ब्रिक्स आतंकवाद-रोधी कार्यसमूह: भारत ने की मज़बूती और भविष्य-तत्परता की अपील

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ब्रिक्स आतंकवाद-रोधी कार्यसमूह: भारत ने की मज़बूती और भविष्य-तत्परता की अपील

सारांश

नई दिल्ली में 11वीं ब्रिक्स CTWG बैठक में भारत ने सीमा पार आतंकवाद पर कड़ा रुख अपनाया। सचिव सिबी जॉर्ज ने ब्रिक्स के आतंकवाद-रोधी ढाँचे को भविष्य-तत्पर और नतीजों पर केंद्रित बनाने की अपील की — यह 2026 की भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के एजेंडे की स्पष्ट झलक है।

मुख्य बातें

विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने 21 मई 2026 को नई दिल्ली में 11वीं ब्रिक्स CTWG बैठक को संबोधित किया।
भारत ने सीमा पार आतंकवाद, टेरर फंडिंग और उभरती तकनीकों के दुरुपयोग पर गहरी चिंता जताई।
ब्रिक्स CTWG को मज़बूत, भविष्य-तत्पर, नवोन्मेषी और परिणाम-उन्मुख बनाने की अपील की गई।
भारत 2026 में 'बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी' थीम के तहत ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है।
इंडोनेशिया जनवरी 2025 में ब्रिक्स का पूर्ण सदस्य बना; 10 नए भागीदार देश भी 2025 में जुड़े।

विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने 21 मई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 11वीं वार्षिक ब्रिक्स काउंटर टेररिज्म वर्किंग ग्रुप (CTWG) की बैठक में सीमा पार आतंकवाद पर भारत की गहरी चिंता व्यक्त की और सभी रूपों में आतंकवाद से मिलकर लड़ने का आह्वान किया। उन्होंने ब्रिक्स सदस्य देशों से वैश्विक आतंकवाद-रोधी ढाँचे को और अधिक सक्रिय, समावेशी एवं परिणाम-उन्मुख बनाने की अपील की।

मुख्य घटनाक्रम

सिबी जॉर्ज ने अपने संबोधन में आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद का बदलता स्वरूप, टेरर फंडिंग के विस्तरित नेटवर्क, कट्टरपंथ और आतंकियों द्वारा नई एवं उभरती तकनीकों का दुरुपयोग — ये सभी चुनौतियाँ मज़बूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग और समन्वित प्रयासों की माँग करती हैं।

विदेश मंत्रालय द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर साझा जानकारी के अनुसार, सिबी जॉर्ज ने मौजूदा वैश्विक आतंकवाद-रोधी संरचना को सक्रिय, व्यापक और निरंतर वैश्विक प्रयासों के ज़रिए सुदृढ़ करने की ज़रूरत रेखांकित की।

ब्रिक्स CTWG को मज़बूत बनाने की पुकार

सिबी जॉर्ज ने ब्रिक्स CTWG को अधिक सशक्त, भविष्य के लिए तैयार, नवोन्मेषी, समावेशी और नतीजों पर केंद्रित बनाने की आवश्यकता पर विशेष ज़ोर दिया। उन्होंने सुरक्षित और आतंक-मुक्त विश्व के निर्माण हेतु ब्रिक्स सदस्य देशों के साथ सहयोग को और गहरा करने की भारत की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत 2026 में 'बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी' थीम के तहत ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। गौरतलब है कि यह थीम 2025 में रियो डी जेनेरियो में हुए 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रेखांकित लोगों-केंद्रित और मानवता-प्रथम दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करती है।

ब्रिक्स की पृष्ठभूमि

ब्रिक्स को औपचारिक रूप 2006 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की पहली बैठक में दिया गया था। पहला शिखर सम्मेलन 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में हुआ था। 2010 में दक्षिण अफ्रीका को शामिल कर 'ब्रिक' को 'ब्रिक्स' में विस्तारित किया गया, और दक्षिण अफ्रीका ने 2011 में तीसरे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भागीदारी की।

मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई जनवरी 2024 से तथा इंडोनेशिया जनवरी 2025 में ब्रिक्स के पूर्ण सदस्य बने। इसके अतिरिक्त बेलारूस, बोलीविया, कज़ाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज़्बेकिस्तान और वियतनाम 2025 में भागीदार देशों के रूप में ब्रिक्स में शामिल हुए।

आगे की राह

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान आतंकवाद-रोधी सहयोग को एजेंडे में केंद्रीय स्थान दिए जाने की उम्मीद है। विशेषज्ञों के अनुसार, सीमा पार आतंकवाद पर भारत का स्पष्ट रुख और बहुपक्षीय मंचों पर इसकी सक्रियता आने वाले महीनों में ब्रिक्स की कार्यसूची को प्रभावित कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

चीन, ईरान और सऊदी अरब जैसे देश शामिल हैं — 'जीरो टॉलरेंस' की परिभाषा पर सहमति कितनी व्यावहारिक है। ऐतिहासिक रूप से ब्रिक्स के आतंकवाद-रोधी प्रस्ताव सर्वसम्मति की भाषा में इतने पतले हो जाते हैं कि वे पाकिस्तान-समर्थित समूहों को सीधे संबोधित नहीं कर पाते। भारत की अध्यक्षता इस अंतर को पाटने का अवसर है, लेकिन इसके लिए सिर्फ बयानबाज़ी नहीं, बल्कि बाध्यकारी तंत्र की ज़रूरत होगी।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रिक्स काउंटर टेररिज्म वर्किंग ग्रुप (CTWG) क्या है?
ब्रिक्स CTWG ब्रिक्स सदस्य देशों का एक विशेष कार्यसमूह है जो आतंकवाद-रोधी सहयोग, सूचना साझाकरण और वैश्विक आतंकवाद-रोधी ढाँचे को मज़बूत बनाने पर केंद्रित है। इसकी 11वीं वार्षिक बैठक 21 मई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुई।
भारत ने इस बैठक में क्या माँग रखी?
भारत ने ब्रिक्स CTWG को अधिक सशक्त, भविष्य-तत्पर, नवोन्मेषी, समावेशी और नतीजों पर केंद्रित बनाने की अपील की। साथ ही सीमा पार आतंकवाद, टेरर फंडिंग और उभरती तकनीकों के दुरुपयोग से निपटने के लिए मज़बूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग की ज़रूरत रेखांकित की।
2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कौन कर रहा है और इसकी थीम क्या है?
भारत 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। इसकी थीम 'बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी' है, जो 2025 के रियो डी जेनेरियो शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रस्तुत लोगों-केंद्रित दृष्टिकोण पर आधारित है।
ब्रिक्स में अब कितने सदस्य देश हैं?
मूल पाँच सदस्यों (ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) के अलावा मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई जनवरी 2024 से तथा इंडोनेशिया जनवरी 2025 से पूर्ण सदस्य बने हैं। 10 अतिरिक्त देश 2025 में भागीदार देशों के रूप में जुड़े हैं।
सीमा पार आतंकवाद पर भारत का रुख ब्रिक्स में क्यों महत्त्वपूर्ण है?
भारत लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद का शिकार रहा है और बहुपक्षीय मंचों पर इसे प्राथमिकता से उठाता आया है। ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान यह मुद्दा एजेंडे में केंद्रीय स्थान पाने की स्थिति में है, जिससे भारत वैश्विक आतंकवाद-रोधी नीति को आकार देने में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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