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अमित शाह के पटेल-बयान पर सीपीआई सांसद संदोष कुमार का पलटवार: 'RSS पर प्रतिबंध लगाना पटेल का सही काम'

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अमित शाह के पटेल-बयान पर सीपीआई सांसद संदोष कुमार का पलटवार: 'RSS पर प्रतिबंध लगाना पटेल का सही काम'

सारांश

सरदार पटेल की जयंती पर सियासी तकरार तेज हो गई है। सीपीआई सांसद संदोष कुमार ने अमित शाह को याद दिलाया कि पटेल नेहरू कैबिनेट के मंत्री थे और गांधी हत्या के बाद RSS पर प्रतिबंध लगाना उनका सही फैसला था — भाजपा का पटेल पर कोई दावा नहीं बनता।

मुख्य बातें

संदोष कुमार ने 31 अक्टूबर 2026 को गृह मंत्री अमित शाह के सरदार पटेल बयान पर कड़ा पलटवार किया।
संदोष कुमार ने कहा कि महात्मा गांधी की हत्या के तुरंत बाद RSS पर प्रतिबंध लगाना सरदार पटेल का सही और शानदार निर्णय था।
सरदार पटेल नेहरू मंत्रिमंडल के सदस्य और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता थे, भाजपा से उनका कोई संबंध नहीं था।
इंडिया गठबंधन 2025 से ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR वापसी की माँग कर सर्वोच्च न्यायालय तक लड़ाई ले जा चुका है।
डीएमके प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने बढ़ती महँगाई, कमजोर रुपये और राज्यों के राजस्व पर केंद्र के कब्जे को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के सांसद पी. संदोष कुमार ने 31 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह के सरदार वल्लभभाई पटेल से जुड़े बयान पर कड़ा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि शाह ऐसे विवादास्पद बयानों के लिए पहले से ही कुख्यात हैं और भारतीय जनता पार्टी (BJP) का सरदार पटेल पर कोई दावा बनता ही नहीं, क्योंकि पटेल नेहरू मंत्रिमंडल के सदस्य थे और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर प्रतिबंध लगाने में उनकी अहम भूमिका थी।

शाह के बयान पर संदोष कुमार की तीखी प्रतिक्रिया

सीपीआई सांसद पी. संदोष कुमार ने कहा, 'वे ऐसे बयान देने के लिए बदनाम हैं। क्या भाजपा ने उन्हें इस देश का मंत्री बनाया था? सरदार पटेल नेहरू मंत्रिमंडल में एक प्रतिष्ठित मंत्री थे। क्या वे संघ परिवार के उम्मीदवार थे? इससे भी अहम बात यह है कि महात्मा गांधी की हत्या के तुरंत बाद RSS पर प्रतिबंध लगाकर सरदार पटेल ने शानदार काम किया था।' उन्होंने यह भी पूछा कि अमित शाह सरदार वल्लभभाई पटेल को लेकर इस तरह का औचित्य कैसे ठहरा सकते हैं।

ऐतिहासिक संदर्भ: पटेल और आरएसएस

गौरतलब है कि 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की हत्या के बाद तत्कालीन गृह मंत्री के रूप में सरदार पटेल ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया था। सरदार वल्लभभाई पटेल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे और उन्होंने भारत के एकीकरण में केंद्रीय भूमिका निभाई थी। संदोष कुमार के अनुसार, भाजपा और RSS ने स्वतंत्रता आंदोलन में कोई प्रत्यक्ष भागीदारी नहीं की थी, इसीलिए वे 'चुनिंदा व्यक्तित्वों को अपनाने' की नीति अपनाते हैं।

इंडिया गठबंधन की चुनाव आयोग पर माँग

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में सांसद संदोष कुमार ने बताया कि 2025 से इंडिया गठबंधन के दल ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर (SIR) वापस लेने की माँग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर कई विरोध मार्च निकाले जा चुके हैं और गठबंधन ने भारत के राष्ट्रपति से अपील के साथ-साथ सर्वोच्च न्यायालय में याचिका भी दायर की है। संदोष कुमार ने इसे 'राजनीतिक और कानूनी लड़ाई' और चुनाव आयोग को बेनकाब करने का प्रयास बताया।

