7 नवंबर 2026
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तमिलनाडु: रिश्वत मामले में अन्नाद्रमुक नेता पी.एम. मन्नन से लगातार दूसरे दिन पूछताछ

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तमिलनाडु: रिश्वत मामले में अन्नाद्रमुक नेता पी.एम. मन्नन से लगातार दूसरे दिन पूछताछ

सारांश

तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उबाल — अन्नाद्रमुक नेता पी.एम. मन्नन पर विजय सरकार को गिराने के लिए TVK विधायकों को रिश्वत देने का आरोप। मदुरै सीसीबी की लगातार दूसरे दिन पूछताछ, अदालत ने गिरफ्तारी की परिस्थितियों पर भी सवाल उठाए।

मुख्य बातें

मदुरै सीसीबी पुलिस ने 7 नवंबर 2026 को अन्नाद्रमुक नेता पी.एम.
मन्नन से लगातार दूसरे दिन पूछताछ की।
आरोप है कि मन्नन ने TVK विधायकों को सरकार के खिलाफ वोट देने के लिए आर्थिक प्रलोभन दिया।
TVK विधायक मुस्तफा की शिकायत पर 6 नवंबर को मन्नन को गिरफ्तार किया गया; पुलिस उपायुक्त दिव्या की निगरानी में 8 घंटे से अधिक पूछताछ हुई।
जोसेफ जॉय ने गिरफ्तारी की परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए ₹25,000 के मुचलके पर रिहाई का आदेश दिया।
जाँचकर्ता मन्नन के मोबाइल संचार रिकॉर्ड और संपर्कों की पड़ताल कर अन्य संभावित आरोपियों की तलाश कर रहे हैं।

मदुरै की सेंट्रल क्राइम ब्रांच (सीसीबी) पुलिस ने शनिवार, 7 नवंबर 2026 को अन्नाद्रमुक (AIADMK) के वरिष्ठ नेता और पूर्व डिप्टी मेयर पी.एम. मन्नन से लगातार दूसरे दिन पूछताछ की। यह मामला मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) सरकार को कथित तौर पर अस्थिर करने के लिए विधायकों को रिश्वत देने के आरोपों से जुड़ा है। जाँच का आधार TVK विधायक मधर बदरुद्दीन उर्फ मुस्तफा की शिकायत है, जिसमें उन्होंने विपक्षी दल के पदाधिकारियों पर प्रस्तावित अविश्वास प्रस्ताव के दौरान सरकार के खिलाफ वोट देने के लिए आर्थिक प्रलोभन देने का आरोप लगाया था।

मामले का मूल आरोप

TVK विधायक मुस्तफा ने बुधवार को मदुरै हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर दलबदल कराकर विजय सरकार को अस्थिर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल के कुछ पदाधिकारियों ने उन्हें अविश्वास प्रस्ताव के दौरान सरकार के विरुद्ध मतदान करने के लिए आर्थिक प्रलोभन दिया। इस शिकायत के आधार पर सेंट्रल क्राइम ब्रांच ने 6 नवंबर की सुबह मन्नन को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी और पहले दिन की पूछताछ

अन्नाद्रमुक के उप प्रचार सचिव मन्नन को शुक्रवार, 6 नवंबर को अदालत के निर्देश के बाद मदुरै के विश्वनाथपुरम स्थित सेंट्रल क्राइम ब्रांच कार्यालय में जाँच अधिकारियों के समक्ष पेश किया गया था। पुलिस उपायुक्त दिव्या की निगरानी में उनसे आठ घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की गई। जाँचकर्ताओं ने कथित तौर पर मन्नन के मोबाइल फोन की बातचीत, संचार रिकॉर्ड और संपर्कों की पड़ताल की, ताकि यह स्थापित किया जा सके कि विधायकों की खरीद-फरोख्त की कथित कोशिश में अन्य राजनीतिक नेताओं की भी संलिप्तता थी या नहीं।

अदालत का हस्तक्षेप और रिहाई

पहले दिन की पूछताछ के बाद मन्नन को जिला अदालत में विशेष न्यायाधीश आर. जोसेफ जॉय के समक्ष पेश किया गया। न्यायाधीश ने उनकी गिरफ्तारी की परिस्थितियों पर सवाल उठाए — विशेष रूप से इस पर कि जब उन्हें 7 नवंबर को पूछताछ के लिए बुलाया गया था, तो उन्हें 6 नवंबर को ही हिरासत में क्यों लिया गया। अदालत ने मन्नन को ₹25,000 के निजी मुचलके पर रिहा करते हुए शनिवार को पुनः जाँच अधिकारी के सामने पेश होने का निर्देश दिया।

