5 नवंबर 2026
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कैबिनेट का बड़ा फैसला: 'विस्तार' योजना, अग्निवीरों को नियमित भर्ती का मौका, ₹14,500 करोड़ की एनर्जी स्टोरेज स्कीम मंजूर

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कैबिनेट का बड़ा फैसला: 'विस्तार' योजना, अग्निवीरों को नियमित भर्ती का मौका, ₹14,500 करोड़ की एनर्जी स्टोरेज स्कीम मंजूर

सारांश

एक ही बैठक में पाँच बड़े फैसले — अग्निवीरों को स्थायित्व की उम्मीद, ऊर्जा भंडारण में ₹14,500 करोड़ का दांव, क्रिटिकल मिनरल में आत्मनिर्भरता की कोशिश और डेटा प्रशासन में सुधार। मोदी कैबिनेट का यह सत्र नीतिगत व्यापकता के लिहाज़ से असाधारण रहा।

मुख्य बातें

केंद्रीय कैबिनेट ने 4 नवंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में पाँच बड़े फैसलों को मंजूरी दी।
विस्तार (VISTAR) योजना 2026-27 से 2030-31 तक लागू होगी; राष्ट्रीय डेटा प्रबंधन और सांख्यिकीय सुधार पर केंद्रित।
25% अग्निवीरों को सीधे नियमित सेवा का अवसर; शेष 75% के लिए दो वर्ष की अतिरिक्त सेवा अवधि के बाद स्थायी भर्ती का रास्ता।
₹14,500 करोड़ की VGF योजना से 92 गीगावॉट-घंटे की ग्रिड-स्केल एनर्जी स्टोरेज क्षमता विकसित होगी।
₹2,814 करोड़ की कैपेक्स स्कीम से लिथियम, निकेल प्रसंस्करण को बढ़ावा; EV, BESS, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्र को फायदा।
फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट्स की केंद्र प्रायोजित योजना रेप और पॉक्सो मामलों के लिए वित्त वर्ष 2030-31 तक जारी रहेगी।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 4 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में एक साथ पाँच बड़े फैसलों को हरी झंडी दी — जिनमें सांख्यिकीय सुधार की 'विस्तार' योजना, अग्निवीरों के लिए नियमित रक्षा सेवा का नया मार्ग, ₹14,500 करोड़ की ग्रिड-स्केल एनर्जी स्टोरेज स्कीम, ₹2,814 करोड़ की क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग कैपेक्स योजना और फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट्स का 2030-31 तक विस्तार शामिल हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इन फैसलों की जानकारी साझा की।

विस्तार योजना: सांख्यिकी और डेटा प्रबंधन को नई दिशा

मंत्रिमंडल ने 'विकसित भारत इनिशिएटिव फॉर स्टैटिस्टिकल ट्रांसफॉर्मेशन, एनालिटिक्स एंड रिसर्च' (विस्तार) योजना को 2026-27 से 2030-31 तक लागू करने की अनुमति दी है। इस योजना का उद्देश्य बड़े स्तर पर सर्वेक्षणों का आधुनिकीकरण, नई शोध पद्धतियों का विकास और राष्ट्रीय डेटा प्रबंधन ढाँचे को मज़बूत करना है।

यह ऐसे समय में आया है जब GDP, रोज़गार और मूल्य सूचकांक जैसे आधिकारिक आँकड़ों की विश्वसनीयता पर बहस चल रही है। विस्तार योजना के तहत संसाधनों का लचीला उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा, जो डिजिटल बदलाव को केंद्र में रखेगी।

अग्निवीरों के लिए नियमित भर्ती का नया ढाँचा

सरकार ने अग्निवीर योजना में एक महत्वपूर्ण संशोधन को मंजूरी दी है। नई व्यवस्था के अनुसार, 25 प्रतिशत अग्निवीरों को सीधे रक्षा बलों में नियमित नौकरी का अवसर दिया जाएगा। शेष 75 प्रतिशत अग्निवीरों के लिए दो वर्ष की अतिरिक्त सेवा अवधि निर्धारित की जाएगी, जिसके बाद निर्धारित मानक पूरे करने वाले उम्मीदवारों को नियमित सैनिक के रूप में सेना में स्थायी स्थान मिलेगा।

गौरतलब है कि 2022 में शुरू की गई अग्निवीर योजना विपक्ष की लगातार आलोचना का केंद्र रही है। आलोचकों का कहना है कि चार साल की अनुबंध सेवा के बाद अधिकांश युवाओं के लिए स्थायित्व की कोई गारंटी नहीं थी। यह संशोधन उसी असंतोष को संबोधित करने का प्रयास माना जा रहा है।

ऊर्जा सुरक्षा: ₹14,500 करोड़ की एनर्जी स्टोरेज और ₹2,814 करोड़ की क्रिटिकल मिनरल स्कीम

