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राजस्थान में मौसमी बीमारियों पर सख्ती: स्वास्थ्य मंत्री खींवसर ने दिए विशेष निगरानी टीम गठन के निर्देश

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राजस्थान में मौसमी बीमारियों पर सख्ती: स्वास्थ्य मंत्री खींवसर ने दिए विशेष निगरानी टीम गठन के निर्देश

सारांश

दिल्ली और बेंगलुरु में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों के बीच राजस्थान सरकार ने कमर कस ली है। स्वास्थ्य मंत्री खींवसर ने उच्च जोखिम क्षेत्रों में विशेष टीमें, फर्स्ट रेफरल यूनिट में तीन डॉक्टरों की अनिवार्य तैनाती और तीन दिन में स्टाफिंग रिपोर्ट के कड़े निर्देश दिए।

मुख्य बातें

राजस्थान स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने 25 अगस्त 2026 को जयपुर में मौसमी बीमारियों पर व्यापक समीक्षा बैठक की।
डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, स्क्रब टायफस और स्वाइन फ्लू (एच1एन1) की स्थिति की समीक्षा की गई।
उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में विशेष निगरानी टीमें गठित करने के निर्देश; जाँच और उपचार सेवाएँ 24 घंटे उपलब्ध रखने का आदेश।
सभी फर्स्ट रेफरल यूनिट और ट्रॉमा सेंटरों में तीन डॉक्टरों की टीम अनिवार्य; स्टाफिंग मानक न पालने वाले संस्थानों की रिपोर्ट 3 दिन में माँगी।
जहाँ सीटी स्कैन-एमआरआई नहीं, वहाँ PPP मॉडल से सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी।
जैसलमेर के रामदेवरा मेले के लिए विशेष स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई।

राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को जयपुर स्थित स्वास्थ्य भवन में मौसमी बीमारियों की रोकथाम को लेकर व्यापक समीक्षा बैठक की। दिल्ली और बेंगलुरु सहित देश के कई हिस्सों में एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) के मामलों में वृद्धि के मद्देनज़र राज्य सरकार ने निगरानी तंत्र को और अधिक सुदृढ़ करने का फैसला किया है।

बैठक में किन बीमारियों की हुई समीक्षा

बैठक में डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, स्क्रब टायफस और स्वाइन फ्लू की मौजूदा स्थिति का विस्तृत आकलन किया गया। खींवसर ने उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में विशेष निगरानी दल तैनात करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी संयुक्त निदेशकों और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने और सक्रिय रणनीति अपनाने को कहा।

अस्पतालों में सुविधाओं की समीक्षा

मंत्री ने अस्पतालों में उपलब्ध चिकित्सा उपकरणों, जाँच सुविधाओं और दवाओं की उपलब्धता की भी गहन समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिया कि जाँच और उपचार सेवाएँ हर समय उपलब्ध रहें, विशेषकर स्वाइन फ्लू के मामले में। खींवसर ने बताया कि अधिकांश उन्नत चिकित्सा संस्थानों में सीटी स्कैन और एमआरआई की सुविधा पहले से मौजूद है; जहाँ नहीं है, वहाँ पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के ज़रिए सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी।

स्टाफिंग और तैनाती पर सख्त आदेश

स्वास्थ्य मंत्री ने राज्य के सभी फर्स्ट रेफरल यूनिट और ट्रॉमा सेंटरों में तीन डॉक्टरों की अनिवार्य टीम सुनिश्चित करने के आदेश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती मरीजों की संख्या के अनुपात में हो और किसी एक पद पर एक से अधिक व्यक्ति तैनात न किए जाएँ। संयुक्त निदेशकों को ऐसे संस्थानों की रिपोर्ट तीन दिनों के भीतर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया जहाँ स्टाफिंग मानकों का पालन नहीं हो रहा।

