31 अक्टूबर 2026
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मनीषा भनवाला वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियन: जींद के घर में जश्न, मां बोलीं — ओलंपिक गोल्ड है अगला सपना

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मनीषा भनवाला वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियन: जींद के घर में जश्न, मां बोलीं — ओलंपिक गोल्ड है अगला सपना

सारांश

जींद की बेटी मनीषा भनवाला ने सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया — वह यह खिताब पाने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी हैं। भाई के त्याग और माँ के हौसले से बनी यह चैंपियन अब ओलंपिक में तिरंगा फहराने का सपना लेकर चल रही है।

मुख्य बातें

मनीषा भनवाला ने 31 अक्टूबर 2026 को सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता।
वह यह खिताब हासिल करने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनीं।
हरियाणा के जींद स्थित परिवारिक घर में देर रात सुबह 4 बजे तक जश्न मनाया गया।
माँ मीना देवी ने मनीषा का भव्य स्वागत करने की तैयारी की और ओलंपिक गोल्ड की इच्छा जाहिर की।
भाई रिंकू ने खुद कुश्ती छोड़कर मनीषा को आगे बढ़ाया और उनके लिए सारे इंतजाम किए।

हरियाणा के जींद की बेटी मनीषा भनवाला ने 31 अक्टूबर 2026 को इतिहास रचते हुए सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता और यह खिताब हासिल करने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गईं। इस ऐतिहासिक जीत की खबर मिलते ही जींद स्थित उनके पारिवारिक घर में देर रात तक जश्न का माहौल रहा और परिवार ने उनके भव्य स्वागत की तैयारियाँ शुरू कर दी हैं।

मां मीना देवी की भावुक प्रतिक्रिया

मनीषा की माँ मीना देवी ने अपनी बेटी की इस उपलब्धि पर गर्व और खुशी व्यक्त करते हुए कहा, 'हम मनीषा का मैच फोन पर देख रहे थे। छह मिनट की कुश्ती में वो बहुत तगड़ा खेलती हैं।' उन्होंने बताया कि मनीषा के घर लौटने पर जोरदार स्वागत करने की पूरी तैयारी कर ली गई है। मीना देवी ने यह भी जाहिर किया कि अब उनकी और उनके स्वर्गीय पति की आँखें ओलंपिक गोल्ड पर टिकी हैं — यह सपना पूरे परिवार का है।

भाई रिंकू का त्याग और समर्पण

मनीषा को रेसलर बनाने में उनके भाई रिंकू का योगदान अहम रहा है। माँ मीना देवी ने बताया कि कुश्ती के लिए पहले रिंकू तैयार हुए थे, लेकिन जब मनीषा की रुचि इस खेल में दिखी तो भाई ने खुद पीछे हटकर बहन को आगे बढ़ाया और उनके लिए सारे इंतजाम भी किए। मीना देवी ने बताया, 'गाँव में जब कबड्डी हुआ करती थी, मनीषा भाई को खेलते देखने वहाँ जाती थी। धीरे-धीरे उनकी इस खेल में रुचि बन गई।'

भाई रिंकू ने खुद कहा, 'हमारी खुशियों का ठिकाना नहीं है। हम सुबह 4 बजे सोए और खूब जश्न मनाया। हर जगह से फोन आ रहे थे। यूडब्ल्यूडब्ल्यू, रेसलिंग फेडरेशन, सरकार और गाँव के लोगों का पूरा सहयोग रहा।' उन्होंने स्पष्ट किया कि मनीषा ने जो भी हासिल किया है वह अपनी कड़ी मेहनत के दम पर किया है।

परिवार की भावनाएँ और आगे का सपना

मनीषा की भाभी ममता ने भी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि घर की बेटी ने इतने बड़े मंच पर देश और गाँव का नाम रोशन किया है, यह पूरे परिवार के लिए सबसे बड़ी खुशी है। रिंकू ने बताया कि अब मनीषा का अगला लक्ष्य ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम ऊँचा करना है।

ऐतिहासिक उपलब्धि का महत्व

यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय महिला पहलवानों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अपनी पहचान बनाई है। सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतना भारतीय महिला कुश्ती के लिए एक नई ऊँचाई है — इससे पहले कोई भारतीय महिला पहलवान यह खिताब नहीं जीत पाई थी। गौरतलब है कि हरियाणा के छोटे-छोटे गाँवों से निकलकर विश्व मंच पर तिरंगा फहराने की यह परंपरा भारतीय खेल इतिहास में नई इबारत लिख रही है।

आगे क्या

परिवार मनीषा की स्वदेश वापसी पर जींद में भव्य स्वागत की तैयारी में जुटा है। माँ मीना देवी की इच्छा है कि बेटी आगे ओलंपिक में भी देश के लिए गोल्ड मेडल लेकर आए और पिता के सपने को पूरा करे। मनीषा की इस जीत ने पूरे हरियाणा में उत्साह की लहर दौड़ा दी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

भारतीय महिला कुश्ती के लिए एक संरचनात्मक बदलाव की दस्तक है। यह उन सैकड़ों परिवारों की कहानी का प्रतीक भी है जो हरियाणा के गाँवों में बेटियों की पीठ पर दांव लगाते हैं — जहाँ भाई अपना सपना छोड़कर बहन का भविष्य गढ़ते हैं। गौरतलब है कि भारतीय पहलवानों पर पिछले कुछ वर्षों में शासन-विवादों की छाया पड़ी है; ऐसे में मनीषा की उपलब्धि खेल संघों और खिलाड़ियों, दोनों के लिए नई शुरुआत का मौका है। असली सवाल अब यह है कि क्या सरकार और फेडरेशन इस गति को ओलंपिक चक्र में ठोस प्रशिक्षण-समर्थन में बदल पाएँगे।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनीषा भनवाला ने कौन-सा ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया?
मनीषा भनवाला सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनी हैं। यह उपलब्धि उन्होंने 31 अक्टूबर 2026 को हासिल की।
मनीषा भनवाला कहाँ से हैं और उनकी पृष्ठभूमि क्या है?
मनीषा भनवाला हरियाणा के जींद जिले की रहने वाली हैं। कुश्ती में उनकी रुचि बचपन से थी और उनके भाई रिंकू ने खुद कुश्ती छोड़कर मनीषा को आगे बढ़ाया और उनके प्रशिक्षण के सारे इंतजाम किए।
मनीषा के परिवार ने इस जीत पर कैसी प्रतिक्रिया दी?
मनीषा के परिवार ने जींद में सुबह 4 बजे तक जश्न मनाया। माँ मीना देवी ने कहा कि बेटी की घर वापसी पर जोरदार स्वागत करने की तैयारी है और ओलंपिक गोल्ड उनके पिता का भी सपना था।
मनीषा भनवाला का अगला लक्ष्य क्या है?
मनीषा का अगला सपना ओलंपिक में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना है। उनके भाई रिंकू और माँ मीना देवी दोनों ने यह बात कही कि यह सपना पूरे परिवार और उनके स्वर्गीय पिता का भी रहा है।
भारतीय महिला कुश्ती में यह जीत क्यों अहम है?
सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में कोई भारतीय महिला पहलवान इससे पहले गोल्ड मेडल नहीं जीत पाई थी। मनीषा की यह जीत भारतीय महिला कुश्ती के लिए नई ऊँचाई है और आने वाले ओलंपिक चक्र में भारत की उम्मीदें और प्रबल करती है।
राष्ट्र प्रेस
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