कैबिनेट ने ग्रिड-स्केल एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के लिए ₹14,500 करोड़ की 'वायबिलिटी गैप फंडिंग' (VGF) योजना को स्वीकृति दी है। इससे 92 गीगावॉट-घंटे की ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित होगी, जो नवीकरणीय ऊर्जा को बिजली ग्रिड से जोड़ने और चौबीसों घंटे सस्ती बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में एक ठोस कदम है।

इसके साथ ही, लिथियम और निकेल जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए ₹2,814 करोड़ की कैपेक्स सपोर्ट स्कीम भी मंजूर की गई। यह योजना इलेक्ट्रिक वाहन (EV), बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS), इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा और विशेष इस्पात क्षेत्रों के लिए घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करेगी।

फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट: रेप और पॉक्सो मामलों में त्वरित न्याय जारी रहेगा

मंत्रिमंडल ने बलात्कार और पॉक्सो (बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम) मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट्स की केंद्र प्रायोजित योजना को वित्त वर्ष 2030-31 तक जारी रखने की अनुमति दी है। सरकार का कहना है कि यह कदम यौन अपराधों के पीड़ितों — विशेषकर महिलाओं और बच्चों — को समयबद्ध न्याय दिलाने की दिशा में एक निरंतर प्रतिबद्धता है।

आगे की राह

विदेश मंत्री जयशंकर के अनुसार, इन पाँचों फैसलों का सामूहिक उद्देश्य देश की डेटा प्रशासन, ऊर्जा सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज आत्मनिर्भरता, रक्षा रोज़गार और न्यायिक त्वरण व्यवस्था को एक साथ मज़बूत करना है। इन योजनाओं के क्रियान्वयन की रूपरेखा और विस्तृत दिशानिर्देश संबंधित मंत्रालयों द्वारा आने वाले हफ्तों में जारी किए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसने भर्ती की गुणवत्ता और सेना के मनोबल दोनों पर सवाल खड़े किए। दो साल की अतिरिक्त सेवा का प्रावधान एक ढाँचागत सुधार है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि नियमित भर्ती के मानक कितने पारदर्शी और सुलभ होंगे। ₹14,500 करोड़ की एनर्जी स्टोरेज स्कीम भारत की नवीकरणीय ऊर्जा यात्रा के लिए ज़रूरी थी, लेकिन 92 गीगावॉट-घंटे का लक्ष्य 2030 तक प्रस्तावित 500 GW अक्षय ऊर्जा क्षमता की तुलना में अभी भी महत्वाकांक्षी से कम लगता है। एक बैठक में पाँच असंबद्ध क्षेत्रों पर फैसला नीतिगत व्यापकता नहीं, बल्कि क्रियान्वयन संसाधनों पर दबाव का संकेत भी हो सकता है।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विस्तार (VISTAR) योजना क्या है?
विस्तार का पूरा नाम 'विकसित भारत इनिशिएटिव फॉर स्टैटिस्टिकल ट्रांसफॉर्मेशन, एनालिटिक्स एंड रिसर्च' है। यह 2026-27 से 2030-31 तक लागू होने वाली सरकारी योजना है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय सर्वेक्षणों का आधुनिकीकरण, डिजिटल डेटा प्रबंधन और नई शोध पद्धतियों का विकास करना है।
अग्निवीरों के लिए नई नियमित भर्ती व्यवस्था कैसे काम करेगी?
नई व्यवस्था के तहत 25 प्रतिशत अग्निवीरों को सीधे रक्षा बलों में नियमित सेवा का अवसर मिलेगा। शेष 75 प्रतिशत के लिए दो साल की अतिरिक्त सेवा अवधि होगी, जिसके बाद निर्धारित मानक पूरे करने वाले उम्मीदवार नियमित सैनिक बन सकेंगे।
₹14,500 करोड़ की एनर्जी स्टोरेज योजना से क्या फायदा होगा?
यह 'वायबिलिटी गैप फंडिंग' योजना ग्रिड-स्केल पर 92 गीगावॉट-घंटे की एनर्जी स्टोरेज क्षमता विकसित करेगी। इससे सौर और पवन जैसी नवीकरणीय ऊर्जा को बिजली ग्रिड से जोड़ना आसान होगा और लोगों को 24 घंटे सस्ती और स्थिर बिजली मिल सकेगी।
क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग कैपेक्स स्कीम किन क्षेत्रों को फायदा देगी?
₹2,814 करोड़ की यह कैपेक्स सपोर्ट स्कीम लिथियम और निकेल जैसे खनिजों के घरेलू प्रसंस्करण को बढ़ावा देगी। इसका सीधा लाभ इलेक्ट्रिक वाहन (EV), बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS), इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा और विशेष इस्पात क्षेत्रों को मिलेगा।
फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट्स का विस्तार क्यों किया गया?
केंद्रीय कैबिनेट ने रेप और पॉक्सो (POCSO) मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए इन विशेष अदालतों को वित्त वर्ष 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दी है। सरकार का कहना है कि यौन अपराधों के पीड़ितों को समयबद्ध न्याय दिलाना इसका प्राथमिक उद्देश्य है।
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