बांग्लादेश: CPJ की माँग — चार पत्रकारों पर 'राजनीति से प्रेरित' हत्या के मामले वापस ले यूनुस सरकार
सारांश
Key Takeaways
- CPJ ने बांग्लादेश के कानून मंत्री मोहम्मद असदुज्जमां को पत्र लिखकर फरजाना रूपा, शकील अहमद, मोजम्मेल हक बाबू और श्यामल दत्ता की रिहाई की माँग की।
- चारों पत्रकार 18 महीने से अधिक (लगभग 600 दिन) से हत्या के आरोप में हिरासत में हैं, लेकिन अब तक कोई चार्जशीट दाखिल नहीं हुई।
- CPJ के अनुसार, ये मामले पत्रकारों के कथित राजनीतिक जुड़ाव के आधार पर गढ़े गए हैं, न कि किसी विश्वसनीय साक्ष्य पर।
- श्यामल दत्ता को हिरासत में स्ट्रोक आया; मोजम्मेल हक बाबू को प्रोस्टेट कैंसर है और उन्हें फॉलो-अप देखभाल नहीं मिल रही।
- फरजाना रूपा को नवंबर 2024 में मृत्युदंड प्राप्त कैदियों के लिए आरक्षित सेल में रखा गया था।
कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ) ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार से चार पत्रकारों — फरजाना रूपा, शकील अहमद, मोजम्मेल हक बाबू और श्यामल दत्ता — को तत्काल रिहा करने की अपील की है। CPJ के अनुसार, इन सभी पर लगाए गए हत्या के आरोप राजनीति से प्रेरित हैं और 18 महीने से अधिक की हिरासत के बाद भी कोई ठोस चार्जशीट दाखिल नहीं की जा सकी है।
मामले की पृष्ठभूमि
CPJ ने बांग्लादेश के कानून, न्याय और संसदीय मामलों के मंत्री मोहम्मद असदुज्जमां को एक विस्तृत पत्र लिखा है। इसमें बताया गया है कि चारों पत्रकारों को मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के कार्यकाल में हिरासत में लिया गया था। संगठन का आरोप है कि ये कार्रवाइयाँ पत्रकारों के कथित राजनीतिक जुड़ाव के आधार पर की गई हैं, न कि किसी विश्वसनीय आपराधिक साक्ष्य के आधार पर।
CPJ के पत्र में कहा गया,