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एफआईआई की दमदार वापसी: एक हफ्ते में ₹45,960 करोड़ का निवेश, सेंसेक्स 81,028 पर बंद

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एफआईआई की दमदार वापसी: एक हफ्ते में ₹45,960 करोड़ का निवेश, सेंसेक्स 81,028 पर बंद

सारांश

10 हफ्ते की बिकवाली के बाद एफआईआई ने एक ही सप्ताह में ₹45,960 करोड़ लगाए — जो अक्टूबर की पूरी बिकवाली से भी ज़्यादा है। सेंसेक्स तीन साल की सबसे लंबी लकीर पर है। असली सवाल यह है कि क्या यह प्रवाह टिकेगा।

मुख्य बातें

एफआईआई ने 7 नवंबर 2026 को समाप्त सप्ताह में लगातार पाँचों सत्रों में खरीदारी कर ₹45,960 करोड़ का निवेश किया।
यह निवेश अक्टूबर में एफआईआई की कुल बिकवाली ₹45,162 करोड़ से अधिक रहा।
डीआईआई ने पूरे सप्ताह ₹24,197 करोड़ के शेयर बेचे; 11 सप्ताह की लगातार खरीदारी का सिलसिला टूटा।
बीएसई सेंसेक्स शुक्रवार को 1,718.01 अंक ( 2.17% ) उछलकर 81,028.02 पर बंद हुआ।
एनएसई निफ्टी 493.75 अंक ( 2.01% ) बढ़कर 25,030.35 पर पहुँचा; साप्ताहिक बढ़त 8.5% से अधिक ।
आगामी सप्ताह मुहूर्त ट्रेडिंग के साथ शुरू होगा; विशेषज्ञों के अनुसार बाज़ार की दिशा एफआईआई प्रवाह पर निर्भर रहेगी।

विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 7 नवंबर 2026 को समाप्त सप्ताह में भारतीय शेयर बाज़ार में ऐतिहासिक वापसी करते हुए लगातार पाँचों कारोबारी सत्रों में शुद्ध खरीदारी की और कुल ₹45,960 करोड़ का निवेश किया। यह निवेश न केवल अक्टूबर में एफआईआई द्वारा की गई ₹45,162 करोड़ की कुल बिकवाली से अधिक रहा, बल्कि इसने बीएसई सेंसेक्स को लगातार सातवें सत्र में बढ़त के साथ 81,028.02 पर पहुँचा दिया — जो पिछले तीन वर्षों की सबसे लंबी साप्ताहिक तेजी मानी जा रही है।

साप्ताहिक निवेश का पूरा चित्र

बजाज ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) पबित्रो मुखर्जी के अनुसार, एफआईआई ने लगातार दूसरे सप्ताह भी खरीदारी जारी रखी। उल्लेखनीय है कि इससे पहले विदेशी निवेशक लगातार 10 सप्ताह तक शुद्ध विक्रेता बने रहे थे। इस पृष्ठभूमि में एक ही सप्ताह में इतनी बड़ी खरीदारी बाज़ार की बदली हुई धारणा का प्रमाण है।

सप्ताह के अंतिम दो कारोबारी दिनों — गुरुवार और शुक्रवार — में गतिविधि विशेष रूप से तेज़ रही। इन दो दिनों में एफआईआई ने अकेले ₹28,724 करोड़ की खरीदारी की, जो पूरे सप्ताह के निवेश का करीब 62 प्रतिशत था।

घरेलू संस्थागत निवेशकों की मुनाफावसूली

दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने पूरे सप्ताह बिकवाली करते हुए कुल ₹24,197 करोड़ के शेयर बाज़ार से निकाले। इसके साथ ही डीआईआई की लगातार 11 सप्ताह से चली आ रही खरीदारी का सिलसिला टूट गया। विश्लेषकों के अनुसार, बाज़ार में आई तीव्र बढ़त के बीच घरेलू निवेशकों ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी।

गुरुवार-शुक्रवार के दो दिनों में डीआईआई ने ₹16,413 करोड़ के शेयर बेचे। शुद्ध संस्थागत निवेश के लिहाज़ से पूरे सप्ताह बाज़ार में ₹21,764 करोड़ का सकारात्मक प्रवाह रहा, जिसने तेजी को आधार दिया।

बाज़ार प्रदर्शन: ऐतिहासिक साप्ताहिक रैली

शुक्रवार को बीएसई सेंसेक्स 1,718.01 अंक यानी 2.17 प्रतिशत की बढ़त के साथ 81,028.02 पर बंद हुआ। एनएसई निफ्टी 493.75 अंक यानी 2.01 प्रतिशत उछलकर 25,030.35 पर आ गया। विश्लेषकों के अनुसार, दोनों प्रमुख सूचकांकों ने सप्ताह भर में 8.5 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की, जो भारतीय बाज़ार के इतिहास की सबसे मजबूत साप्ताहिक रैलियों में से एक मानी जा रही है।

