2001 में न्यूजीलैंड के गुजराती स्कूल में मोदी ने दिया था भारतीय संस्कृति का संदेश
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑकलैंड दौरे के बीच वहाँ बसे भारतीय मूल के लोगों ने 2001 की उनकी एक पुरानी न्यूजीलैंड यात्रा को याद किया, जब उन्होंने प्रवासी भारतीय बच्चों को भारतीय संस्कृति और मूल्यों से जोड़ने पर विशेष बल दिया था। उस समय मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बनने से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता के रूप में न्यूजीलैंड पहुँचे थे।
मैनुकाउ इंडियन एसोसिएशन के स्कूल का दौरा
भारतीय मूल के दिनेश पाहूजा ने बताया कि उस यात्रा के दौरान मोदी ने मैनुकाउ इंडियन एसोसिएशन द्वारा संचालित एक गुजराती स्कूल का दौरा किया था। वहाँ उन्होंने स्कूल प्रबंधन से पूछा कि क्या बच्चों को केवल गुजराती भाषा सिखाई जाती है या भारतीय संस्कृति और परंपराओं की भी शिक्षा दी जाती है।
जब उन्हें यह जानकारी मिली कि पाठ्यक्रम में मुख्य रूप से भाषा शिक्षा पर ही ध्यान दिया जाता है, तो उन्होंने सुझाव दिया कि पाठ्यक्रम में भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों, परंपराओं और विरासत को भी शामिल किया जाए।
मोदी का सांस्कृतिक जुड़ाव का दृष्टिकोण
पाहूजा के अनुसार, मोदी का मानना था कि इससे विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के बच्चे अपनी मातृभूमि से जुड़े रहेंगे और भारत की सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ देश में हो रहे विकास को भी बेहतर ढंग से समझ सकेंगे।
पाहूजा ने उनके शब्दों को उद्धृत करते हुए कहा, 'मोदी ने सुझाव दिया था कि गुजराती स्कूल के माध्यम से बच्चों को केवल भाषा ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और मूल्यों की भी शिक्षा दी जाए। इससे उनका अपनी मातृभूमि से जुड़ाव मजबूत होगा और वे भारत को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे।'
एक्स पर 'मोदी स्टोरी' की पोस्ट
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर संचालित हैंडल 'मोदी स्टोरी' ने भी एक पोस्ट में लिखा कि मैनुकाउ इंडियन एसोसिएशन के गुजराती स्कूल के दौरे के दौरान मोदी ने पाठ्यक्रम में भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और विरासत को शामिल करने का सुझाव दिया था। पोस्ट के अनुसार, इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि बच्चे केवल भाषा ही न सीखें, बल्कि अपनी भारतीय जड़ों, संस्कृति और मूल्यों से भी गर्व के साथ जुड़े रहें।
ऐतिहासिक दौरे का संदर्भ
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी का मौजूदा न्यूजीलैंड दौरा 40 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा है, जिसे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से ऐतिहासिक माना जा रहा है। इस दौरे ने प्रवासी भारतीय समुदाय में उत्साह की लहर पैदा की और पुरानी यादों को ताजा कर दिया। यह दौरा भारत-न्यूजीलैंड संबंधों को नई दिशा देने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है।