30 जुलाई 2026
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बांग्लादेश के ICT पर HRW का बड़ा सवाल: शेख हसीना मुकदमे में निष्पक्ष सुनवाई के मानक नहीं

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बांग्लादेश के ICT पर HRW का बड़ा सवाल: शेख हसीना मुकदमे में निष्पक्ष सुनवाई के मानक नहीं

सारांश

ह्यूमन राइट्स वॉच ने बांग्लादेश के ICT को कटघरे में खड़ा किया है — शेख हसीना समेत 41 लोगों पर आरोप दाखिल होने के बीच संगठन का कहना है कि मुकदमे अंतरराष्ट्रीय निष्पक्ष सुनवाई मानकों पर खरे नहीं उतर रहे। सवाल सिर्फ जवाबदेही का नहीं, बल्कि न्याय की विश्वसनीयता का भी है।

मुख्य बातें

ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) ने 29 जुलाई 2026 को बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) पर अंतरराष्ट्रीय कानूनी मानकों की अनदेखी का आरोप लगाया।
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और 40 अन्य लोगों पर 2013 के शापला चत्तर मामले में मानवता के विरुद्ध अपराधों के आरोप दाखिल किए गए।
27 जुलाई को दो पत्रकारों सहित कुल 41 लोगों पर नरसंहार और मानवता के विरुद्ध अपराध के आरोप लगाए गए।
HRW के अनुसार, अभियोजन पक्ष द्वारा साक्ष्य साझा करने के मात्र तीन सप्ताह बाद सुनवाई शुरू हो सकती है — बचाव पक्ष को पर्याप्त समय नहीं मिलता।
फरवरी 2026 में सत्ता में आई BNP सरकार ने पूर्व अंतरिम सरकार के ट्रिब्यूनल संशोधनों में कोई बदलाव नहीं किया।
HRW ने गवाहों के बयानों में हूबहू दोहराव की ओर इशारा करते हुए साक्ष्य की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए।

प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) ने 29 जुलाई 2026 को बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि यह अदालत अंतरराष्ट्रीय कानूनी मानकों पर खरी नहीं उतर रही। संगठन ने चेतावनी दी है कि इन खामियों के चलते पीड़ितों को न्याय मिलने में बाधा आ सकती है, कानून के शासन को नुकसान पहुँच सकता है और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को गलत तरीके से जेल भेजा जा सकता है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब सोमवार, 27 जुलाई को ICT के अभियोजन पक्ष ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और 40 अन्य लोगों के खिलाफ मानवता के विरुद्ध अपराधों से जुड़े एक मामले में औपचारिक आरोप दाखिल किए। यह मामला 2013 में ढाका के शापला चत्तर में हुई हिफाजत-ए-इस्लाम रैली पर की गई कार्रवाई से संबंधित है।

मुख्य आरोप और चिंताएँ

HRW की उप एशिया निदेशक मीनाक्षी गांगुली ने कहा, 'शेख हसीना सरकार के दौरान हुए कई कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। लेकिन कई मामलों में मुकदमे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निष्पक्ष सुनवाई के मानकों पर खरे नहीं उतर रहे। बांग्लादेश को अपने आपराधिक न्याय तंत्र में तुरंत सुधार करने की जरूरत है। नई सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि खराब जांच और मनमाने आरोपों के जरिए राजनीतिक बदले की भावना को बढ़ावा न मिले।'

संगठन के अनुसार, ट्रिब्यूनल से जुड़ा कानून अभियोजकों को पर्याप्त साक्ष्य की प्रारंभिक सीमा पूरी किए बिना ही किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी की माँग करने की अनुमति देता है। इसके अलावा, आरोपियों को कई महीनों तक हिरासत में रखा जा सकता है और किसी अलग अदालत में अंतरिम अपील का अधिकार भी नहीं दिया जाता।

प्रक्रियागत खामियाँ

HRW ने विस्तार से बताया कि अभियोजन पक्ष द्वारा साक्ष्य साझा किए जाने के मात्र तीन सप्ताह बाद ही मुकदमे की सुनवाई शुरू हो सकती है, जिससे बचाव पक्ष को तैयारी के लिए अत्यंत कम समय मिलता है। संगठन ने यह भी कहा कि अनुपस्थिति में चलने वाले मुकदमों में पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं हैं — जैसे कि आरोपी को अपनी पसंद का वकील चुनने का अधिकार। इसके साथ ही, ट्रिब्यूनल बचाव पक्ष के वकीलों की गवाहों से जिरह करने की क्षमता को भी सीमित करता है।

गौरतलब है कि संगठन ने आरोप लगाया कि ट्रिब्यूनल के अभियोजक और न्यायाधीश ऐसे बयानों पर भरोसा कर रहे हैं जिनके कई हिस्से अलग-अलग गवाहों के बयानों में हूबहू दोहराए गए हैं — जो इन बयानों की विश्वसनीयता और प्रामाणिकता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

