अमित शाह के पटेल-बयान पर सीपीआई सांसद संदोष कुमार का पलटवार: 'RSS पर प्रतिबंध लगाना पटेल का सही काम'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के सांसद पी. संदोष कुमार ने 31 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह के सरदार वल्लभभाई पटेल से जुड़े बयान पर कड़ा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि शाह ऐसे विवादास्पद बयानों के लिए पहले से ही कुख्यात हैं और भारतीय जनता पार्टी (BJP) का सरदार पटेल पर कोई दावा बनता ही नहीं, क्योंकि पटेल नेहरू मंत्रिमंडल के सदस्य थे और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर प्रतिबंध लगाने में उनकी अहम भूमिका थी।
शाह के बयान पर संदोष कुमार की तीखी प्रतिक्रिया
सीपीआई सांसद पी. संदोष कुमार ने कहा, 'वे ऐसे बयान देने के लिए बदनाम हैं। क्या भाजपा ने उन्हें इस देश का मंत्री बनाया था? सरदार पटेल नेहरू मंत्रिमंडल में एक प्रतिष्ठित मंत्री थे। क्या वे संघ परिवार के उम्मीदवार थे? इससे भी अहम बात यह है कि महात्मा गांधी की हत्या के तुरंत बाद RSS पर प्रतिबंध लगाकर सरदार पटेल ने शानदार काम किया था।' उन्होंने यह भी पूछा कि अमित शाह सरदार वल्लभभाई पटेल को लेकर इस तरह का औचित्य कैसे ठहरा सकते हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ: पटेल और आरएसएस
गौरतलब है कि 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की हत्या के बाद तत्कालीन गृह मंत्री के रूप में सरदार पटेल ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया था। सरदार वल्लभभाई पटेल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे और उन्होंने भारत के एकीकरण में केंद्रीय भूमिका निभाई थी। संदोष कुमार के अनुसार, भाजपा और RSS ने स्वतंत्रता आंदोलन में कोई प्रत्यक्ष भागीदारी नहीं की थी, इसीलिए वे 'चुनिंदा व्यक्तित्वों को अपनाने' की नीति अपनाते हैं।
इंडिया गठबंधन की चुनाव आयोग पर माँग
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में सांसद संदोष कुमार ने बताया कि 2025 से इंडिया गठबंधन के दल ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर (SIR) वापस लेने की माँग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर कई विरोध मार्च निकाले जा चुके हैं और गठबंधन ने भारत के राष्ट्रपति से अपील के साथ-साथ सर्वोच्च न्यायालय में याचिका भी दायर की है। संदोष कुमार ने इसे 'राजनीतिक और कानूनी लड़ाई' और चुनाव आयोग को बेनकाब करने का प्रयास बताया।
डीएमके का महँगाई और राज्यों के अधिकारों पर हमला
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने कहा कि देश में महँगाई तेजी से बढ़ रही है, विशेषकर खाद्य पदार्थों के दाम, और केंद्र सरकार इस पर मौन है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राज्यों का राजस्व छीन रही है और राज्यों के अधिकारों का हनन कर रही है। एलंगोवन ने डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के कमजोर होने को आर्थिक कुप्रबंधन का संकेत बताया और कहा कि 2014 से चल रहा यह प्रशासन न लोगों के हित में है और न देश के विकास में। उन्होंने महिला मोर्चे के आंदोलन का हवाला देते हुए कहा कि महँगाई की सबसे बड़ी मार महिलाओं पर पड़ती है।
राजनीतिक विवाद की आगे की दिशा
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती 31 अक्टूबर को मनाई जा रही है और सत्तारूढ़ दल व विपक्षी पार्टियाँ दोनों ही पटेल की विरासत पर अपना दावा ठोकने में जुटी हैं। इंडिया गठबंधन इस मुद्दे को आगामी चुनावी मौसम में एक प्रमुख राजनीतिक अस्त्र के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी में है।