7 नवंबर 2026
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बिम्सटेक का पहला समुद्री सुरक्षा अभ्यास अंडमान में संपन्न, भारत-म्यांमार-श्रीलंका की नौसेनाएँ शामिल

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बिम्सटेक का पहला समुद्री सुरक्षा अभ्यास अंडमान में संपन्न, भारत-म्यांमार-श्रीलंका की नौसेनाएँ शामिल

सारांश

बिम्सटेक के इतिहास में पहली बार हुआ समुद्री सुरक्षा अभ्यास सिर्फ एक नौसैनिक कवायद नहीं — यह बंगाल की खाड़ी में भारत की बढ़ती समुद्री नेतृत्व भूमिका का संकेत है। थाईलैंड शिखर सम्मेलन में मोदी की घोषणा के बाद यह पहल ज़मीन पर उतरी, जो क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को संस्थागत रूप देने की कोशिश है।

मुख्य बातें

बिम्सटेक का पहला समुद्री सुरक्षा अभ्यास 30 अक्टूबर से 3 नवंबर 2026 तक अंडमान एवं निकोबार के श्री विजयपुरम में आयोजित हुआ।
भारत , म्यांमार और श्रीलंका की नौसेनाओं ने पाँच युद्धपोतों — INS तारागिरी , INS कर्मुक , INS सरयू , UMS किंग आंग जेया और SLNS गजबाहु — के साथ भाग लिया।
अभ्यास का नेतृत्व वाइस एडमिरल विनीत मैकार्थी की कमान में अंडमान और निकोबार कमांड (ANC) ने किया।
बिम्सटेक महासचिव इंद्र मणि पांडे सहित तीनों देशों के वरिष्ठ नौसैनिक और नागरिक अधिकारी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा थाईलैंड में हुए छठे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में की गई घोषणा का हिस्सा है।

बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग पहल (बिम्सटेक) का पहला समुद्री सुरक्षा अभ्यास अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के श्री विजयपुरम में सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। रक्षा मंत्रालय ने 6 नवंबर 2026 को बताया कि इस ऐतिहासिक अभ्यास में भारत, म्यांमार और श्रीलंका की नौसेनाओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया। यह बिम्सटेक के इतिहास में पहली बार है जब सदस्य देशों के बीच संगठित समुद्री सुरक्षा अभ्यास आयोजित किया गया।

अभ्यास का स्वरूप और समयसीमा

यह अभ्यास 30 अक्टूबर से 3 नवंबर 2026 तक अंडमान और निकोबार कमांड (ANC) के नेतृत्व में आयोजित किया गया। ANC भारत का एकमात्र संयुक्त त्रि-सेवा (ट्राई-सर्विस) कमांड है, जिसकी कमान वाइस एडमिरल विनीत मैकार्थी के हाथों में है। अभ्यास दो चरणों में विभाजित था — पहला चरण श्री विजयपुरम में उच्चस्तरीय बैठकों, पेशेवर चर्चाओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर केंद्रित रहा, जिसने भाग लेने वाले देशों को आपसी समन्वय और संबंध सुदृढ़ करने का अवसर दिया।

दूसरा चरण 2 और 3 नवंबर को समुद्र में आयोजित हुआ, जिसमें विभिन्न देशों की नौसेनाओं ने मिलकर समन्वित समुद्री अभियानों को अंजाम दिया। इसका प्राथमिक उद्देश्य बंगाल की खाड़ी में एक सुरक्षित और स्थिर समुद्री वातावरण को बढ़ावा देना था।

भाग लेने वाले युद्धपोत और नौसैनिक संपत्तियाँ

अभ्यास में भारतीय नौसेना के तीन युद्धपोतों — INS तारागिरी, INS कर्मुक और INS सरयू — ने हिस्सा लिया। म्यांमार नौसेना का UMS किंग आंग जेया और श्रीलंका नौसेना का SLNS गजबाहु भी इस अभ्यास में सम्मिलित रहे। बांग्लादेशी नौसेना के जहाज BNS प्रोटॉय के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन मोहम्मद मंजुरुल इस्लाम भी प्रतिनिधि के रूप में उपस्थित रहे।

वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति

इस कार्यक्रम में कई विशिष्ट प्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इनमें बिम्सटेक के महासचिव इंद्र मणि पांडे, भारत के राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा समन्वयक वाइस एडमिरल बिस्वजीत दासगुप्ता (सेवानिवृत्त), म्यांमार नौसेना की केंद्रीय कमान के प्रमुख रियर एडमिरल क्याव क्याव हटू और श्रीलंका के बंदरगाह एवं नागरिक उड्डयन मंत्रालय के एयर वाइस मार्शल एमडीआर प्रसाद (सेवानिवृत्त) प्रमुख रूप से शामिल थे। इन अधिकारियों की उपस्थिति इस अभ्यास के रणनीतिक महत्व को रेखांकित करती है।

मोदी की घोषणा से जुड़ी पहल

गौरतलब है कि यह अभ्यास उन प्रमुख पहलों में से एक है, जिनकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने थाईलैंड में आयोजित छठे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के दौरान की थी। रक्षा मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि इस अभ्यास के सफल समापन ने बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए सदस्य देशों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाया है।

क्या होगा आगे

बिम्सटेक में बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड — कुल 7 देश सदस्य हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस पहले समुद्री सुरक्षा अभ्यास का सफल आयोजन बिम्सटेक सदस्य देशों के बीच समुद्री सहयोग को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह अभ्यास भविष्य में इस क्षेत्र में बहुपक्षीय नौसैनिक सहयोग की नींव रखने का काम करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या यह एकल आयोजन एक नियमित बहुपक्षीय ढाँचे में बदल पाता है। यह ऐसे समय में आया है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की नौसैनिक उपस्थिति लगातार बढ़ रही है और बंगाल की खाड़ी रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का नया केंद्र बन रही है। भारत के लिए ANC का नेतृत्व इस अभ्यास में अपनी 'नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर' की भूमिका को मज़बूत करने का अवसर है। परंतु बिम्सटेक के सभी 7 सदस्यों की पूर्ण भागीदारी के बिना — थाईलैंड, नेपाल और भूटान इस बार मुख्य भागीदारों में नहीं थे — यह सहयोग अभी व्यापक क्षेत्रीय प्रभाव तक पहुँचने से दूर है।
RashtraPress
7 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिम्सटेक का पहला समुद्री सुरक्षा अभ्यास क्या था?
यह बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग पहल (बिम्सटेक) के इतिहास में पहली बार आयोजित समुद्री सुरक्षा अभ्यास था, जो 30 अक्टूबर से 3 नवंबर 2026 तक अंडमान एवं निकोबार के श्री विजयपुरम में हुआ। इसमें भारत, म्यांमार और श्रीलंका की नौसेनाओं ने भाग लिया।
इस अभ्यास में कौन-कौन से देश और युद्धपोत शामिल थे?
भारत ने INS तारागिरी, INS कर्मुक और INS सरयू, म्यांमार ने UMS किंग आंग जेया और श्रीलंका ने SLNS गजबाहु को इस अभ्यास में उतारा। बांग्लादेश ने पर्यवेक्षक भूमिका में अपने प्रतिनिधि भेजे।
यह अभ्यास क्यों आयोजित किया गया?
इस अभ्यास की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने थाईलैंड में आयोजित छठे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के दौरान की थी। इसका उद्देश्य बंगाल की खाड़ी में समुद्री सुरक्षा और स्थिरता के लिए बहुपक्षीय सहयोग को संस्थागत रूप देना है।
अंडमान और निकोबार कमांड की इस अभ्यास में क्या भूमिका थी?
अंडमान और निकोबार कमांड (ANC) ने इस पूरे अभ्यास का नेतृत्व किया। ANC भारत का एकमात्र संयुक्त त्रि-सेवा कमांड है और इसकी कमान वाइस एडमिरल विनीत मैकार्थी के पास है।
बिम्सटेक में कौन-से देश शामिल हैं?
बिम्सटेक में 7 सदस्य देश हैं — बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड। यह संगठन क्षेत्रीय सहयोग, आर्थिक विकास और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए कार्य करता है।
राष्ट्र प्रेस
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