10 जुलाई 2026
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अल नीनो से 2027 में सार्डिन उत्पादन पर संकट, सीएमएफआरआई की चेतावनी

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अल नीनो से 2027 में सार्डिन उत्पादन पर संकट, सीएमएफआरआई की चेतावनी

सारांश

सीएमएफआरआई के निदेशक डॉ. ग्रिंसन जॉर्ज ने राष्ट्रीय मत्स्यपालक दिवस पर चेतावनी दी कि अल नीनो की गर्मी अक्टूबर-दिसंबर में तेज होगी और अप्रैल-मई 2027 तक सार्डिन उत्पादन को गंभीर नुकसान पहुँचा सकती है। इस साल भंडार प्रचुर है, लेकिन तटीय मछुआरों के लिए अगला साल कठिन हो सकता है।

मुख्य बातें

सीएमएफआरआई ने 10 जुलाई को चेतावनी दी कि अल नीनो के कारण 2027 में सार्डिन उत्पादन में भारी कमी आ सकती है।
अल नीनो की गर्मी अक्टूबर-दिसंबर 2026 में तेज होने की आशंका, असर अप्रैल-मई 2027 तक उत्तरी हिंद महासागर में।
ऑयल सार्डिन समुद्री ताप तरंगों और तापमान वृद्धि के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील मछली प्रजाति।
प्रवाल भित्तियाँ और रेड स्नैपर जैसी प्रजातियाँ भी खतरे में, प्रवाल विरंजन की आशंका।
सीएमएफआरआई इस साल के अंत में मछुआरों के लिए अल नीनो सलाह जारी करेगा।

केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीएमएफआरआई) ने 10 जुलाई को कोच्चि में चेतावनी दी कि अल नीनो के प्रभाव से 2027 में भारतीय तट पर सार्डिन की उपलब्धता में भारी कमी आ सकती है। संस्थान के अनुसार, समुद्री ताप तरंगें और बढ़ता समुद्री तापमान तटीय मछली उत्पादन के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।

मुख्य चेतावनी और वैज्ञानिक आधार

सीएमएफआरआई के निदेशक डॉ. ग्रिंसन जॉर्ज ने राष्ट्रीय मत्स्यपालक दिवस समारोह का उद्घाटन करते हुए यह बात कही। उन्होंने बताया कि अल नीनो से जुड़ी गर्मी इस साल अक्टूबर-दिसंबर के दौरान और तेज होने की आशंका है, जिसका असर अप्रैल-मई 2027 तक उत्तरी हिंद महासागर में महसूस किया जा सकता है।

उपलब्ध जलवायु पूर्वानुमानों के अनुसार, अगले साल अप्रैल और मई के दौरान समुद्री ताप तरंगों, समुद्र की सतह के तापमान में वृद्धि और खारेपन में बढ़ोतरी की उच्च संभावना है। गौरतलब है कि छोटी पेलाजिक मछलियाँ — विशेष रूप से ऑयल सार्डिन — इन परिवर्तनों के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील मानी जाती हैं।

इस साल की स्थिति बनाम 2027 का अनुमान

डॉ. जॉर्ज ने स्पष्ट किया कि 2026 में भारतीय ऑयल सार्डिन का भंडार प्रचुर मात्रा में है। हालाँकि, अनुमानित तापमान वृद्धि होने की स्थिति में 2027 में इस संसाधन पर गंभीर असर पड़ने की संभावना है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत का मत्स्य उद्योग पहले से ही जलवायु परिवर्तन के दीर्घकालिक प्रभावों से जूझ रहा है।

