उत्तर प्रदेश में न्यूनतम वेतन के बारे में फैलाई गई भ्रामक सूचनाओं का सरकार ने किया खंडन
सारांश
Key Takeaways
- उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यूनतम वेतन को लेकर भ्रामक सूचनाओं का खंडन किया।
- श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन बढ़ाने की प्रक्रिया जारी है।
- नियोक्ता संगठनों को श्रमिकों के अधिकारों का सम्मान करने की अपील की गई है।
नई दिल्ली, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश सरकार ने एक प्रेस नोट में स्पष्ट किया है कि कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर न्यूनतम वेतन को लेकर फैलाया जा रहा यह झूठा समाचार कि श्रमिकों का वेतन 20000 रुपये प्रति माह हो गया है, पूरी तरह से मनगढ़ंत है। नियोक्ता संगठन इस जानकारी का पालन नहीं कर रहे हैं, ऐसी बाते भी असत्य हैं।
वास्तव में, भारत सरकार नई श्रम संहिताओं (लेबर कोड) के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर पर न्यूनतम फ्लोर वेज निर्धारित करने की प्रक्रिया में है। इस प्रक्रिया का लक्ष्य देशभर के श्रमिकों के लिए एक समान न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करना है, ताकि सभी राज्यों में श्रमिकों को उचित पारिश्रमिक प्राप्त हो सके।
राज्य सरकार ने नियोक्ता संगठनों और श्रमिक संगठनों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया है। सभी सुझावों और आपत्तियों का गहनता से परीक्षण किया जा रहा है, ताकि एक संतुलित निर्णय लिया जा सके।
हाल में, उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यूनतम वेतन की दरें अधिसूचित की हैं। इसके अनुसार अकारगर श्रमिकों को 11313.65 रुपये मासिक तथा दैनिक मजदूरी 435.14 रुपये निर्धारित की गई है। अर्धकुशल श्रमिकों के लिए मासिक मजदूरी 12446 रुपये और दैनिक मजदूरी 478.69 रुपये तय की गई है। कुशल श्रमिकों के लिए वर्तमान में 13940.37 रुपये मासिक और 536.16 रुपये दैनिक वेतन निर्धारित किया गया है।
सरकार ने कहा है कि उद्योग जगत वर्तमान में वैश्विक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि और निर्यात में कमी के साथ ही श्रमिकों की समस्याएं और मांगें भी महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में, उद्योग और श्रमिकों के बीच सामंजस्यपूर्ण दृष्टिकोण रखना आवश्यक है।
इसके अलावा, सरकार ने बताया कि वेतन और मजदूरी से संबंधित प्रावधान नई वेतन संहिता के अंतर्गत श्रमिकों के हितों की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं। सभी पक्षों को सुनने के बाद, न्यूनतम वेतन में तात्कालिक अंतरिम वृद्धि की जा रही है। अगले महीने गठित होने वाले वेज बोर्ड की अनुशंसा पर न्यूनतम वेतन तय किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर जो भ्रामक सूचनाएं प्रसारित हो रही हैं, वे पूरी तरह से निराधार हैं। मुख्यमंत्री ने जनता से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं पर विश्वास करें। उत्तर प्रदेश सरकार श्रमिकों के कल्याण और औद्योगिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने नियोक्ता संगठनों से भी अपील की है कि वे श्रमिकों को नियमानुसार वेतन, ओवर टाइम, साप्ताहिक अवकाश, बोनस और सामाजिक सुरक्षा के सभी अधिकार प्रदान करें। कार्य स्थल पर महिला श्रमिकों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करें।
साथ ही, सरकार ने उन अराजक तत्वों की कड़ी निंदा की है जो माहौल को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं और ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।