7 नवंबर 2026
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बांग्लादेश के खुलना में रवींद्रनाथ टैगोर के भित्ति चित्र पर काली स्याही, व्यापक आक्रोश

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बांग्लादेश के खुलना में रवींद्रनाथ टैगोर के भित्ति चित्र पर काली स्याही, व्यापक आक्रोश

सारांश

बांग्लादेश के खुलना में रवींद्रनाथ टैगोर के म्यूरल पर काली स्याही — और यह पहली बार नहीं है। ढाका में एक महीने पहले भी यही हुआ था। आलोचकों का कहना है कि यह सुनियोजित है और सांस्कृतिक विरासत पर बढ़ते हमलों की एक खतरनाक शृंखला की कड़ी है।

मुख्य बातें

बांग्लादेश के खुलना में ओल्ड जेसोर रोड पर बने रवींद्रनाथ टैगोर के भित्ति चित्र पर काली स्याही पोतकर उसे विरूपित किया गया।
दीवार पर 7 प्रमुख हस्तियों के चित्र थे, परंतु केवल टैगोर के चित्र को निशाना बनाया गया।
खुलना सदर पुलिस स्टेशन के प्रभारी लुकमान हुसैन ने जाँच शुरू करने की पुष्टि की; अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं।
लगभग एक महीने पहले ढाका में बांग्लादेश शिल्पकला अकादमी के बाहर भी टैगोर का म्यूरल विरूपित किया गया था।
बांग्लादेश के 37 प्रमुख नागरिकों ने पहले की घटना पर सांप्रदायिक तनाव बढ़ने की चेतावनी दी थी।
सांस्कृतिक संगठन नाट्यलोक के महासचिव शरीफुल इस्लाम सलीम ने संगठित समूह के हाथ होने की आशंका जताई।

बांग्लादेश के खुलना शहर में नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर के भित्ति चित्र (म्यूरल) को कथित तौर पर काली स्याही पोतकर विरूपित कर दिया गया है। ओल्ड जेसोर रोड के किनारे बनी दीवार पर बने इस म्यूरल के साथ की गई छेड़छाड़ की जानकारी 7 नवंबर 2026 को सामने आई, जिसके बाद स्थानीय लोगों और सांस्कृतिक संगठनों में भारी रोष फैल गया। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब ढाका में बांग्लादेश शिल्पकला अकादमी के बाहर भी टैगोर के म्यूरल को लगभग एक महीने पहले इसी तरह क्षतिग्रस्त किया जा चुका है।

घटना का विवरण और पुलिस जाँच

खुलना सदर पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी लुकमान हुसैन ने पुष्टि की कि पुलिस को शुक्रवार दोपहर इस घटना की सूचना मिली, जिसके बाद जाँच शुरू कर दी गई। उन्होंने कहा, "शुक्रवार को सड़क के किनारे की सभी दुकानें बंद थीं, इसलिए यह पता लगाना मुश्किल है कि भित्ति चित्र को किसने और कब खराब किया।" अधिकारियों के अनुसार अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

गौरतलब है कि इन भित्ति चित्रों में प्रधानमंत्री तारिक रहमान के शहर के प्रस्तावित दौरे से पहले खुलना सिटी कॉरपोरेशन (KCC) ने पहल की थी। इन म्यूरलों में जुलाई 2024 के जन विद्रोह, सुंदरबन, ऐतिहासिक साठ गुंबद मस्जिद, जूट उद्योग और क्षेत्र की महान सांस्कृतिक हस्तियों को चित्रित किया गया था।

किन हस्तियों के चित्र थे दीवार पर

दीवार पर फकीर लालन शाह, कलाकार एस.एम. सुल्तान, रवींद्रनाथ टैगोर, काजी नजरुल इस्लाम, पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया, पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और कवि माइकल मधुसूदन दत्त जैसी प्रमुख हस्तियों के चित्र बने थे। इनमें से केवल रवींद्रनाथ टैगोर के चित्र पर ही काली स्याही डाली गई — एक तथ्य जिसे आलोचकों ने सुनियोजित कृत्य का संकेत बताया है।

सांस्कृतिक संगठनों और प्रशासन की प्रतिक्रिया

KCC के प्रशासक नजरुल इस्लाम मंजू ने तीखे शब्दों में कहा, "चित्र को खराब करके उन्होंने अपनी संकीर्ण सोच और बीमार मानसिकता को उजागर कर दिया है।" सांस्कृतिक संगठन नाट्यलोक के महासचिव शरीफुल इस्लाम सलीम ने आशंका जताई कि इस घटना के पीछे कोई संगठित समूह हो सकता है।

