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क्या दिसंबर में विदेशी निवेशकों की बिक्री ने घरेलू निवेशकों को प्रभावित किया?

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क्या दिसंबर में विदेशी निवेशकों की बिक्री ने घरेलू निवेशकों को प्रभावित किया?

सारांश

दिसंबर में विदेशी निवेशकों की बिक्री के बावजूद, घरेलू निवेशकों ने बाजार को मजबूती प्रदान की है। एसआईपी के माध्यम से निवेश की बढ़ती प्रवृत्ति और भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती ने बाजार को स्थिरता दी है। जानिए इसके पीछे के कारण और विशेषज्ञों का क्या कहना है।

मुख्य बातें

दिसंबर में विदेशी निवेशकों ने 15,959 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं।
घरेलू निवेशकों ने 39,965 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं।
एसआईपी के माध्यम से हर महीने 29,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश हो रहा है।
भारत की अर्थव्यवस्था में मजबूती की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कंपनियों की कमाई बेहतर होगी।

मुंबई, 14 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। दिसंबर महीने में अब तक विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने भारतीय शेयर बाजार में लगभग 15,959 करोड़ रुपये के शेयरों की बिक्री कर दी है। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने इसी अवधि में 39,965 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं। इसका मतलब यह है कि भारतीय निवेशकों ने विदेशी निवेशकों की तुलना में कहीं अधिक निवेश किया है और बाजार को स्थिरता प्रदान की है।

मार्केट विशेषज्ञों का कहना है कि निकट भविष्य में विदेशी निवेशकों की शेयर बिक्री में कमी आ सकती है, क्योंकि भारत की अर्थव्यवस्था अच्छा प्रदर्शन कर रही है और कंपनियों की कमाई में वृद्धि की संभावना है। इसके अलावा, आम लोग लगातार म्यूचुअल फंड एसआईपी के माध्यम से निवेश कर रहे हैं, जिससे बाजार को मजबूती मिल रही है।

पिछले तीन महीनों में हर महीने म्यूचुअल फंड एसआईपी में 29,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हो रहा है।

एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, नवंबर में एसआईपी के माध्यम से लगभग 29,445 करोड़ रुपये का निवेश किया गया। इस निरंतर निवेश के कारण घरेलू निवेशक विदेशी निवेशकों द्वारा की जा रही बिकवाली का प्रभाव सहन कर पा रहे हैं।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वीके विजयकुमार ने कहा कि जब देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो और कंपनियों की कमाई बढ़ने की उम्मीद हो, तब विदेशी निवेशकों का लगातार शेयर बेचना लंबी अवधि के लिए सही नहीं माना जा सकता। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे हालात में विदेशी निवेशकों के लिए बाजार में लंबे समय तक बिकवाली जारी रखना मुश्किल होगा।

हालांकि, अभी कुछ कारण हैं जिनके कारण शेयर बाजार पर दबाव बना हुआ है। इनमें रुपये की कीमत में गिरावट, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में देरी और नई तकनीक जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़ी अनिश्चितताएं शामिल हैं। लेकिन ये सभी कारण अस्थायी हैं और समय के साथ इनका प्रभाव कम हो सकता है।

नवंबर में, एफआईआई और डीआईआई दोनों ने भारतीय इक्विटी मार्केट में क्रमशः 40 मिलियन डॉलर और 8.7 अरब डॉलर की शुद्ध खरीदारी की।

नवंबर में एमएससीआई इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स में भारत का वेट 15.8 प्रतिशत था, जबकि अक्टूबर में यह 15.2 प्रतिशत और नवंबर में 19.9 प्रतिशत था।

विशेषज्ञों का मानना है कि शेयर बाजार की दिशा निर्धारित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारण कंपनियों की कमाई होती है। आने वाले समय में, विशेषकर वित्त वर्ष 2027 में, कंपनियों की कमाई बेहतर रहने की संभावना है, जिससे शेयर बाजार को मजबूती मिल सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह जरूरी है कि हम देश की आर्थिक स्थिति को समझें और उसे प्राथमिकता दें। विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद, घरेलू निवेशकों की सक्रियता ने बाजार को मजबूत रखा है। यह स्थिति हमें विश्वास दिलाती है कि भारत की अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है और हमें अपने निवेश के फैसले में सतर्क रहना चाहिए।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विदेशी निवेशकों की बिकवाली का क्या कारण है?
विदेशी निवेशकों की बिकवाली का कारण रुपये की गिरती कीमत, व्यापार समझौते में देरी और तकनीकी अनिश्चितताएं हैं।
एसआईपी में निवेश क्यों बढ़ रहा है?
एसआईपी में निवेश बढ़ने का कारण आम लोगों का म्यूचुअल फंड में दीर्घकालिक निवेश की प्रवृत्ति है।
राष्ट्र प्रेस
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