31 अक्टूबर 2026
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पहला बिम्सटेक समुद्री सुरक्षा अभ्यास: भारत ने अंडमान-निकोबार में की मेजबानी, 7 देश शामिल

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पहला बिम्सटेक समुद्री सुरक्षा अभ्यास: भारत ने अंडमान-निकोबार में की मेजबानी, 7 देश शामिल

सारांश

भारत ने पहली बार बिम्सटेक समुद्री सुरक्षा अभ्यास की मेजबानी अंडमान-निकोबार में की — 7 देशों की नौसेनाओं को एक मंच पर लाकर बंगाल की खाड़ी को सुरक्षित बनाने की दिशा में यह ऐतिहासिक कदम PM मोदी की थाईलैंड शिखर वार्ता की सबसे ठोस उपलब्धि है।

मुख्य बातें

पहला बिम्सटेक समुद्री सुरक्षा अभ्यास 30 अक्टूबर 2026 को श्री विजयपुरम, अंडमान-निकोबार में शुरू हुआ।
अभ्यास 3 नवंबर 2026 तक चलेगा; इसमें तीन दिन का टेबलटॉप और दो दिन का हार्बर फेज शामिल है।
उद्घाटन वाइस एडमिरल विनीत मैकार्थी (कमांडर-इन-चीफ, अंडमान-निकोबार कमांड) ने किया।
बांग्लादेश, म्यांमार और श्रीलंका के वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल उद्घाटन समारोह में शामिल हुए।
यह अभ्यास PM मोदी की 6वें बिम्सटेक शिखर सम्मेलन (थाईलैंड) में की गई घोषणा का हिस्सा है।
लक्ष्य: समुद्री जागरूकता (MDA), HADR क्षमता और बंगाल की खाड़ी में सामूहिक सुरक्षा प्रतिक्रिया को मजबूत करना।

भारत ने 30 अक्टूबर 2026 को केंद्र शासित प्रदेश अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की राजधानी श्री विजयपुरम में पहले बिम्सटेक समुद्री सुरक्षा अभ्यास की मेजबानी शुरू की। विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच समुद्री सहयोग, परिचालन समन्वय और अंतर-संचालन क्षमता को सुदृढ़ करना है। यह अभ्यास 3 नवंबर 2026 तक चलेगा।

अभ्यास की संरचना और दायरा

पाँच दिवसीय इस अभ्यास को दो चरणों में विभाजित किया गया है। पहले तीन दिनों में 'टेबलटॉप एक्सरसाइज' (सैद्धांतिक अभ्यास) होगा, जबकि अंतिम दो दिनों में 'हार्बर फेज' आयोजित किया जाएगा, जिसमें बिम्सटेक सदस्य देशों के नौसैनिक जहाज सीधे भाग लेंगे।

अभ्यास का लक्ष्य समुद्री क्षेत्र जागरूकता (MDA) बढ़ाना, बंगाल की खाड़ी में परिचालन समन्वय स्थापित करना, मानवीय सहायता व आपदा राहत (HADR) क्षमताओं में सुधार करना, तथा आतंकवाद सहित सीमा-पार समुद्री अपराधों और समुद्री प्रदूषण से निपटने की क्षमता विकसित करना है।

उद्घाटन और प्रमुख भागीदार

अंडमान और निकोबार कमांड के कमांडर-इन-चीफ, वाइस एडमिरल विनीत मैकार्थी ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर को श्री विजयपुरम में इस अभ्यास का औपचारिक उद्घाटन किया। इस समारोह में राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा समन्वयक वाइस एडमिरल बिस्वजीत दासगुप्ता के साथ-साथ बांग्लादेश, म्यांमार और श्रीलंका के वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल उपस्थित रहे।

गौरतलब है कि यह अभ्यास उन प्रमुख पहलों में से एक है, जिनकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने थाईलैंड में आयोजित 6वें बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में की थी। यह दिल्ली घोषणापत्र की साझा प्रतिबद्धताओं को व्यावहारिक समुद्री कार्रवाई में बदलने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।