रामदेवरा मेले की स्वास्थ्य तैयारियाँ

बैठक में जैसलमेर जिले में आयोजित होने वाले रामदेवरा मेले के लिए स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने अधिकारियों को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) द्वारा माँगे गए स्टाफ और अन्य सुविधाएँ समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। गौरतलब है कि बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ के कारण मौसमी बीमारियों के प्रसार का जोखिम बढ़ जाता है।

अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति

बैठक में सेतु ऐप, टीबी मुक्त भारत अभियान, एचपीवी टीकाकरण, अर्बन आयुष्मान आरोग्य मंदिर, पीसीटीएस डिलीवरी वॉच कार्यक्रम और आयुष्मान भारत डिजिटल हेल्थ मिशन की प्रगति पर भी चर्चा हुई। इस अवसर पर एनएचएम अतिरिक्त मिशन निदेशक टी. शुभमंगला, आरसीएच निदेशक मधु रतेश्वर और अस्पताल प्रशासन के अतिरिक्त निदेशक नरोत्तम शर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। आने वाले हफ्तों में निगरानी टीमों की फील्ड रिपोर्ट के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ज़मीनी तैयारी की असली परीक्षा फील्ड रिपोर्टों में होगी। तीन दिन में स्टाफिंग रिपोर्ट माँगना एक सकारात्मक जवाबदेही कदम है, पर PPP मॉडल से सीटी स्कैन-एमआरआई जैसी सुविधाएँ देने की योजना तभी कारगर होगी जब अनुबंध और दरें पहले से तय हों। रामदेवरा जैसे बड़े मेलों में भीड़-जनित संक्रमण का जोखिम वास्तविक है और उसके लिए केवल स्टाफ आवंटन नहीं, बल्कि रैपिड रिस्पॉन्स प्रोटोकॉल की भी ज़रूरत होती है।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान में स्वाइन फ्लू को लेकर सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने 25 अगस्त 2026 को समीक्षा बैठक कर उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में विशेष निगरानी टीमें गठित करने और स्वाइन फ्लू की जाँच व उपचार सेवाएँ हर समय उपलब्ध रखने के निर्देश दिए। यह कदम दिल्ली और बेंगलुरु में एच1एन1 के बढ़ते मामलों के मद्देनज़र उठाया गया है।
राजस्थान के किन अस्पतालों में तीन डॉक्टरों की टीम अनिवार्य की गई है?
राज्य के सभी फर्स्ट रेफरल यूनिट और ट्रॉमा सेंटरों में तीन डॉक्टरों की टीम की उपलब्धता अनिवार्य की गई है। जहाँ यह मानक पूरा नहीं हो रहा, वहाँ के संयुक्त निदेशकों को तीन दिनों के भीतर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।
जिन अस्पतालों में सीटी स्कैन या एमआरआई नहीं है, वहाँ क्या व्यवस्था होगी?
स्वास्थ्य मंत्री खींवसर ने बताया कि जिन संस्थानों में सीटी स्कैन और एमआरआई की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहाँ पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के ज़रिए ये सेवाएँ मरीजों को उपलब्ध कराई जाएँगी।
रामदेवरा मेले के लिए राजस्थान सरकार ने क्या स्वास्थ्य तैयारियाँ की हैं?
जैसलमेर जिले में आयोजित होने वाले रामदेवरा मेले के लिए स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की बैठक में विशेष समीक्षा की गई। मंत्री ने अधिकारियों को CMHO द्वारा माँगे गए स्टाफ और अन्य सुविधाएँ समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
इस बैठक में मौसमी बीमारियों के अलावा किन स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर चर्चा हुई?
बैठक में सेतु ऐप, टीबी मुक्त भारत अभियान, एचपीवी टीकाकरण, अर्बन आयुष्मान आरोग्य मंदिर, पीसीटीएस डिलीवरी वॉच कार्यक्रम और आयुष्मान भारत डिजिटल हेल्थ मिशन की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
राष्ट्र प्रेस
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