फर्जी PhonePe स्क्रीन दिखाकर ₹4,000 की ठगी, दहिसर पुलिस ने दो आरोपी किए गिरफ्तार

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फर्जी PhonePe स्क्रीन दिखाकर ₹4,000 की ठगी, दहिसर पुलिस ने दो आरोपी किए गिरफ्तार

सारांश

दहिसर में दो ठगों ने फर्जी PhonePe स्क्रीन दिखाकर पान दुकानदार से ₹4,000 नकद ऐंठ लिए — QR कोड स्कैन किया, नकली पेमेंट मैसेज दिखाया और रफूचक्कर होने लगे। दुकानदार की सतर्कता और पुलिस की तेज़ कार्रवाई ने दोनों को मौके के पास ही पकड़ लिया। यह मामला छोटे व्यापारियों के लिए डिजिटल पेमेंट सत्यापन की अनिवार्यता को रेखांकित करता है।

Key Takeaways

  • 23 अप्रैल 2026 को दहिसर पूर्व, मुंबई में फर्जी PhonePe ऐप से ₹4,000 की ठगी का मामला सामने आया।
  • आरोपियों ने QR कोड स्कैन कर नकली ₹3,000 और ₹1,000 के ट्रांजैक्शन संदेश दिखाए और नकद ले लिया।
  • दहिसर पुलिस ने दुकानदार की सूचना पर तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।
  • भारतीय दंड संहिता और आईटी अधिनियम की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज; पूछताछ जारी।
  • पुलिस ने व्यापारियों को सलाह दी — स्क्रीनशॉट नहीं, बैंक खाते में राशि की पुष्टि के बाद ही भुगतान स्वीकार करें।

मुंबई के दहिसर इलाके में डिजिटल पेमेंट धोखाधड़ी का एक नया मामला सामने आया है, जिसमें दो युवकों ने फर्जी मोबाइल ऐप के ज़रिए एक पान दुकानदार से ₹4,000 नकद ठग लिए। दहिसर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को मौके के पास से ही गिरफ्तार कर लिया। यह घटना 23 अप्रैल 2026 की दोपहर करीब 4:30 बजे की बताई जा रही है।

कैसे दिया गया ठगी को अंजाम

दहिसर पूर्व स्थित एक पान की दुकान पर दो युवक पहुँचे और दुकानदार से ₹4,000 का लेन-देन करने की बात कही। आरोपियों ने दुकान का QR कोड स्कैन किया और अपने मोबाइल पर फर्जी ट्रांजैक्शन स्क्रीन दिखाई। पुलिस के अनुसार, उन्होंने पहले ₹3,000 और फिर ₹1,000 के नकली भुगतान संदेश दुकानदार को दिखाए, जिससे उसे विश्वास हो गया कि पैसे ट्रांसफर हो चुके हैं।

इसके बाद आरोपियों ने अपने एक अन्य साथी की मदद से दुकानदार से ₹4,000 नकद ले लिए। यह तरीका उन धोखेबाज़ों की जानी-पहचानी रणनीति है जो PhonePe, Google Pay जैसे लोकप्रिय डिजिटल प्लेटफॉर्म की नकल करने वाले फर्जी ऐप का इस्तेमाल करते हैं।

दुकानदार की सतर्कता और पुलिस की कार्रवाई

कुछ ही देर बाद जब दुकानदार के मोबाइल पर पैसे प्राप्त होने का कोई संदेश नहीं आया, तो उसे संदेह हुआ। उसने आरोपियों से ट्रांजैक्शन हिस्ट्री दिखाने को कहा, लेकिन वे मौके से भागने लगे। दुकानदार ने तत्काल दहिसर पुलिस स्टेशन को सूचना दी।

पुलिस ने तेज़ी से पीछा कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में भारतीय दंड संहिता और आईटी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

