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राजस्थान वायु प्रदूषण: सवाई माधोपुर का एक्यूआई 306, 'अत्यंत खराब' श्रेणी में; जयपुर-बीकानेर भी चपेट में

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राजस्थान वायु प्रदूषण: सवाई माधोपुर का एक्यूआई 306, 'अत्यंत खराब' श्रेणी में; जयपुर-बीकानेर भी चपेट में

सारांश

सर्दियों की दस्तक के साथ राजस्थान में वायु प्रदूषण का संकट गहरा गया है। सवाई माधोपुर का एक्यूआई 306 तक पहुँच गया है — 'अत्यंत खराब' श्रेणी में। बीकानेर, जयपुर समेत दर्जन से अधिक शहर 'खराब' श्रेणी में हैं और सरकार ने दिल्ली-एनसीआर से सटे जिलों में निर्माण कार्य पर रोक लगा दी है।

मुख्य बातें

सवाई माधोपुर राजस्थान का सबसे प्रदूषित शहर, एक्यूआई 306 — 'अत्यंत खराब' श्रेणी; प्राथमिक प्रदूषक पीएम2.5 ।
बीकानेर (273) , दौसा (232) , चूरू (231) और जयपुर (207) सहित कई शहर 'खराब' श्रेणी में।
टोंक, जोधपुर, हनुमानगढ़, डीग, पाली, भरतपुर समेत अनेक शहरों में एक्यूआई 'मध्यम' श्रेणी में।
बच्चे, वरिष्ठ नागरिक और श्वसन व हृदय रोगियों को लंबे समय तक बाहर न निकलने की सलाह।
राजस्थान सरकार ने दिल्ली-एनसीआर से सटे जिलों में निर्माण व विध्वंस गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया।

सर्दियों की शुरुआत के साथ राजस्थान में वायु प्रदूषण का स्तर तेज़ी से बिगड़ रहा है। नवीनतम वायु गुणवत्ता बुलेटिन के अनुसार, सवाई माधोपुर राज्य का सर्वाधिक प्रदूषित शहर बन गया है, जिसका वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 306 दर्ज किया गया — जो 'अत्यंत खराब' श्रेणी में आता है। 7 नवंबर 2026 को जारी इस बुलेटिन में राज्य के दर्जनों शहरों की स्थिति चिंताजनक बताई गई है।

सवाई माधोपुर सबसे प्रदूषित, पीएम2.5 प्राथमिक कारण

सवाई माधोपुर में एक्यूआई 306 दर्ज होने के साथ पीएम2.5 को प्रमुख प्रदूषक के रूप में पहचाना गया है। यह सूक्ष्म कण फेफड़ों की गहराई तक पहुँचकर श्वसन तंत्र को नुकसान पहुँचाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, 301 से 400 के बीच का एक्यूआई स्तर दीर्घकालिक संपर्क में आने पर गंभीर श्वसन रोगों को जन्म दे सकता है।

राज्य के अन्य शहरों की स्थिति

सवाई माधोपुर के बाद बीकानेर का एक्यूआई 273 रहा, जहाँ पीएम10 प्रमुख प्रदूषक रहा। इसके अलावा दौसा (232), चूरू (231), सीकर (227), नागौर (225), अलवर (224), झुंझुनू (224), करौली (215), श्री गंगानगर (213), जैसलमेर (210) और जयपुर (207) भी 'खराब' श्रेणी में बने रहे। उल्लेखनीय है कि 201 से 300 के बीच का एक्यूआई 'खराब' माना जाता है और इससे सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।

टोंक (196), जोधपुर (192), हनुमानगढ़ (186), डीग (185), पाली (184) और भरतपुर (179) सहित कई शहरों में एक्यूआई 101 से 200 के बीच 'मध्यम' श्रेणी में रहा। झालावाड़, कोटा, चित्तौड़गढ़, बूंदी, भीलवाड़ा, उदयपुर और सिरोही में भी प्रदूषण का स्तर मध्यम दर्ज किया गया।

संवेदनशील वर्गों पर गंभीर असर

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चे, वरिष्ठ नागरिक और अस्थमा, फेफड़े व हृदय रोग से पीड़ित व्यक्ति बिगड़ती वायु गुणवत्ता के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील होते हैं। ऐसे लोगों के लिए 'खराब' और 'अत्यंत खराब' एक्यूआई वाले क्षेत्रों में बाहर निकलना स्वास्थ्य के लिहाज़ से जोखिमभरा हो सकता है।