खरीदारी केवल कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही — बैंकिंग, मजबूत तिमाही नतीजों वाले शेयर और अधिकांश सेक्टरों में व्यापक भागीदारी देखी गई, जिसने निवेशकों के भरोसे को और मजबूत किया।

तेजी के पीछे के कारण

विश्लेषकों के अनुसार, इस साप्ताहिक रैली के पीछे कई कारक एक साथ काम कर रहे थे — एफआईआई की वापसी, कंपनियों के उम्मीद से बेहतर तिमाही वित्तीय नतीजे, भू-राजनीतिक तनाव में कमी, बॉन्ड यील्ड में नरमी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाज़ारों में अनिश्चितता का माहौल अभी पूरी तरह छँटा नहीं है।

आगे का परिदृश्य

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में बाज़ार की दिशा काफी हद तक एफआईआई की गतिविधियों पर निर्भर करेगी। चूँकि घरेलू निवेशकों ने हालिया तेजी में बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली की है, इसलिए बाज़ार की मजबूती बनाए रखने के लिए विदेशी निवेश प्रवाह का निरंतर बने रहना महत्वपूर्ण होगा। आगामी सप्ताह मुहूर्त ट्रेडिंग सत्र के साथ शुरू होगा और नए संवत की शुरुआत भी सकारात्मक माहौल में होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ से अधिक निकाल चुके थे। एक सप्ताह की खरीदारी ने महीने भर की निकासी को पलट दिया, लेकिन यह प्रवाह संरचनात्मक पुनर्मूल्यांकन है या महज़ वैश्विक जोखिम-ऑन माहौल का अल्पकालिक असर, यह अभी स्पष्ट नहीं। डीआईआई की ११ सप्ताह बाद पहली बिकवाली यह संकेत देती है कि घरेलू दीर्घकालिक निवेशक इन स्तरों पर मूल्यांकन को लेकर सतर्क हैं। यदि वैश्विक संकेत पलटे तो एफआईआई उतनी ही तेज़ी से पलट सकते हैं — और तब घरेलू 'बफर' अनुपस्थित रहेगा।
RashtraPress
7 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस सप्ताह एफआईआई ने भारतीय शेयर बाज़ार में कितना निवेश किया?
विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 7 नवंबर 2026 को समाप्त सप्ताह में लगातार पाँचों कारोबारी सत्रों में खरीदारी करते हुए कुल ₹45,960 करोड़ का निवेश किया। यह राशि अक्टूबर में उनकी कुल बिकवाली ₹45,162 करोड़ से भी अधिक है।
डीआईआई ने इस हफ्ते बिकवाली क्यों की?
घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने बाज़ार में आई तीव्र बढ़त के बीच मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी और पूरे सप्ताह ₹24,197 करोड़ के शेयर बेचे। इसके साथ ही उनकी लगातार 11 सप्ताह से चली आ रही खरीदारी का सिलसिला भी टूट गया।
सेंसेक्स और निफ्टी ने इस हफ्ते कितनी बढ़त दर्ज की?
शुक्रवार को बीएसई सेंसेक्स 1,718.01 अंक (2.17%) उछलकर 81,028.02 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 493.75 अंक (2.01%) बढ़कर 25,030.35 पर पहुँचा। पूरे सप्ताह दोनों सूचकांकों ने 8.5 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की।
इस साप्ताहिक रैली के पीछे मुख्य कारण क्या रहे?
विश्लेषकों के अनुसार, एफआईआई की वापसी, कंपनियों के उम्मीद से बेहतर तिमाही नतीजे, भू-राजनीतिक तनाव में कमी, बॉन्ड यील्ड में नरमी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट — इन सभी कारकों ने एक साथ मिलकर बाज़ार को ऊपर धकेला।
आगे बाज़ार की दिशा क्या रहेगी?
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले हफ्तों में बाज़ार की दिशा काफी हद तक एफआईआई के निवेश प्रवाह पर निर्भर करेगी। चूँकि घरेलू निवेशकों ने बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली की है, इसलिए तेजी बनाए रखने के लिए विदेशी निवेश का निरंतर बने रहना ज़रूरी होगा। अगले सप्ताह मुहूर्त ट्रेडिंग के साथ नए संवत की शुरुआत होगी।
राष्ट्र प्रेस
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