सरकार की प्रतिक्रिया और संदेश

विदेश मंत्रालय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा: 'यह अभ्यास बिम्सटेक नेताओं के साझा दृष्टिकोण को कार्य रूप देता है। इससे समुद्री सहयोग मजबूत होगा, परिचालन समन्वय और इंटरऑपरेबिलिटी बेहतर होगी, और बंगाल की खाड़ी में एक सुरक्षित, संरक्षित और स्थिर समुद्री वातावरण बनाने में मदद मिलेगी।'

अंडमान और निकोबार कमांड ने भी एक्स पर लिखा: 'इसका उद्देश्य आपसी तालमेल बढ़ाना, सूचना साझा करने की प्रक्रिया को मजबूत करना और आतंकवाद सहित समुद्री खतरों व अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों के खिलाफ सामूहिक प्रतिक्रिया को बढ़ावा देना है।'

बिम्सटेक और हिंद महासागर में भारत की भूमिका

बिम्सटेक (बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल) में बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड — कुल सात देश शामिल हैं। यह संगठन पिछले कुछ वर्षों में एक सक्रिय क्षेत्रीय मंच के रूप में उभरा है, जिसके सदस्य देश एक स्वतंत्र, शांतिपूर्ण और समृद्ध हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) के साझा दृष्टिकोण को प्राथमिकता देते हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब बंगाल की खाड़ी में समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा, अवैध मछली पकड़ने और मानव तस्करी जैसी चुनौतियाँ क्षेत्रीय चिंता का विषय बनी हुई हैं। भारत की यह मेजबानी न केवल सैन्य कूटनीति, बल्कि 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति के तहत क्षेत्रीय नेतृत्व का भी संकेत देती है। आने वाले समय में इस अभ्यास के 'हार्बर फेज' में नौसैनिक जहाजों की संयुक्त तैनाती पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो इस 'इंटरऑपरेबिलिटी' की असली परीक्षा संकट के समय होगी, अभ्यास के दौरान नहीं। अंडमान-निकोबार का चयन भी रणनीतिक है — यह द्वीप समूह मलक्का जलडमरूमध्य के प्रवेश द्वार पर है और भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति की धुरी बनता जा रहा है। असली कसौटी यह होगी कि ये साझा अभ्यास वास्तविक समुद्री घटनाओं में संयुक्त कार्रवाई में तब्दील होते हैं या नहीं।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पहला बिम्सटेक समुद्री सुरक्षा अभ्यास क्या है और कहाँ हो रहा है?
यह बिम्सटेक के सात सदस्य देशों का पहला संयुक्त समुद्री सुरक्षा अभ्यास है, जो 30 अक्टूबर से 3 नवंबर 2026 तक अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की राजधानी श्री विजयपुरम में आयोजित हो रहा है। इसमें टेबलटॉप और हार्बर फेज के जरिये समुद्री समन्वय और अंतर-संचालन क्षमता को परखा जाएगा।
इस अभ्यास में कौन-कौन से देश शामिल हैं?
बिम्सटेक के सभी सात सदस्य देश — बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड — इस अभ्यास में भागीदार हैं। उद्घाटन समारोह में बांग्लादेश, म्यांमार और श्रीलंका के वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल विशेष रूप से उपस्थित रहे।
इस अभ्यास की घोषणा कब और कहाँ हुई थी?
यह अभ्यास उन पहलों में से एक है जिनकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने थाईलैंड में आयोजित 6वें बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में की थी। यह दिल्ली घोषणापत्र की समुद्री सुरक्षा प्रतिबद्धताओं को ज़मीन पर उतारने का प्रयास है।
इस अभ्यास के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?
अभ्यास का लक्ष्य समुद्री क्षेत्र जागरूकता (MDA) बढ़ाना, बंगाल की खाड़ी में परिचालन समन्वय स्थापित करना, मानवीय सहायता व आपदा राहत (HADR) क्षमताओं में सुधार करना और आतंकवाद सहित सीमा-पार समुद्री अपराधों तथा समुद्री प्रदूषण से सामूहिक रूप से निपटने की क्षमता विकसित करना है।
बिम्सटेक क्या है और भारत के लिए इसकी क्या अहमियत है?
बिम्सटेक (बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल) सात दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का क्षेत्रीय संगठन है। भारत के लिए यह 'नेबरहुड फर्स्ट' और 'एक्ट ईस्ट' नीति का अहम स्तंभ है, जो हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने में मदद करता है।
राष्ट्र प्रेस
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