बांग्लादेश: CPJ की अपील — पत्रकार फरजाना रुपा और मोजम्मेल बाबू को रिहा करें, ICT का दुरुपयोग बंद हो
सारांश
मुख्य बातें
अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता संगठन कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ) ने बांग्लादेश के अधिकारियों से पत्रकार फरजाना रुपा और मोजम्मेल बाबू को तत्काल रिहा करने की माँग की है। दोनों को अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) में दर्ज मानवता-विरोधी अपराध के एक मामले में 14 मई को गिरफ्तारी का आदेश दिया गया। CPJ ने साफ कहा है कि इस न्यायिक ढाँचे का उपयोग पत्रकारों को निशाना बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
मुख्य घटनाक्रम
ICT की न्यायाधीश मोहम्मद गोलाम मोर्तुजा मजुमदार की अध्यक्षता वाली पीठ ने 14 मई को फरजाना रुपा, मोजम्मेल बाबू और पूर्व मंत्री दीपु मोनी को गिरफ्तार करने का आदेश दिया। यह मामला 2013 में ढाका के शापला चत्तार में हुई हिफाजत-ए-इस्लाम रैली के विरुद्ध हुई कार्रवाई से जुड़ा है। अदालत ने 7 जून को जाँच रिपोर्ट जमा करने की तारीख तय की है।
अभियोजकों के अनुसार, रुपा पर आरोप है कि उन्होंने उस घटना के बाद एकोत्तर टीवी पर प्रसारित अपनी रिपोर्ट में 'विवादित व्यक्तियों' के बयान शामिल किए और 'भ्रामक जानकारी' फैलाई, जिससे कथित तौर पर उस कार्रवाई में हुई मौतों से ध्यान हटा। उस समय चैनल के प्रबंध निदेशक रहे बाबू पर प्रसारण की निगरानी और मृत्युदर छुपाने के प्रयास का आरोप लगाया गया है।
CPJ की प्रतिक्रिया
CPJ के एशिया-प्रशांत प्रोग्राम को-ऑर्डिनेटर कुणाल मजुमदार ने कहा, 'पत्रकारों के संपादकीय निर्णय मानवता के खिलाफ अपराध नहीं हैं, और अंतर्राष्ट्रीय न्यायिक ढाँचे का इस्तेमाल पत्रकारों को दंडित करने के लिए करना बांग्लादेश के संविधान और अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का उल्लंघन है।' संगठन ने अधिकारियों से ICT को 'हथियार की तरह' इस्तेमाल करने की नीति तुरंत बंद करने का आग्रह किया।
पत्रकारों की मौजूदा स्थिति
फरजाना रुपा और मोजम्मेल बाबू अगस्त और सितंबर 2024 से अलग-अलग हत्या मामलों में पहले से ही हिरासत में हैं। 11 मई को उच्च न्यायालय ने रुपा को छह मामलों में अंतरिम जमानत दी, लेकिन ICT मामले सहित अन्य लंबित मामलों के कारण वह अभी भी जेल में हैं।
ICT की पृष्ठभूमि और बदलाव
ICT को मूल रूप से 2010 में बांग्लादेश के मुक्ति युद्ध (1971) के दौरान हुए अपराधों की सुनवाई के लिए गठित किया गया था। मोहम्मद युनूस की अंतरिम सरकार इस न्यायाधिकरण में बदलाव लेकर आई है। इसी अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मृत्युदंड का फैसला भी सुनाया है।
क्या होगा आगे
ICT में अगली सुनवाई 7 जून को निर्धारित है, जब जाँच रिपोर्ट पेश होनी है। CPJ और अन्य प्रेस स्वतंत्रता संगठनों का अंतरराष्ट्रीय दबाव जारी रहने की संभावना है। यह मामला इस बात की कसौटी बनेगा कि बांग्लादेश में नई अंतरिम सरकार के तहत मीडिया की स्वतंत्रता किस दिशा में जाती है।