एफआईआई ने निफ्टी में गिरावट के बीच ₹1,602 करोड़ निकाले, डीआईआई ने ₹17,320 करोड़ की खरीदारी से थामा बाजार
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय शेयर बाजार में 22 अगस्त 2026 को समाप्त सप्ताह के दौरान लगातार दूसरे हफ्ते बिकवाली का दबाव बना रहा। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने इस सप्ताह भारतीय इक्विटी बाजार से ₹1,602 करोड़ की शुद्ध निकासी की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने ₹17,320 करोड़ की जोरदार खरीदारी कर बाजार को टूटने से बचाया। कच्चे तेल की कीमतें 92 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहीं और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की धारणा को कमजोर किया।
एफआईआई का मिश्रित रुख
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, एफआईआई तीन सप्ताह की लगातार खरीदारी के बाद एक बार फिर बिकवाली के मोड में लौट आए। सप्ताह के पहले कारोबारी सत्र में उन्होंने बिकवाली की, अगले दो सत्रों में खरीदारी का रुख अपनाया और अंतिम दो दिनों में दोबारा बिकवाली शुरू कर दी।
20 जुलाई से 21 अगस्त की अवधि का विश्लेषण करें तो एफआईआई पहले सप्ताह विक्रेता रहे, फिर लगातार तीन सप्ताह खरीदार बने और इस सप्ताह फिर बिकवाल हो गए। इसके बावजूद पिछले एक महीने में उनकी कुल गतिविधि का परिणाम ₹1,282 करोड़ की शुद्ध खरीदारी के रूप में सामने आया।
डीआईआई की मजबूत खरीदारी
घरेलू संस्थागत निवेशकों ने पिछले एक महीने में हर सप्ताह शुद्ध निवेश किया और कुल मिलाकर ₹48,390 करोड़ का निवेश किया। केवल इस सप्ताह ही डीआईआई ने ₹17,320 करोड़ की शुद्ध खरीदारी दर्ज की, जो बाजार के लिए एक मजबूत आधार बना।
अगस्त महीने के अब तक के आंकड़ों के अनुसार दोनों श्रेणियों के निवेशक कुल मिलाकर खरीदार बने हुए हैं। इस अवधि में एफआईआई ने ₹2,510 करोड़ और डीआईआई ने ₹34,370 करोड़ का निवेश किया है।
निफ्टी का साप्ताहिक प्रदर्शन
निफ्टी ने सप्ताह की शुरुआत कमजोरी के साथ की और मध्य सप्ताह में 24,026 का निचला स्तर छुआ। अंतिम दो कारोबारी सत्रों में आंशिक रिकवरी देखने को मिली, लेकिन सूचकांक सप्ताह के अंत में 24,252 पर बंद हुआ — पिछले सप्ताह की तुलना में 0.5 प्रतिशत की गिरावट।
व्यापक बाजार का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स लगभग सपाट बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स ने नया सर्वकालिक उच्च स्तर छूते हुए सप्ताह में 1 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की — यह संकेत देता है कि निवेशकों की रुचि मिड और स्मॉलकैप शेयरों में बनी हुई है।
भू-राजनीतिक दबाव और बाजार पर असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 92 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रही। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान के बीच तनाव में कोई कमी नहीं आई है, जिसने वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को सीमित किया। गौरतलब है कि ऊंची तेल कीमतें भारत के आयात बिल को बढ़ाती हैं और चालू खाता घाटे पर दबाव डालती हैं, जो अप्रत्यक्ष रूप से रुपये और बाजार की धारणा को प्रभावित करता है।
आगे क्या देखें
विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले सप्ताह में निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिका-ईरान भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और एफआईआई की गतिविधियों पर केंद्रित रहेगी। यदि तेल कीमतें और बढ़ती हैं तो बाजार पर दबाव बढ़ सकता है, वहीं डीआईआई की मजबूत खरीदारी बाजार को निचले स्तरों पर सहारा देती रह सकती है।