पूछताछ में क्या आया सामने

पुलिस के अनुसार, आरोपी इसी तरह कई दुकानदारों को निशाना बनाने की फिराक में थे। फिलहाल दोनों से पूछताछ जारी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्होंने इससे पहले और कितने लोगों को इस तरह ठगा है। गौरतलब है कि डिजिटल भुगतान ठगी के ऐसे मामले महाराष्ट्र में तेज़ी से बढ़ रहे हैं, जहाँ छोटे व्यापारी और दुकानदार अक्सर इस तरह के फर्जीवाड़े का शिकार बनते हैं।

पुलिस की अपील और सावधानी के उपाय

दहिसर पुलिस ने आम नागरिकों और विशेषकर छोटे व्यापारियों से अपील की है कि किसी भी डिजिटल भुगतान को स्वीकार करने से पहले अपने बैंक खाते में राशि जमा होने की पुष्टि अवश्य करें। पुलिस ने स्पष्ट किया कि केवल स्क्रीनशॉट या मोबाइल संदेश पर भरोसा करना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि इन्हें आसानी से फर्जी बनाया जा सकता है। यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि डिजिटल इंडिया की राह में साइबर जागरूकता उतनी ही ज़रूरी है जितनी तकनीक का अपनाना।

Point of View

और इनका सबसे आसान शिकार वे व्यापारी हैं जिन्होंने हाल ही में डिजिटल भुगतान अपनाया है। विडंबना यह है कि 'डिजिटल इंडिया' अभियान ने लेन-देन को सरल तो बनाया, लेकिन साइबर साक्षरता पर उतना ज़ोर नहीं दिया जितना ज़रूरी था। दहिसर का यह मामला एक बड़े नीतिगत सवाल की ओर इशारा करता है — क्या सरकार और भुगतान कंपनियाँ मिलकर छोटे व्यापारियों के लिए रियल-टाइम सत्यापन तंत्र को और मज़बूत बनाएंगी? जब तक जागरूकता और तकनीकी सुरक्षा साथ-साथ नहीं चलती, ऐसे फर्जीवाड़े थमने वाले नहीं हैं।
NationPress
29/04/2026

Frequently Asked Questions

दहिसर डिजिटल पेमेंट ठगी में आरोपियों ने क्या तरीका अपनाया?
आरोपियों ने फर्जी मोबाइल ऐप का इस्तेमाल कर PhonePe जैसी नकली पेमेंट स्क्रीन दिखाई और QR कोड स्कैन कर ₹4,000 के नकली ट्रांजैक्शन संदेश दुकानदार को दिखाए। इसके बाद उन्होंने दुकानदार से नकद ले लिया, जबकि वास्तव में कोई पैसा ट्रांसफर नहीं हुआ था।
दहिसर ठगी के आरोपियों पर कौन-सी धाराएँ लगाई गई हैं?
दहिसर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और आईटी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। दोनों आरोपी फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं और उनसे पूछताछ जारी है।
फर्जी UPI पेमेंट ठगी से कैसे बचें?
पुलिस की सलाह है कि किसी भी डिजिटल भुगतान को स्वीकार करने से पहले अपने बैंक खाते या UPI ऐप में राशि जमा होने की पुष्टि करें। केवल खरीदार के मोबाइल पर दिखने वाले स्क्रीनशॉट या संदेश पर भरोसा न करें, क्योंकि इन्हें आसानी से फर्जी बनाया जा सकता है।
क्या आरोपियों ने पहले भी इस तरह की ठगी की है?
पुलिस के अनुसार, आरोपी इसी तरह कई अन्य दुकानदारों को निशाना बनाने की फिराक में थे। पूछताछ जारी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्होंने इससे पहले और कितने लोगों के साथ धोखाधड़ी की है।
यह घटना कब और कहाँ हुई?
यह घटना 23 अप्रैल 2026 की दोपहर करीब 4:30 बजे मुंबई के दहिसर पूर्व स्थित एक पान की दुकान पर हुई। दहिसर पुलिस ने दुकानदार की सूचना पर तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।
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