दूसरे दिन की पूछताछ और राजनीतिक विवाद

अदालत के आदेश का पालन करते हुए मन्नन शनिवार को फिर सेंट्रल क्राइम ब्रांच कार्यालय पहुँचे, जहाँ जाँचकर्ताओं ने आरोपों और मामले से जुड़े लोगों के साथ उनके कथित संपर्कों के बारे में पूछताछ जारी रखी। गौरतलब है कि इन आरोपों के सामने आने के बाद तमिलनाडु की राजनीतिक फिज़ा गरम हो गई है। सत्तारूढ़ TVK ने विपक्षी दलों पर धनबल के ज़रिए विधायी प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया है।

आगे क्या होगा

पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या विधायकों को आर्थिक प्रलोभन देने की कोई संगठित और सुनियोजित कोशिश की गई थी, और क्या इसमें अन्य वरिष्ठ नेताओं का हाथ है। मुख्यमंत्री विजय की सरकार को कमजोर करने की कथित कोशिशों के आरोपों के बीच यह जाँच राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील मोड़ पर आ गई है। आने वाले दिनों में सीसीबी की रिपोर्ट और संभावित चार्जशीट से स्पष्ट होगा कि क्या मामले का दायरा और बढ़ेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो जाँच की निष्पक्षता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। मुख्यधारा की रिपोर्टिंग मन्नन पर केंद्रित है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या सीसीबी के पास ऐसे ठोस साक्ष्य हैं जो किसी व्यापक नेटवर्क तक पहुँचते हों — या यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सिमटकर रह जाएगा।
RashtraPress
7 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पी.एम. मन्नन पर क्या आरोप हैं?
अन्नाद्रमुक के उप प्रचार सचिव पी.एम. मन्नन पर आरोप है कि उन्होंने तमिलनाडु की सत्तारूढ़ TVK सरकार को अस्थिर करने के लिए पार्टी के विधायकों को प्रस्तावित अविश्वास प्रस्ताव के दौरान सरकार के खिलाफ वोट देने हेतु आर्थिक प्रलोभन देने की कोशिश की। यह आरोप TVK विधायक मधर बदरुद्दीन उर्फ मुस्तफा की शिकायत पर आधारित है।
मदुरै सीसीबी की जाँच किस आधार पर शुरू हुई?
TVK विधायक मुस्तफा ने मदुरै हवाई अड्डे पर पत्रकारों को बताया कि विपक्षी पदाधिकारियों ने उन्हें सरकार के खिलाफ वोट देने के लिए पैसे का प्रस्ताव दिया। इस शिकायत पर मदुरै सेंट्रल क्राइम ब्रांच ने 6 नवंबर को मन्नन को गिरफ्तार किया और आठ घंटे से अधिक पूछताछ की।
अदालत ने मन्नन को रिहा क्यों किया?
विशेष न्यायाधीश आर. जोसेफ जॉय ने गिरफ्तारी की परिस्थितियों पर सवाल उठाया — विशेषकर इस बात पर कि 7 नवंबर को पूछताछ के लिए बुलाए गए मन्नन को एक दिन पहले 6 नवंबर को ही क्यों हिरासत में ले लिया गया। अदालत ने ₹25,000 के निजी मुचलके पर रिहाई का आदेश देते हुए शनिवार को पुनः पेश होने का निर्देश दिया।
इस मामले का तमिलनाडु की राजनीति पर क्या असर है?
यह मामला मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की अपेक्षाकृत नई सरकार के लिए राजनीतिक संकट का रूप ले सकता है। सत्तारूढ़ TVK ने विपक्ष पर धनबल से विधायी प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया है, जबकि अन्नाद्रमुक इन आरोपों को खारिज करती है।
जाँच आगे किस दिशा में जा सकती है?
सीसीबी मन्नन के मोबाइल संचार रिकॉर्ड और संपर्कों की पड़ताल कर यह स्थापित करने की कोशिश कर रही है कि क्या इस कथित षड्यंत्र में अन्य राजनीतिक नेता भी शामिल थे। आने वाले दिनों में चार्जशीट और जाँच का दायरा यह तय करेगा कि मामला किसी बड़े नेटवर्क तक पहुँचता है या नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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