सेंसेक्स 81,028 पर बंद, निफ्टी 25,030 पर — एफआईआई की ₹45,960 करोड़ खरीदारी से एक साल की सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स शुक्रवार 7 नवंबर 2026 को 1,718 अंक (2.17%) की छलाँग के साथ 81,028 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 50 2% चढ़कर 25,030 पर पहुँचा। पूरे सप्ताह में सेंसेक्स ने 8.82% और निफ्टी ने 8.58% की बढ़त दर्ज की — दोनों प्रमुख सूचकांकों की यह एक वर्ष से अधिक समय की सबसे बड़ी साप्ताहिक तेजी है। इस ऐतिहासिक रैली की मुख्य चालक शक्ति विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की भारी वापसी रही।
एफआईआई की रिकॉर्ड वापसी
सप्ताह भर में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय शेयर बाजार में ₹45,960 करोड़ का शुद्ध निवेश किया। यह पिछले कई हफ्तों की लगातार बिकवाली के बाद एक निर्णायक पलटाव माना जा रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, इस पुनर्निवेश ने बाजार की धारणा को एक झटके में बदल दिया और घरेलू निवेशकों का भरोसा भी बहाल किया।
बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र का दबदबा
बैंक निफ्टी सूचकांक सप्ताह भर में लगभग 8% चढ़ा और समूची रैली में सबसे आगे रहा। वित्तीय सेवाएं, निजी बैंक, रियल्टी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स क्षेत्र भी शीर्ष प्रदर्शनकारी रहे। तेजी व्यापक आधार वाली रही — निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक सप्ताह में 5.77% बढ़ा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 2.77% की मजबूती दर्ज हुई।
वैश्विक और घरेलू कारक
विश्लेषकों के अनुसार, कई अनुकूल कारकों के एकसाथ आने से यह रैली संभव हुई। घरेलू मोर्चे पर मजबूत दूसरी तिमाही के कॉर्पोरेट नतीजे, अक्टूबर में बेहतर ऑटो बिक्री और मजबूत जीएसटी संग्रह ने ठोस आधार तैयार किया। वैश्विक स्तर पर अमेरिकी फेडरल रिज़र्व के ब्याज दरें स्थिर रखने के फैसले और अमेरिकी मध्यावधि चुनाव परिणामों ने निवेशकों की धारणा को सकारात्मक बनाया। निवेशकों को उम्मीद है कि इससे ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव में कमी आ सकती है और व्यापार शुल्कों पर नरम रुख अपनाया जा सकता है।
इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए विशेष रूप से सकारात्मक रही। डब्ल्यूटीआई (WTI) कच्चा तेल सप्ताह के दौरान 104-105 डॉलर प्रति बैरल से घटकर लगभग 90 डॉलर पर आ गया, जबकि ब्रेंट क्रूड 97-98 डॉलर के दायरे में पहुँचा। दोनों बेंचमार्क में साप्ताहिक आधार पर 12% से अधिक की गिरावट आई।
वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत की मजबूती
गौरतलब है कि इसी दौरान अमेरिकी बाजारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े शेयरों में बड़ी बिकवाली हुई। गुरुवार को एसएंडपी 500 (S&P 500) कंपनियों के बाजार मूल्य में लगभग 3 ट्रिलियन डॉलर की कमी आई, जिसका असर एशिया के कई तकनीक-प्रधान बाजारों पर भी पड़ा। बावजूद इसके, भारतीय बाजार इस वैश्विक दबाव से अपेक्षाकृत अछूते रहे और एक सुरक्षित निवेश गंतव्य के रूप में उभरे — यह एक उल्लेखनीय संरचनात्मक संकेत है।
आगे क्या देखें
विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले सप्ताहों में अमेरिकी रोजगार आँकड़े और अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) डेटा वैश्विक बाजारों की दिशा तय करेंगे। घरेलू स्तर पर निवेशकों की नजर भारत के महंगाई आँकड़ों और शेष तिमाही कॉर्पोरेट नतीजों पर रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि FII खरीदारी का सिलसिला और वैश्विक अनुकूलता बनी रही, तो भारतीय बाजारों में तेजी का रुख कायम रह सकता है।