एफआईआई की दमदार वापसी: एक हफ्ते में ₹45,960 करोड़ का निवेश, सेंसेक्स 81,028 पर बंद
सारांश
मुख्य बातें
विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 7 नवंबर 2026 को समाप्त सप्ताह में भारतीय शेयर बाज़ार में ऐतिहासिक वापसी करते हुए लगातार पाँचों कारोबारी सत्रों में शुद्ध खरीदारी की और कुल ₹45,960 करोड़ का निवेश किया। यह निवेश न केवल अक्टूबर में एफआईआई द्वारा की गई ₹45,162 करोड़ की कुल बिकवाली से अधिक रहा, बल्कि इसने बीएसई सेंसेक्स को लगातार सातवें सत्र में बढ़त के साथ 81,028.02 पर पहुँचा दिया — जो पिछले तीन वर्षों की सबसे लंबी साप्ताहिक तेजी मानी जा रही है।
साप्ताहिक निवेश का पूरा चित्र
बजाज ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) पबित्रो मुखर्जी के अनुसार, एफआईआई ने लगातार दूसरे सप्ताह भी खरीदारी जारी रखी। उल्लेखनीय है कि इससे पहले विदेशी निवेशक लगातार 10 सप्ताह तक शुद्ध विक्रेता बने रहे थे। इस पृष्ठभूमि में एक ही सप्ताह में इतनी बड़ी खरीदारी बाज़ार की बदली हुई धारणा का प्रमाण है।
सप्ताह के अंतिम दो कारोबारी दिनों — गुरुवार और शुक्रवार — में गतिविधि विशेष रूप से तेज़ रही। इन दो दिनों में एफआईआई ने अकेले ₹28,724 करोड़ की खरीदारी की, जो पूरे सप्ताह के निवेश का करीब 62 प्रतिशत था।
घरेलू संस्थागत निवेशकों की मुनाफावसूली
दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने पूरे सप्ताह बिकवाली करते हुए कुल ₹24,197 करोड़ के शेयर बाज़ार से निकाले। इसके साथ ही डीआईआई की लगातार 11 सप्ताह से चली आ रही खरीदारी का सिलसिला टूट गया। विश्लेषकों के अनुसार, बाज़ार में आई तीव्र बढ़त के बीच घरेलू निवेशकों ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी।
गुरुवार-शुक्रवार के दो दिनों में डीआईआई ने ₹16,413 करोड़ के शेयर बेचे। शुद्ध संस्थागत निवेश के लिहाज़ से पूरे सप्ताह बाज़ार में ₹21,764 करोड़ का सकारात्मक प्रवाह रहा, जिसने तेजी को आधार दिया।
बाज़ार प्रदर्शन: ऐतिहासिक साप्ताहिक रैली
शुक्रवार को बीएसई सेंसेक्स 1,718.01 अंक यानी 2.17 प्रतिशत की बढ़त के साथ 81,028.02 पर बंद हुआ। एनएसई निफ्टी 493.75 अंक यानी 2.01 प्रतिशत उछलकर 25,030.35 पर आ गया। विश्लेषकों के अनुसार, दोनों प्रमुख सूचकांकों ने सप्ताह भर में 8.5 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की, जो भारतीय बाज़ार के इतिहास की सबसे मजबूत साप्ताहिक रैलियों में से एक मानी जा रही है।
खरीदारी केवल कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही — बैंकिंग, मजबूत तिमाही नतीजों वाले शेयर और अधिकांश सेक्टरों में व्यापक भागीदारी देखी गई, जिसने निवेशकों के भरोसे को और मजबूत किया।
तेजी के पीछे के कारण
विश्लेषकों के अनुसार, इस साप्ताहिक रैली के पीछे कई कारक एक साथ काम कर रहे थे — एफआईआई की वापसी, कंपनियों के उम्मीद से बेहतर तिमाही वित्तीय नतीजे, भू-राजनीतिक तनाव में कमी, बॉन्ड यील्ड में नरमी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाज़ारों में अनिश्चितता का माहौल अभी पूरी तरह छँटा नहीं है।
आगे का परिदृश्य
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में बाज़ार की दिशा काफी हद तक एफआईआई की गतिविधियों पर निर्भर करेगी। चूँकि घरेलू निवेशकों ने हालिया तेजी में बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली की है, इसलिए बाज़ार की मजबूती बनाए रखने के लिए विदेशी निवेश प्रवाह का निरंतर बने रहना महत्वपूर्ण होगा। आगामी सप्ताह मुहूर्त ट्रेडिंग सत्र के साथ शुरू होगा और नए संवत की शुरुआत भी सकारात्मक माहौल में होने की उम्मीद है।