डीएमके का महँगाई और राज्यों के अधिकारों पर हमला

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने कहा कि देश में महँगाई तेजी से बढ़ रही है, विशेषकर खाद्य पदार्थों के दाम, और केंद्र सरकार इस पर मौन है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राज्यों का राजस्व छीन रही है और राज्यों के अधिकारों का हनन कर रही है। एलंगोवन ने डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के कमजोर होने को आर्थिक कुप्रबंधन का संकेत बताया और कहा कि 2014 से चल रहा यह प्रशासन न लोगों के हित में है और न देश के विकास में। उन्होंने महिला मोर्चे के आंदोलन का हवाला देते हुए कहा कि महँगाई की सबसे बड़ी मार महिलाओं पर पड़ती है।

राजनीतिक विवाद की आगे की दिशा

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती 31 अक्टूबर को मनाई जा रही है और सत्तारूढ़ दल व विपक्षी पार्टियाँ दोनों ही पटेल की विरासत पर अपना दावा ठोकने में जुटी हैं। इंडिया गठबंधन इस मुद्दे को आगामी चुनावी मौसम में एक प्रमुख राजनीतिक अस्त्र के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार विपक्ष ने ऐतिहासिक तथ्यों की धार तेज़ रखी है। भाजपा का पटेल-प्रेम और कांग्रेस-विरोध एक साथ नहीं चल सकते, क्योंकि पटेल उसी कांग्रेस और उसी नेहरू सरकार के अभिन्न अंग थे। असली सवाल यह है कि क्या इतिहास के चुनिंदा पाठ से वोट तो मिल सकते हैं, पर विश्वसनीयता नहीं। चुनाव आयोग को लेकर इंडिया गठबंधन की कानूनी और राजनीतिक लड़ाई इस बयानबाजी के बीच दब जाती है, जबकि वह मुद्दा संस्थागत जवाबदेही का है और कहीं ज्यादा गंभीर है।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीपीआई सांसद संदोष कुमार ने अमित शाह के किस बयान का विरोध किया?
सीपीआई सांसद पी. संदोष कुमार ने गृह मंत्री अमित शाह द्वारा सरदार वल्लभभाई पटेल को लेकर दिए गए बयान का विरोध किया। उनका कहना था कि भाजपा या संघ परिवार का पटेल से कोई संबंध नहीं था, क्योंकि पटेल नेहरू मंत्रिमंडल के सदस्य और कांग्रेस नेता थे।
सरदार पटेल ने RSS पर प्रतिबंध कब और क्यों लगाया था?
30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की हत्या के तुरंत बाद तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने RSS पर प्रतिबंध लगाया था। सीपीआई सांसद संदोष कुमार के अनुसार यह पटेल का एक सही और ऐतिहासिक निर्णय था।
इंडिया गठबंधन ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग क्यों कर रहा है?
2025 से इंडिया गठबंधन के दल ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया वापस लेने की माँग कर रहे हैं। गठबंधन ने इसके लिए विरोध मार्च, राष्ट्रपति से अपील और सर्वोच्च न्यायालय में याचिका का सहारा लिया है।
डीएमके ने केंद्र सरकार पर क्या आरोप लगाए?
डीएमके प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राज्यों का राजस्व छीन रही है, महँगाई विशेषकर खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ रही हैं और रुपये का मूल्य गिर रहा है। उन्होंने 2014 से चल रहे शासन को न जनता और न देश के हित में बताया।
भाजपा पटेल को अपना क्यों बताने की कोशिश करती है, विपक्ष का क्या कहना है?
विपक्ष का कहना है कि भाजपा और RSS ने स्वतंत्रता आंदोलन में भागीदारी नहीं की थी, इसलिए वे गांधी और नेहरू को नजरअंदाज कर 'चुनिंदा' नेताओं को अपनाने की नीति अपनाते हैं। सीपीआई सांसद संदोष कुमार के अनुसार, इतिहास पूरी तरह भाजपा के इस दावे के खिलाफ है।
राष्ट्र प्रेस
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