दिल्ली में स्वाइन फ्लू के 1,344 मामले, पिछले साल से छह गुना उछाल; स्वास्थ्य मंत्री बोले — पूरी तैयारी
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में एच1एन1 इन्फ्लूएंजा (स्वाइन फ्लू) के मामलों में इस वर्ष चिंताजनक वृद्धि दर्ज की गई है। 11 अगस्त 2026 तक राजधानी में 1,344 मामले सामने आ चुके हैं, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में केवल 229 मामले थे — यानी करीब छह गुना की बढ़ोतरी। दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने कहा है कि सरकार स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
मुख्य घटनाक्रम
स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने स्पष्ट किया कि अस्पतालों में दवाइयाँ, बेड और वेंटिलेटर की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जा चुकी है। उन्होंने कहा, 'मरीज आ रहे हैं और डॉक्टर उनका ठीक से इलाज कर रहे हैं।' विभाग मई से ही इस मौसमी बीमारी को लेकर सक्रिय हो जाता है और लक्षण पाए जाने पर भर्ती की प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी जाती है।
दिल्ली हाई कोर्ट का संज्ञान और पिछली सरकार पर आरोप
दिल्ली उच्च न्यायालय ने हेल्थकेयर उपकरणों से जुड़े मामले में स्वतः संज्ञान लिया था। इस पर स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने न्यायालय का धन्यवाद करते हुए कहा कि पिछली सरकार ने कई हेल्थकेयर मशीनें खरीदी थीं, लेकिन उन्हें संचालित करने के लिए न तो विशेषज्ञ नियुक्त किए गए थे और न ही प्रशिक्षित स्टाफ था। उन्होंने इसे 'दिल्ली के लोगों के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक स्थिति' बताया।
सरकार की प्रतिक्रिया और सुधार के दावे
मंत्री के अनुसार, वर्तमान सरकार के सत्ता में आने के बाद से स्टाफ की कमी दूर की गई है और पूर्व में अनुपयोगी पड़े उपकरणों की मरम्मत कर उन्हें सेवा में लाया गया है। उन्होंने कहा, '11 साल की समस्या को दूर करने में थोड़ा वक्त तो लगेगा ही।' बेड की संख्या बढ़ाई गई है और वेंटिलेटर को सक्रिय किया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब मानसून के मौसम में श्वसन संक्रमण के मामले पूरे उत्तर भारत में बढ़ते हैं।
आम जनता पर असर
गौरतलब है कि स्वाइन फ्लू के लक्षण — तेज बुखार, खाँसी, गले में खराश और साँस लेने में कठिनाई — सामान्य मौसमी फ्लू से मिलते-जुलते हैं, जिससे समय पर पहचान ज़रूरी हो जाती है। स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि लक्षण दिखते ही तुरंत नज़दीकी सरकारी अस्पताल से संपर्क करें।
क्या होगा आगे
स्वास्थ्य विभाग ने संकेत दिया है कि निगरानी तंत्र को और मज़बूत किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के शेष महीनों में मामलों की संख्या में और उतार-चढ़ाव संभव है, इसलिए सतर्कता बनाए रखना आवश्यक है।