29 सितंबर 2026
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बिम्सटेक JWG-CTTC की 11वीं बैठक नई दिल्ली में संपन्न, आतंकवाद और ट्रांसनेशनल क्राइम पर सात देशों ने किया गहन मंथन

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बिम्सटेक JWG-CTTC की 11वीं बैठक नई दिल्ली में संपन्न, आतंकवाद और ट्रांसनेशनल क्राइम पर सात देशों ने किया गहन मंथन

सारांश

नई दिल्ली में भारत की अध्यक्षता में बिम्सटेक के सात देशों ने आतंकवाद, मानव तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग रोकने पर दो दिन गहन विमर्श किया। यह बैठक म्यांमार की अस्थिरता और बंगाल की खाड़ी में बढ़ते सुरक्षा खतरों की पृष्ठभूमि में और भी अहम हो जाती है।

मुख्य बातें

बिम्सटेक JWG-CTTC की 11वीं बैठक 28-29 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में संपन्न हुई।
बैठक की अध्यक्षता अतिरिक्त सचिव (आतंकवाद-रोधी) डॉ.
सुहेल एजाज खान ने की।
बिम्सटेक के सभी सात सदस्य देशों — बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका, थाईलैंड — ने भाग लिया।
मानव तस्करी, नशीले पदार्थों की तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग , आतंकी फंडिंग और कट्टरपंथ पर उप-समूहों की रिपोर्ट्स पर गहन मंथन हुआ।
भारत बिम्सटेक के भीतर सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी और आपदा प्रबंधन क्षेत्र का नेतृत्व करता है।
बिम्सटेक की स्थापना 6 जून 1997 को बैंकॉक घोषणा-पत्र के जरिए हुई थी; मुख्यालय ढाका में है।

नई दिल्ली में 28-29 सितंबर 2026 को भारत सरकार की अध्यक्षता में बिम्सटेक संयुक्त कार्य समूह (JWG-CTTC) की 11वीं बैठक सफलतापूर्वक संपन्न हुई, जिसमें आतंकवाद और ट्रांसनेशनल क्राइम पर नियंत्रण के उपायों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। बिम्सटेक के सभी सात सदस्य देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने इस महत्वपूर्ण बैठक में भाग लिया, जिसकी जानकारी विदेश मंत्रालय (MEA) ने आधिकारिक बयान जारी कर दी।

बैठक की अध्यक्षता और प्रतिनिधित्व

इस बैठक की अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (आतंकवाद-रोधी) डॉ. सुहेल एजाज खान ने की। बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड — बिम्सटेक के सभी सात सदस्य देशों के उच्च-स्तरीय प्रतिनिधि इसमें शामिल हुए।

यह ऐसे समय में आया है जब बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरे तेज़ी से जटिल होते जा रहे हैं। गौरतलब है कि भारत बिम्सटेक के भीतर सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी क्षेत्र का नेतृत्व करता है, जो इस बैठक की मेजबानी को रणनीतिक रूप से विशेष महत्व देता है।

मुख्य विषय और विमर्श

बैठक में पारंपरिक और उभरते हुए गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों पर गंभीर चर्चा हुई। JWG-CTTC के अंतर्गत गठित विभिन्न उप-समूहों की रिपोर्ट्स पर विस्तार से मंथन किया गया।

प्रमुख विषयों में मानव तस्करी, नशीले पदार्थों, साइकोट्रोपिक पदार्थों और प्रीकर्सर केमिकल्स की तस्करी रोकने के उपाय, मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी फंडिंग पर अंकुश, कानूनी और कानून प्रवर्तन सहयोग तथा कट्टरपंथ और आतंकवाद के विरुद्ध सामूहिक रणनीति शामिल रही। सभी सदस्य देशों ने क्षेत्रीय सहयोग और तालमेल को मज़बूत करने हेतु ठोस सुझाव प्रस्तुत किए।

बिम्सटेक और भारत की रणनीतिक भूमिका

बिम्सटेक यानी 'बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन' की स्थापना 6 जून 1997 को बैंकॉक घोषणा-पत्र के माध्यम से हुई थी। इसका मुख्यालय ढाका, बांग्लादेश में है। प्रारंभ में इसे BIST-EC के नाम से जाना जाता था, जिसमें केवल बांग्लादेश, भारत, श्रीलंका और थाईलैंड शामिल थे।

भारत के लिए बिम्सटेक उसकी 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' को मज़बूत करने वाला एक प्रमुख रणनीतिक मंच है। भारत इस संगठन के भीतर सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी अभियानों, आपदा प्रबंधन और ऊर्जा क्षेत्र का नेतृत्व करता है, जो दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में उसकी बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है।

