार मनीषा की स्वदेश वापसी पर जींद में भव्य स्वागत की तैयारी में जुटा है। माँ मीना देवी की इच्छा है कि बेटी आगे ओलंपिक में भी देश के लिए गोल्ड मेडल लेकर आए और पिता के सपने को पूरा करे। मनीषा की इस जीत ने पूरे हरियाणा में उत्साह की लहर दौड़ा दी है।