राजस्थान: सलूम्बर में बच्चों की मृत्यु के बाद 3,600 से अधिक स्वास्थ्य टीमें सक्रिय
सारांश
Key Takeaways
- 3,690 स्वास्थ्य टीमें सक्रिय हैं।
- 52,000 घरों का सर्वेक्षण किया गया है।
- 275 लक्षण वाले व्यक्तियों की पहचान हुई है।
- 13,000 से अधिक जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए हैं।
- स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है।
जयपुर, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। सलूम्बर जिले में बच्चों की मृत्यु के मामले को गंभीरता से लेते हुए राजस्थान सरकार ने तुरंत कार्रवाई की है। इसके तहत उदयपुर संभाग के सभी सात जिलों में व्यापक रोग नियंत्रण और निगरानी अभियान का आगाज किया गया है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में, बीमारी के कारणों की गहराई से जांच के लिए विशेषज्ञ टीमों का गठन किया गया है। इस बीच, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने भी स्थिति की संपूर्ण निगरानी रखी है।
आरएनटी मेडिकल कॉलेज की टीम और राज्य स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और इलाज और जांच की प्रक्रिया को लेकर मार्गदर्शन प्रदान किया।
प्रमुख सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) गायत्री राठौड़ ने कहा कि 3,690 टीमों ने घर-घर जाकर सर्वेक्षण किया, जिसमें 52,000 से अधिक घरों को कवर किया गया। इस दौरान 275 लक्षण वाले व्यक्तियों की पहचान की गई, जिनमें से 25 को बेहतर चिकित्सा के लिए उच्च चिकित्सा केंद्रों में भेजा गया।
सूचना, शिक्षा और संचार अभियानों के तहत 13,000 से अधिक स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए।
जनस्वास्थ्य निदेशक डॉ. रवि प्रकाश शर्मा ने सलूम्बर जिले के सेमारी गांव में चार साल के एक बच्चे की मृत्यु की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि मंगलवार को पूरे संभाग में 651 मरीजों का मौके पर उपचार किया गया।
रोकथाम के लिए 2,557 स्थानों पर मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों को रोकने के लिए एंटी-लार्वा गतिविधियाँ चलाई गईं। इसके अलावा 1,796 ब्लड स्लाइड तैयार की गईं और 94 सैंपल जांच के लिए एकत्र किए गए।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि किसी भी लक्षण के दिखने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें और जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें।
अधिकारियों के अनुसार, स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और आवश्यकतानुसार तत्परता से कार्रवाई की जा रही है।