ट्रिब्यूनल की पृष्ठभूमि

यह ट्रिब्यूनल मूल रूप से मार्च 2010 में शेख हसीना के नेतृत्व वाली आवामी लीग सरकार ने स्थापित किया था, ताकि 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना का साथ देने वाले लोगों पर मुकदमा चलाया जा सके। 2024 में जब विरोध प्रदर्शनों के बाद आवामी लीग सरकार सत्ता से बाहर हो गई, तो मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने ट्रिब्यूनल कानून में संशोधन किए और अपराधों की परिभाषा में बदलाव किए।

हालांकि, HRW के अनुसार, ये संशोधन भी उचित कानूनी प्रक्रिया और अंतरराष्ट्रीय अदालतों जैसी प्रक्रियागत सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त नहीं थे। उल्लेखनीय है कि फरवरी 2026 में सत्ता में आई बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की सरकार ने भी उन संशोधनों में कोई बदलाव नहीं किया है।

आरोपों का दायरा

27 जुलाई 2026 को अभियोजकों ने दो पत्रकारों सहित कुल 41 लोगों के खिलाफ ट्रिब्यूनल में आरोप दाखिल किए, जिनमें मानवता के विरुद्ध अपराध और नरसंहार के आरोप शामिल हैं। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समुदाय में बांग्लादेश की न्यायिक प्रक्रिया को लेकर चिंताओं को और गहरा कर दिया है।

यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि बांग्लादेश सरकार HRW की इन सिफारिशों पर क्या रुख अपनाती है और क्या आने वाले महीनों में ट्रिब्यूनल की प्रक्रियाओं में कोई सुधार किया जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वही अब खुद न्यायिक जवाबदेही के कटघरे में है। HRW की आपत्तियाँ तकनीकी नहीं हैं — तीन सप्ताह में सुनवाई, बिना सबूत के गिरफ्तारी, और दोहराए गए गवाह बयान ये संरचनात्मक खामियाँ हैं जो किसी भी निर्णय की वैधता को कमज़ोर करती हैं। विडंबना यह है कि BNP — जो खुद आवामी लीग के दौर में इसी ट्रिब्यूनल की आलोचना करती थी — अब सत्ता में आकर उन्हीं संशोधनों को बरकरार रखे हुए है। न्याय और राजनीतिक बदले के बीच की यह महीन रेखा बांग्लादेश के लोकतांत्रिक भविष्य के लिए सबसे बड़ी परीक्षा है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ह्यूमन राइट्स वॉच ने बांग्लादेश के ICT पर क्या आरोप लगाए हैं?
HRW ने आरोप लगाया है कि बांग्लादेश का इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल अंतरराष्ट्रीय निष्पक्ष सुनवाई के मानकों का पालन नहीं कर रहा। संगठन के अनुसार, पर्याप्त साक्ष्य के बिना गिरफ्तारी, बचाव पक्ष को कम समय और दोहराए गए गवाह बयान जैसी खामियाँ न्याय प्रक्रिया की विश्वसनीयता को कमज़ोर करती हैं।
शेख हसीना पर ICT में क्या आरोप हैं?
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और 40 अन्य लोगों पर 2013 में ढाका के शापला चत्तर में हिफाजत-ए-इस्लाम रैली पर की गई कार्रवाई से जुड़े मानवता के विरुद्ध अपराधों के आरोप दाखिल किए गए हैं। यह मामला 27 जुलाई 2026 को ICT में दर्ज हुआ।
बांग्लादेश का इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल क्या है और यह कब बना?
ICT की स्थापना मार्च 2010 में शेख हसीना की आवामी लीग सरकार ने की थी, ताकि 1971 के मुक्ति युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना का साथ देने वाले लोगों पर मुकदमा चलाया जा सके। 2024 में सरकार बदलने के बाद अंतरिम सरकार ने इसके कानून में संशोधन किए, जो HRW के अनुसार अपर्याप्त हैं।
BNP सरकार ने ICT के संशोधनों पर क्या रुख अपनाया है?
फरवरी 2026 में सत्ता में आई बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की सरकार ने पूर्व अंतरिम सरकार द्वारा किए गए ट्रिब्यूनल संशोधनों में कोई बदलाव नहीं किया है। HRW का मानना है कि ये संशोधन भी अंतरराष्ट्रीय प्रक्रियागत सुरक्षा मानकों के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
ICT की प्रक्रिया में बचाव पक्ष के लिए क्या समस्याएँ हैं?
HRW के अनुसार, अभियोजन पक्ष द्वारा साक्ष्य साझा करने के केवल तीन सप्ताह बाद सुनवाई शुरू हो सकती है। आरोपियों को अपनी पसंद का वकील चुनने का अधिकार नहीं, अंतरिम अपील का अधिकार नहीं, और बचाव पक्ष की गवाहों से जिरह करने की क्षमता भी सीमित है।
राष्ट्र प्रेस
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