सरकार की सलाह और प्रतिबंध

बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए अधिकारियों ने निवासियों को लंबे समय तक बाहर न निकलने की सलाह दी है, विशेष रूप से उन इलाकों में जहाँ वायु गुणवत्ता 'खराब' या 'अत्यंत खराब' श्रेणी में है। इसके अतिरिक्त, दिल्ली-एनसीआर में खराब वायु गुणवत्ता के मद्देनज़र राजस्थान सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी के निकट स्थित जिलों में निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया है।

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर भारत के अधिकांश मैदानी राज्यों में सर्दियों की धुंध और पराली जलाने से वायु गुणवत्ता का संकट गहराता जा रहा है। आने वाले हफ्तों में तापमान गिरने और हवाओं की गति कम होने से स्थिति और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन दीर्घकालिक नीतिगत हस्तक्षेप की रफ़्तार उस तेज़ी से नहीं बढ़ती। निर्माण प्रतिबंध और 'बाहर न निकलने' की सलाह तात्कालिक राहत तो दे सकती है, परंतु पराली जलाने, वाहन उत्सर्जन और औद्योगिक धूल जैसे मूल स्रोतों पर बिना ठोस कार्रवाई के यह चक्र हर नवंबर में दोहराता रहेगा। यह भी ध्यान देने योग्य है कि सवाई माधोपुर जैसे अपेक्षाकृत छोटे शहरों में 306 जैसे एक्यूआई का दर्ज होना यह संकेत देता है कि प्रदूषण अब केवल महानगरों की समस्या नहीं रही — और छोटे शहरों में निगरानी व स्वास्थ्य बुनियादी ढाँचे की कमी इस संकट को और गंभीर बनाती है।
RashtraPress
7 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सवाई माधोपुर का एक्यूआई इतना खराब क्यों है?
नवीनतम वायु गुणवत्ता बुलेटिन के अनुसार सवाई माधोपुर का एक्यूआई 306 है, जिसमें पीएम2.5 प्राथमिक प्रदूषक है। सर्दियों में तापमान गिरने और हवा की गति कम होने से प्रदूषक कण हवा में अधिक देर तक टिके रहते हैं, जिससे एक्यूआई तेज़ी से बढ़ता है।
एक्यूआई 306 का स्वास्थ्य पर क्या असर होता है?
301 से 400 के बीच का एक्यूआई 'अत्यंत खराब' श्रेणी में आता है। इस स्तर पर दीर्घकालिक संपर्क से श्वसन संबंधी गंभीर बीमारियाँ हो सकती हैं। बच्चे, वरिष्ठ नागरिक, अस्थमा और हृदय रोगी सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।
राजस्थान सरकार ने प्रदूषण को लेकर क्या कदम उठाए हैं?
राजस्थान सरकार ने दिल्ली-एनसीआर के निकट स्थित जिलों में निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया है। इसके अलावा अधिकारियों ने निवासियों को, विशेषकर संवेदनशील वर्गों को, लंबे समय तक बाहर न निकलने की सलाह दी है।
राजस्थान के कौन-से शहर सबसे ज़्यादा प्रदूषित हैं?
7 नवंबर 2026 के बुलेटिन के अनुसार सवाई माधोपुर (306), बीकानेर (273), दौसा (232), चूरू (231), सीकर (227) और जयपुर (207) राज्य के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में शामिल हैं। इनमें से अधिकांश 'खराब' या 'अत्यंत खराब' श्रेणी में हैं।
एक्यूआई की 'खराब' और 'अत्यंत खराब' श्रेणी में क्या फ़र्क है?
मानक एक्यूआई वर्गीकरण के अनुसार 201 से 300 के बीच का स्तर 'खराब' और 301 से 400 के बीच का स्तर 'अत्यंत खराब' माना जाता है। 'खराब' श्रेणी में सांस लेने में तकलीफ हो सकती है, जबकि 'अत्यंत खराब' में दीर्घकालिक संपर्क से स्थायी श्वसन रोग विकसित होने का जोखिम रहता है।
राष्ट्र प्रेस
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