साक्षी चौधरी का कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में गोल्ड: विजेंदर सिंह से प्रेरणा, विराट कोहली का आभार
सारांश
मुख्य बातें
भिवानी की बेटी साक्षी चौधरी ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 51 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। 6 अगस्त को हरियाणा के भिवानी स्थित अपने घर लौटने पर साक्षी का भव्य स्वागत किया गया, जहाँ परिजनों और समर्थकों की भारी भीड़ उनसे मिलने पहुँची।
माता-पिता से किया वादा पूरा किया
पत्रकारों से बातचीत में साक्षी ने कहा कि ग्लासगो रवाना होने से पहले उन्होंने अपने माता-पिता से गोल्ड जीतकर लौटने का वादा किया था। उन्होंने कहा, "मुझे बहुत खुशी है कि मैं अपना वादा पूरा कर सकी।" साक्षी ने यह पदक सभी देशवासियों को समर्पित किया, क्योंकि उनके अनुसार वह ग्लासगो में पूरे भारत का प्रतिनिधित्व कर रही थीं।
राष्ट्रगान का पल सबसे गर्व का क्षण
साक्षी ने ग्लासगो में पोडियम पर भारत का राष्ट्रगान बजने को अपने जीवन का सबसे गर्वपूर्ण क्षण बताया। उनके शब्दों में, "सबसे गर्व का पल वह था जब राष्ट्रगान बजाया गया और तिरंगा फहराया गया। अपनी उपलब्धि की वजह से विदेश में राष्ट्रगान सुनना एक सपना सच होने जैसा था। हम अपने देश के लिए बहुत मेहनत करते हैं और भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतना बहुत गर्व की बात है।"
विजेंदर सिंह से मिली प्रेरणा, विराट कोहली का आभार
साक्षी ने खुलासा किया कि उन्होंने मुक्केबाजी की शुरुआत ओलंपिक पदक विजेता विजेंदर सिंह को देखकर की थी। इसके साथ ही उन्होंने क्रिकेटर विराट कोहली का भी विशेष आभार व्यक्त किया, जो उनके इस सफर में स्पॉन्सर के रूप में साथ रहे।
भारतीय मुक्केबाजी का ऐतिहासिक प्रदर्शन
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने कुल 39 पदक जीते, जिनमें 13 स्वर्ण शामिल हैं। रेसलिंग, बैडमिंटन, हॉकी और शूटिंग जैसे प्रमुख खेलों की अनुपस्थिति के बावजूद यह प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा। इनमें से 10 पदक अकेले भारतीय मुक्केबाजों ने दिलाए, जिनमें महिला मुक्केबाजों के 5 स्वर्ण पदक शामिल हैं — यह भारतीय मुक्केबाजी टीम का कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।
साक्षी की यह उपलब्धि भिवानी को 'बॉक्सिंग की नर्सरी' के रूप में स्थापित करने वाली उस विरासत को और मज़बूत करती है, जो विजेंदर सिंह के दौर से चली आ रही है। आगे उनकी नज़र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बड़े मंचों पर देश का प्रतिनिधित्व करने पर टिकी है।