प्रधानमंत्री मोदी ने बैशाखी, पुथांडु और महा बिशुबा पाना संक्रांति के लिए दीं शुभकामनाएं
सारांश
Key Takeaways
- प्रधानमंत्री मोदी ने बैशाखी, पुथांडु और महाबिशुबा पाना संक्रांति पर शुभकामनाएं दीं।
- इन त्योहारों का महत्व हमारे सांस्कृतिक विविधता में है।
- बैशाखी किसानों की मेहनत का जश्न है।
- पुथांडु तमिल नववर्ष का उत्सव है।
- महाबिशुबा पाना संक्रांति ओडिशा की परंपराओं को दर्शाता है।
नई दिल्ली, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत की सांस्कृतिक विविधता का परिचय देते हुए आज विभिन्न राज्यों में धूमधाम से पर्व मनाए जा रहे हैं। ओडिशा में 'महाबिशुबा पाना संक्रांति', पंजाब में 'बैशाखी' और तमिलनाडु में 'पुथांडु' के रूप में नए साल का स्वागत किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन त्योहारों के अवसर पर सभी देशवासियों को दिल से शुभकामनाएं देते हुए सुख, शांति और समृद्धि की कामना की है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पोस्ट पर महाबिशुबा पाना संक्रांति के पवित्र अवसर पर कहा है, "यह विशेष अवसर भक्ति, सद्भाव और मौसमी नवीनीकरण के मूल्यों को दर्शाता है। यह ओडिशा की समृद्ध परंपराओं का प्रतिबिंब है। मैं प्रार्थना करता हूं कि यह वर्ष असीमित अवसरों और सफलताओं से भरा हो। यह शुभ दिन सभी के लिए शांति, सुख और समृद्धि लाए। यह त्योहार एकता की भावना को और गहरा करे और हमारे समाज को जोड़ने वाले बंधनों को मजबूत करे।"
पीएम मोदी ने दूसरे एक्स पोस्ट में लिखा है, "पुथांडु के शुभ अवसर पर आपको हार्दिक शुभकामनाएं! मैं प्रार्थना करता हूं कि यह वर्ष सुख, सफलता और अच्छे स्वास्थ्य से परिपूर्ण हो। यह विशेष दिन नवीनीकरण, आशा और नई शुरुआत का उत्सव है। यह तमिल संस्कृति की महानता का सम्मान करने का अवसर है। साहित्य, संगीत, कला, दर्शन और भक्ति की इसकी समृद्ध विरासत दुनिया भर के लोगों को प्रेरित करती रहती है। यह विशेष दिन हमारे समाज में एकता की भावना को और मजबूत करे। महान तमिल संस्कृति से प्रेरित होकर, हम सफलता की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करें और प्रकृति के साथ अपने जुड़ाव को भी गहरा करें।
इसी प्रकार, प्रधानमंत्री मोदी ने बैशाखी की शुभकामनाएं दी हैं। एक्स पोस्ट पर उन्होंने लिखा है, "बैशाखी एक जीवंत त्योहार है, जो कृतज्ञता, नवजीवन और आशा की भावना को दर्शाता है। यह हमारे किसानों की मेहनत का जश्न है, जिनकी लगन से हमारा देश भोजन प्राप्त करता है। बैशाखी का आध्यात्मिक महत्व भी गहरा है, क्योंकि यह श्री गुरु गोविंद सिंह जी द्वारा खालसा पंथ की स्थापना का प्रतीक है। पूज्य सिख गुरुओं की शिक्षाएं हमें एक बेहतर समाज के निर्माण में प्रेरित करती हैं। यह त्योहार सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और नई ऊर्जा लाए।