प्रवाल भित्तियों और अन्य प्रजातियों पर असर

डॉ. जॉर्ज के अनुसार, यह संकट सार्डिन तक सीमित नहीं रहेगा। लगातार बढ़ते समुद्री तापमान से नाजुक प्रवाल भित्ति पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुँच सकता है, जिससे प्रवाल विरंजन हो सकता है और रेड स्नैपर जैसी प्रवाल भित्ति से जुड़ी प्रजातियों की संख्या में कमी आ सकती है। इसके अलावा, लंबे समय तक उच्च तापमान और खारेपन के बाद भारी बारिश से खारेपन के स्तर में तेज उतार-चढ़ाव आ सकता है, जिससे तटीय मत्स्य पालन बाधित हो सकता है।

मछुआरों और मत्स्य पालकों के लिए सलाह

सीएमएफआरआई ने घोषणा की है कि वह इस साल के अंत में मछुआरों और मछली पालकों के लिए अल नीनो संबंधी विशेष सलाह जारी करना शुरू करेगा, ताकि वे मछली पकड़ने और मत्स्य पालन के बारे में सोच-समझकर निर्णय ले सकें। मछली पालकों को अचानक होने वाले पर्यावरणीय परिवर्तनों के लिए पहले से तैयार रहने की सलाह दी गई है।

यह चेतावनी तटीय समुदायों की आजीविका और देश के मत्स्य उद्योग दोनों के लिए दीर्घकालिक नीतिगत तैयारी की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या नीतिगत तैयारी उसी गति से हो रही है जिस गति से जलवायु जोखिम बढ़ रहा है। भारत का मत्स्य उद्योग पहले से ही अनियमित मानसून और अत्यधिक मछली पकड़ने के दबाव में है — अल नीनो इन कमज़ोरियों को और उजागर करेगा। सलाह जारी करना पर्याप्त नहीं होगा; तटीय समुदायों के लिए ठोस मुआवज़ा तंत्र और वैकल्पिक आजीविका योजनाएँ अभी से तैयार होनी चाहिए, न कि संकट आने के बाद।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अल नीनो से 2027 में सार्डिन उत्पादन पर क्या असर पड़ेगा?
सीएमएफआरआई के अनुसार, अल नीनो से जुड़ी गर्मी अक्टूबर-दिसंबर 2026 में तेज होगी और अप्रैल-मई 2027 तक उत्तरी हिंद महासागर में सार्डिन की उपलब्धता में भारी कमी आ सकती है। ऑयल सार्डिन समुद्री ताप तरंगों के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील मानी जाती है।
सीएमएफआरआई क्या है और इसने यह चेतावनी कब दी?
केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीएमएफआरआई) कोच्चि स्थित भारत का प्रमुख समुद्री मत्स्य अनुसंधान केंद्र है। संस्थान के निदेशक डॉ. ग्रिंसन जॉर्ज ने 10 जुलाई को राष्ट्रीय मत्स्यपालक दिवस समारोह में यह चेतावनी दी।
क्या इस साल भी सार्डिन का उत्पादन प्रभावित है?
नहीं, 2026 में भारतीय ऑयल सार्डिन का भंडार प्रचुर मात्रा में है। खतरा 2027 के लिए है, जब अनुमानित तापमान वृद्धि के कारण इस संसाधन पर गंभीर असर पड़ने की संभावना है।
मछुआरों और मत्स्य पालकों को क्या करना चाहिए?
सीएमएफआरआई इस साल के अंत में मछुआरों और मछली पालकों के लिए अल नीनो संबंधी विशेष सलाह जारी करेगा। मछली पालकों को अचानक होने वाले पर्यावरणीय परिवर्तनों — जैसे खारेपन में तेज उतार-चढ़ाव — के लिए पहले से तैयार रहने की सलाह दी गई है।
क्या अल नीनो का असर केवल सार्डिन तक सीमित रहेगा?
नहीं, डॉ. ग्रिंसन जॉर्ज के अनुसार प्रवाल भित्तियाँ और रेड स्नैपर जैसी प्रजातियाँ भी खतरे में हैं। लगातार बढ़ते समुद्री तापमान से प्रवाल विरंजन हो सकता है और संबंधित प्रजातियों की संख्या में कमी आ सकती है।
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