एफआईआई की भारतीय बाजार में वापसी: इस सप्ताह ₹4,670 करोड़ की खरीदारी, एसआईपी निवेश तीन माह के उच्चतम स्तर पर
सारांश
मुख्य बातें
विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 11 जुलाई 2026 को समाप्त सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर खरीदारी का रुख अपनाया। एक्सचेंज के अस्थायी आंकड़ों के अनुसार, एफआईआई ने इस सप्ताह ₹4,670 करोड़ के शेयर खरीदे — जो जून में लगभग 3 अरब डॉलर की शुद्ध बिकवाली के बाद एक उल्लेखनीय पलटाव है। यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब घरेलू निवेशकों की भागीदारी और खुदरा एसआईपी प्रवाह दोनों नई ऊँचाइयों पर हैं।
घरेलू और विदेशी निवेश का मिलाजुला चित्र
घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने इस सप्ताह ₹8,280 करोड़ का शुद्ध निवेश किया, जो एफआईआई की खरीदारी से लगभग दोगुना है। गौरतलब है कि जून में जब एफआईआई शुद्ध विक्रेता बने हुए थे, तब डीआईआई ने करीब 9 अरब डॉलर का निवेश कर बाजार को संभाले रखा था। यह प्रवृत्ति दर्शाती है कि भारतीय बाजार अब विदेशी पूँजी के उतार-चढ़ाव से कहीं अधिक घरेलू संस्थागत और खुदरा निवेश पर टिकी है।
एसआईपी निवेश तीन माह के शीर्ष पर
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, जून में सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के ज़रिए निवेश बढ़कर ₹31,780 करोड़ पर पहुँच गया — जो पिछले तीन महीनों का सर्वोच्च स्तर है। विश्लेषकों के अनुसार, यह आँकड़ा मई के ₹30,950 करोड़ की तुलना में 2.7 प्रतिशत अधिक है और जून 2025 के ₹27,270 करोड़ के मुकाबले 16.5 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्शाता है।
साप्ताहिक बाजार उतार-चढ़ाव
बजाज ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) पबित्रो मुखर्जी ने कहा कि प्रमुख शेयर सूचकांकों की लगातार चार सप्ताह की तेजी इस सप्ताह थम गई और बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। उन्होंने बताया कि निफ्टी ने मंगलवार को 24,530 का साप्ताहिक उच्च स्तर बनाया, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े भू-राजनीतिक तनाव के कारण बुधवार को गिरकर 23,805 के साप्ताहिक निचले स्तर तक पहुँच गया। सप्ताह के अंतिम दो सत्रों में अच्छी रिकवरी के बाद निफ्टी लगभग 24,200 अंक पर बंद हुआ, पर पूरे सप्ताह में करीब 0.26 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई।
विदेशी निवेशकों का भरोसा और नीतिगत कारण
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, सरकार की हालिया नीतियों — विशेष रूप से विदेशी ऋण निवेशकों के लिए कर ढाँचे में सुधार और विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने से जुड़ी नीतियों — ने विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। भारतीय डेट मार्केट में भी एफआईआई का निवेश करीब 5 से 6 अरब डॉलर रहा है।
प्राथमिक बनाम द्वितीयक बाजार का विरोधाभास
जेएम फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशनल की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 12 महीनों में भारतीय प्राथमिक बाजार में एफआईआई ने 8.1 अरब डॉलर का शुद्ध निवेश किया है, जबकि द्वितीयक बाजार से 49.3 अरब डॉलर की शुद्ध निकासी की है। यह आँकड़ा बताता है कि विदेशी निवेशक नई लिस्टिंग और आईपीओ में रुचि रख रहे हैं, लेकिन माध्यमिक बाजार में सतर्कता अभी भी बनी हुई है। आने वाले हफ्तों में वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियाँ और अमेरिकी फेडरल रिज़र्व के संकेत एफआईआई के रुख को निर्धारित करने में अहम भूमिका निभाएंगे।