मनीषा भनवाला का वर्ल्ड गोल्ड: 'रिकॉर्ड टूटने के लिए होते हैं, और लड़कियाँ चैंपियन बनें'
सारांश
मुख्य बातें
मनीषा भनवाला ने सीनियर महिला रेसलिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026 में 59 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया — वे यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बन गई हैं। नई दिल्ली में शनिवार को एक संयुक्त मीडिया संवाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके लिए इस जीत का असली मतलब तभी पूरा होगा, जब भारतीय महिलाओं का वर्ल्ड चैंपियन बनना एक अपवाद नहीं, बल्कि सामान्य बात बन जाए।
ऐतिहासिक उपलब्धि और आगे की राह
मनीषा ने कहा, 'रिकॉर्ड तोड़ने के लिए ही होते हैं और मैं चाहती हूं कि यह रिकॉर्ड और उपलब्धि भी आगे चलकर टूटे। मैं चाहती हूं कि ज्यादा से ज्यादा लड़कियां वर्ल्ड चैंपियन बनकर सामने आएं, ताकि भारतीय महिला पहलवानों का वर्ल्ड टाइटल जीतना कोई अपवाद न रहकर एक सामान्य बात बन जाए।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनकी टीम का लक्ष्य 2028 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक में भी रिकॉर्ड तोड़ना है।
भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन
इस चैंपियनशिप में भारत ने एक गोल्ड, दो सिल्वर और एक ब्रॉन्ज — कुल चार मेडल — जीतकर मेडल टैली में चौथा स्थान हासिल किया। नीलम सिरोही ने 50 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर, काजल ढोचक ने 76 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर, और तनु शर्मा ने 72 किलोग्राम वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीता।
टीम रैंकिंग में भारत 94 अंकों के साथ पाँचवें स्थान पर रहा। भारत से आगे अमेरिका, जापान, चीन और यूक्रेन रहे। यह चार मेडलों का प्रदर्शन महिला रेसलिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ है — इससे पहले 2012 और 2021 के संस्करणों में भारत ने दो-दो मेडल जीते थे, हालाँकि वे दोनों ओलंपिक वर्षों में आयोजित हुई थीं, जब प्रतिस्पर्धा का स्तर तुलनात्मक रूप से कम था।
साथी पहलवानों को मनीषा का संदेश
मनीषा ने सिरोही और ढोचक के लिए खास संदेश भी दिया। उन्होंने कहा, 'कभी-कभी दिन आपका नहीं होता। 76 किलोग्राम वर्ग में हिस्सा लेने वाली काजल के साथ ऐसा ही हुआ। इसी तरह, नीलम के लिए इतने बड़े और कड़े मुकाबले में हिस्सा लेना एक नया अनुभव था।' उन्होंने आगे कहा, 'हो सकता है कि भविष्य में भगवान ने उनके लिए कुछ और भी बेहतर सोच रखा हो, इसलिए उन्हें धैर्य रखना चाहिए और अपने मौकों का इंतजार करना चाहिए।'
धैर्य और संघर्ष की कहानी
खुद कई असफलताओं और निराशाओं का सामना कर चुकीं मनीषा ने अपने अनुभव से यही सीखा है कि इंतज़ार और धैर्य ही सफलता की नींव है। उन्होंने कहा, 'मैंने धैर्य के साथ इंतजार किया और आखिरकार मुझे अच्छे परिणाम मिले। मेरी उन्हें यही सलाह है कि वे धैर्य बनाए रखें, क्योंकि आगे उनके लिए बहुत कुछ बेहतर होने वाला है।' यह बयान उस पहलवान की ओर से आया है जो शीर्ष तक पहुँचने से पहले कई बार टूटी और फिर उठी।
आगे क्या
भारतीय महिला कुश्ती टीम की नज़रें अब 2028 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक पर हैं, जहाँ मनीषा और उनकी टीम एक और ऐतिहासिक प्रदर्शन की उम्मीद रखती हैं। गौरतलब है कि यह जीत ऐसे समय में आई है जब भारतीय कुश्ती एक कठिन दौर से उबरकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी साख फिर से स्थापित कर रही है।