आम जनता और क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर

आतंकवाद और ट्रांसनेशनल क्राइम — विशेषकर मादक पदार्थों की तस्करी और मानव तस्करी — का सबसे गहरा असर आम नागरिकों और सीमावर्ती समुदायों पर पड़ता है। इस बैठक में हुए विमर्श का उद्देश्य सात देशों के बीच सूचना-साझाकरण और संयुक्त कार्रवाई की व्यवस्था को और सुदृढ़ करना है।

यह 11वीं बैठक ऐसे समय में हुई है जब सदस्य देश म्यांमार में राजनीतिक अस्थिरता और बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा जटिलताओं का सामना कर रहे हैं। क्षेत्रीय सहयोग के बिना इन चुनौतियों से अकेले निपटना किसी भी सदस्य देश के लिए संभव नहीं।

आगे का रास्ता

बैठक में लिए गए निर्णयों और सुझावों को बिम्सटेक के व्यापक सुरक्षा ढाँचे में शामिल किया जाएगा। सभी उप-समूहों की रिपोर्ट्स पर सहमति बनने के बाद सदस्य देशों से अपेक्षा है कि वे राष्ट्रीय स्तर पर अनुशंसित उपायों को लागू करने की दिशा में कदम उठाएँगे। अगली बैठक की तिथि और स्थान की घोषणा आने वाले समय में होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका रणनीतिक महत्व कम नहीं है — खासतौर पर तब जब म्यांमार की अस्थिरता पूरे क्षेत्र में तस्करी और उग्रवाद के नए रास्ते खोल रही है। असली परीक्षा यह है कि उप-समूहों में हुई सहमतियाँ कागज़ों से निकलकर ज़मीन पर कब उतरती हैं — पिछले कई दौरों में 'सहयोग बढ़ाने' की भाषा तो आई, लेकिन संयुक्त अभियानों के ठोस नतीजे कम दिखे। भारत की अध्यक्षता और एक्ट ईस्ट पॉलिसी के बीच यह तालमेल दिखावट नहीं होना चाहिए — जब तक सदस्य देश वास्तविक खुफिया-साझाकरण और संयुक्त कार्रवाई के लिए तैयार नहीं होते, बैठकें केवल राजनयिक रस्म बनकर रह जाती हैं।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिम्सटेक JWG-CTTC की 11वीं बैठक क्या है और यह कहाँ हुई?
यह बिम्सटेक के आतंकवाद एवं ट्रांसनेशनल क्राइम नियंत्रण संयुक्त कार्य समूह (JWG-CTTC) की 11वीं बैठक थी, जो 28-29 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में भारत सरकार की मेजबानी में आयोजित हुई। बिम्सटेक के सभी सात सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने इसमें भाग लिया।
बिम्सटेक क्या है और इसमें कौन-से देश शामिल हैं?
बिम्सटेक यानी 'बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन' बंगाल की खाड़ी से लगे सात देशों — बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड — का क्षेत्रीय संगठन है। इसकी स्थापना 6 जून 1997 को बैंकॉक घोषणा-पत्र के जरिए हुई थी और इसका मुख्यालय ढाका, बांग्लादेश में स्थित है।
इस बैठक में किन विषयों पर चर्चा हुई?
बैठक में मानव तस्करी, नशीले और साइकोट्रोपिक पदार्थों की तस्करी, प्रीकर्सर केमिकल्स की तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकी फंडिंग, कानून प्रवर्तन सहयोग तथा कट्टरपंथ और आतंकवाद के विरुद्ध सामूहिक रणनीति पर गहन विमर्श हुआ। इन विषयों पर गठित उप-समूहों की रिपोर्ट्स पर विस्तार से चर्चा की गई।
बिम्सटेक में भारत की क्या भूमिका है?
भारत बिम्सटेक के भीतर सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी अभियानों, आपदा प्रबंधन और ऊर्जा क्षेत्र का नेतृत्व करता है। यह संगठन भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' का एक प्रमुख रणनीतिक मंच भी है, जिसके ज़रिए भारत दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में अपनी भूमिका को मज़बूत करता है।
इस बैठक की अध्यक्षता किसने की?
बैठक की अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (आतंकवाद-रोधी) डॉ. सुहेल एजाज खान ने की। विदेश मंत्रालय ने बैठक के समापन पर एक आधिकारिक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी।
राष्ट्र प्रेस
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