PM मोदी ने ऑकलैंड में न्यूजीलैंड की तारीफ की, बोले — 'महिला अधिकार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से सीखा बहुत कुछ'
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 जुलाई 2026 को ऑकलैंड में भारतीय समुदाय के भव्य कार्यक्रम 'किआ ओरा मोदी' में न्यूजीलैंड की सामाजिक उपलब्धियों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था की ताकत और महिला सशक्तिकरण की विरासत की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। मंच से उन्होंने कहा, 'हमने न्यूजीलैंड से बहुत कुछ सीखा है और अब भी सीख रहे हैं।' यह कार्यक्रम उनकी न्यूजीलैंड यात्रा का एक प्रमुख पड़ाव रहा।
भारत-न्यूजीलैंड संबंधों पर मोदी का संदेश
मोदी ने दोनों देशों के रिश्ते को केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि भावनात्मक और मूल्य-आधारित बताया। उन्होंने कहा, 'भारत और न्यूजीलैंड के रिश्ते में यादें भी हैं, दोस्ती भी है, वैल्यूज भी है और कमीटमेंट भी है।' उन्होंने न्यूजीलैंड की माओरी परंपरा के 'वाका' शब्द का उल्लेख करते हुए इसे दोनों देशों की साझा यात्रा का प्रतीक बताया। 'यही वाका एक नई यात्रा पर निकलने के लिए तैयार है। हमारे सामने अवसरों से भरा खुला समुद्र है,' उन्होंने कहा।
महिला अधिकारों पर न्यूजीलैंड की मिसाल
प्रधानमंत्री ने न्यूजीलैंड को महिला मताधिकार देने वाले दुनिया के पहले देश के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कहा, 'यह वो देश है जिसने सबसे पहले महिलाओं को वोटिंग का अधिकार दिया था।' उन्होंने जोड़ा कि न्यूजीलैंड की समाज-व्यवस्था में महिलाओं का योगदान आज भी अनुकरणीय है और भारत भी इसी दिशा में महिलाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोल रहा है। गौरतलब है कि यह टिप्पणी ऐसे समय में आई जब भारत में महिला आरक्षण और सशक्तिकरण की नीतियाँ चर्चा के केंद्र में हैं।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि पारिस्थितिकी तंत्र की तारीफ
मोदी ने न्यूजीलैंड की कृषि-आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भारत के लिए एक बड़ी प्रेरणा बताया। उन्होंने कहा, 'रूरल इकॉनोमी कैसे किसी देश की तकदीर बदल सकती है, ये न्यूजीलैंड ने करके दिखाया है।' उन्होंने विशेष रूप से कृषि के इर्द-गिर्द बने सक्षम पारिस्थितिकी तंत्र की सराहना की और कहा कि 'न्यूजीलैंड ने दिखाया है कि छोटे बाज़ार भी बड़े ब्रांड बन सकते हैं।' यह संदेश भारत के छोटे किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए प्रासंगिक बताया गया।
भारत की सीखने की ललक पर जोर
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत की सभ्यतागत निरंतरता और परिवर्तनशीलता दोनों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, 'भारत हजारों वर्ष पुरानी सभ्यता है जो आज अपनी प्राचीनता को सहेजते हुए आधुनिकता को स्वीकार कर रहा है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत के लिए 'सामने वाले देश की जनसंख्या नहीं, जनकल्याण की भावना मायने रखती है।' यह कथन भारत की विदेश नीति के मानवीय आयाम को दर्शाता है। आगे उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देश मिलकर 'सफल होंगे।'