ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ: जयशंकर बोले — आतंकवाद पर 'जीरो टॉलरेंस' भारत का अटल संकल्प
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 7 मई 2026 को 'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली वर्षगांठ पर स्पष्ट किया कि पाकिस्तान-प्रायोजित सीमा-पार आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति पूरी तरह 'जीरो टॉलरेंस' वाली है और यह संकल्प अटल बना हुआ है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर की गई पोस्ट में उन्होंने इस ऑपरेशन को भारत के निर्णायक और जवाबदेह रुख का प्रतीक बताया।
जयशंकर का बयान: संकल्प और जवाबदेही
विदेश मंत्री जयशंकर ने अपनी पोस्ट में कहा, ''एक साल पहले 'ऑपरेशन सिंदूर' ने पाकिस्तान से होने वाले सीमा-पार आतंकवाद के खिलाफ खुद की रक्षा करने के देश के संकल्प को प्रदर्शित किया था। भारत ने अपने निर्णायक कदमों से आतंकवादी गतिविधियों के लिए जवाबदेही सुनिश्चित की।'' उन्होंने यह भी जोड़ा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' का संदेश देने के लिए मजबूती और दृढ़ता के साथ खड़ा है। गौरतलब है कि यह ऑपरेशन 6-7 मई 2025 की रात को अंजाम दिया गया था।
नौसेना की भूमिका: संयुक्त अभियान की ताकत
भारतीय नौसेना के वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने गुरुवार को बताया कि 6-7 मई 2025 की रात नौसेना के जवानों ने भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना के साथ मिलकर आतंकवादी ढाँचों पर प्रिसीजन स्ट्राइक में भाग लिया। इस संयुक्त अभियान ने तीनों सेनाओं के बीच समन्वय को और मजबूत किया। उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे अभियान आगे बढ़ा, भारतीय नौसेना की अग्रिम तैनाती ने पाकिस्तान की नौसैनिक और वायु इकाइयों को रक्षात्मक स्थिति में जाने के लिए मजबूर कर दिया — वे मुख्यतः बंदरगाहों तक सीमित रहीं या अपने तट के निकट ही संचालित होती रहीं।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर असर
ग्रीस सिटी टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, 'ऑपरेशन सिंदूर' ने 2026 में पाकिस्तान के आर्थिक संकट को और गहरा कर दिया। रिपोर्ट में कहा गया कि इस सैन्य अभियान के कारण निवेशकों का भरोसा कम हुआ और पर्यटन, विमानन क्षेत्र तथा सैन्य निर्यात जैसे उभरते क्षेत्रों पर आर्थिक दबाव बढ़ा। यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पहले से ही नाजुक बनी हुई थी।
महंगाई और निवेशक विश्वास पर प्रभाव
रिपोर्ट के अनुसार, मई 2025 के सैन्य अभियान ने पाकिस्तान में महंगाई को बढ़ावा दिया, विकास की गति को धीमा किया और निवेशकों के विश्वास को कमज़ोर किया। रिपोर्ट में आगे कहा गया कि 'ऑपरेशन सिंदूर' ने संभवतः कई निवेशकों को प्रतीक्षा करने और स्थिति का आकलन करने के लिए मजबूर कर दिया। यह ऑपरेशन न केवल सैन्य दृष्टि से बल्कि रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से भी दूरगामी परिणाम लाने वाला साबित हो रहा है।
आगे क्या
विशेषज्ञों का मानना है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' की वर्षगांठ भारत की आतंकवाद-विरोधी नीति में एक नई परिपक्वता का प्रतीक है। तीनों सेनाओं के संयुक्त अभियान की सफलता भविष्य में ऐसे किसी भी खतरे के विरुद्ध भारत की तैयारी और क्षमता का संकेत देती है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत इस रणनीतिक बढ़त को कूटनीतिक स्तर पर किस प्रकार आगे ले जाता है।