सलीम ने 'द डेली स्टार' को बताया, "उन्होंने ढाका में भी ऐसी ही हरकतें की हैं। ये घटनाएँ जानबूझकर रची जा रही हैं। इसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान की जानी चाहिए और उन्हें सज़ा मिलनी चाहिए। यह मामला सिर्फ रवींद्रनाथ टैगोर तक ही सीमित नहीं रहेगा; वे अन्य महान हस्तियों को भी निशाना बना सकते हैं।" उन्होंने समाज के सभी वर्गों से दोषियों के विरुद्ध एकजुट होकर आवाज़ उठाने की अपील भी की।

व्यापक पृष्ठभूमि और चिंताएँ

यह घटना एकल नहीं है। लगभग एक महीने पहले ढाका में बांग्लादेश शिल्पकला अकादमी के बाहर बने टैगोर के भित्ति चित्र को भी काली स्याही से विरूपित किया गया था। उस घटना के बाद बांग्लादेश के कम से कम 37 प्रमुख नागरिकों ने एक संयुक्त बयान जारी कर गहरी चिंता व्यक्त की थी।

उन नागरिकों ने चेतावनी दी थी कि इस तरह की बढ़ती घटनाएँ धार्मिक चरमपंथियों का हौसला बढ़ा सकती हैं और बांग्लादेश में सांप्रदायिक तनाव को गहरा कर सकती हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 1960 के दशक में पाकिस्तानी शासकों ने राजनीतिक कारणों से टैगोर को 'मुस्लिम विरोधी' के रूप में प्रस्तुत किया था — और आलोचकों ने इस पुरानी कोशिश की तुलना ताज़ा घटनाओं से की है।

बयान में कहा गया, "भाषा, साहित्य, कला और संस्कृति मानवता की एक साझा और अविभाज्य विरासत हैं" — और किसी भी धार्मिक, भौगोलिक या वैचारिक मतभेद को सांस्कृतिक परंपराओं को बाँटने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। जाँच जारी है और आगे की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

दो अलग अलग शहरों में — यह पैटर्न बताता है कि जाँच का दायरा किसी एकल उपद्रवी से बड़ा होना चाहिए। असली सवाल यह है कि क्या बांग्लादेश की सरकार और समाज इस प्रवृत्ति को उस गंभीरता से लेते हैं जिसकी वह माँग करती है।
RashtraPress
7 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश के खुलना में रवींद्रनाथ टैगोर के म्यूरल के साथ क्या हुआ?
खुलना के ओल्ड जेसोर रोड पर बनी दीवार पर रवींद्रनाथ टैगोर के भित्ति चित्र पर कथित तौर पर काली स्याही पोत दी गई। 7 नवंबर 2026 को इसकी सूचना मिलने के बाद खुलना पुलिस ने जाँच शुरू की है।
क्या बांग्लादेश में पहले भी टैगोर के म्यूरल को निशाना बनाया गया है?
हाँ, लगभग एक महीने पहले ढाका में बांग्लादेश शिल्पकला अकादमी के बाहर बने टैगोर के भित्ति चित्र को भी इसी तरह काली स्याही से विरूपित किया गया था। उस घटना के बाद बांग्लादेश के 37 प्रमुख नागरिकों ने संयुक्त बयान जारी कर सांप्रदायिक तनाव बढ़ने की चेतावनी दी थी।
खुलना के म्यूरल बनाने की पहल किसने की थी?
खुलना सिटी कॉरपोरेशन (KCC) ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान के शहर के प्रस्तावित दौरे से पहले इन भित्ति चित्रों को बनवाने की पहल की थी। इन म्यूरलों में जुलाई 2024 के जन विद्रोह, सुंदरबन, साठ गुंबद मस्जिद, जूट उद्योग और क्षेत्र की सांस्कृतिक हस्तियों को चित्रित किया गया था।
इस घटना पर सांस्कृतिक संगठनों ने क्या कहा?
नाट्यलोक के महासचिव शरीफुल इस्लाम सलीम ने कहा कि इस घटना के पीछे कोई संगठित समूह हो सकता है और ये घटनाएँ जानबूझकर रची जा रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यह सिलसिला टैगोर तक सीमित नहीं रहेगा और अन्य हस्तियों को भी निशाना बनाया जा सकता है।
इस विरूपण की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि क्या है?
नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने 1960 के दशक की उस कोशिश की याद दिलाई है जब पाकिस्तानी शासन ने टैगोर को राजनीतिक कारणों से 'मुस्लिम विरोधी' के रूप में प्रस्तुत किया था। उनका तर्क है कि ताज़ा घटनाएँ उसी मानसिकता की अभिव्यक्ति हो सकती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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