डीएमके विधायक राधाकृष्णन की गिरफ्तारी पर मणिकम टैगोर बोले — सार्वजनिक बातचीत में शालीनता अनिवार्य
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (टीएनसीसी) के अध्यक्ष मणिकम टैगोर ने 4 जुलाई 2026 को चेन्नई में डीएमके विधायक अनीता आर. राधाकृष्णन द्वारा मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के विरुद्ध की गई अपमानजनक टिप्पणियों की कड़ी आलोचना की। टैगोर ने स्पष्ट कहा कि राजनीतिक नेताओं को सार्वजनिक विमर्श में शालीनता की सीमा नहीं लाँघनी चाहिए।
गिरफ्तारी और जमानत का घटनाक्रम
तिरुचेंदूर से डीएमके के वरिष्ठ विधायक राधाकृष्णन को थूथुकुडी पुलिस ने तब गिरफ्तार किया जब वे थूथुकुडी से लगभग 23 किलोमीटर दूर अत्तूर में थे। इससे पहले मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जी.के. इलांथिरैयन ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। गिरफ्तारी के कुछ ही घंटों बाद, शुक्रवार और शनिवार की दरमियानी रात लगभग 12 बजे, उन्हें जमानत मिल गई।
गिरफ्तारी के बाद राधाकृष्णन को पुलिस वाहन में ले जाया गया, जाँचकर्ताओं ने उनसे पूछताछ की और तिरुचेंदूर कोर्ट में पेश करने से पहले थूथुकुडी सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उनकी मेडिकल जाँच कराई गई।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद 20 जून 2026 को एक जनसभा में राधाकृष्णन द्वारा दिए गए उस भाषण से उपजा, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री विजय के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की थी। सत्ताधारी दल तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) की शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 352 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान) और धारा 353(2) (सार्वजनिक अशांति फैलाने वाले बयान) के तहत मामला दर्ज किया।
गौरतलब है कि 2026 के विधानसभा चुनाव में डीएमके सत्ता से बाहर हो चुकी है और टीवीके अब सरकार में है — यह राजनीतिक बदलाव इस पूरे प्रकरण की पृष्ठभूमि है।
मणिकम टैगोर की प्रतिक्रिया
पूर्व मुख्यमंत्री के. कामराज के स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए टैगोर ने कहा कि राधाकृष्णन शायद भूल गए हैं कि डीएमके अब विपक्ष में है। उन्होंने सवाल उठाया, "क्या उन्हें मौजूदा राजनीतिक हालात की जानकारी है? क्या उन्हें एहसास नहीं है कि डीएमके सत्ता से बाहर हो गई है?" टैगोर ने उम्मीद जताई कि इस घटना के बाद विपक्ष अपमानजनक टिप्पणियों से परहेज करना सीखेगा।
न्यायमूर्ति इलांथिरैयन ने भी अग्रिम जमानत खारिज करते हुए मौखिक रूप से कहा कि विधानसभा के मौजूदा सदस्य को ऐसे बयान नहीं देने चाहिए थे।
राज्यपाल पर भी निशाना
टैगोर ने इसी दौरान तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर की भी आलोचना की। उन्होंने मदुरै में सरकारी अधिकारियों के साथ राज्यपाल की हालिया समीक्षा बैठक पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि राज्यपाल अपनी संवैधानिक भूमिका का अतिक्रमण कर रहे हैं। टैगोर ने कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्यपाल ऐसी गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं। अगर वह गोवा जैसी राजनीति करना चाहते हैं, तो उन्हें वहाँ जाना चाहिए। मैं उनसे अनुरोध करता हूँ कि वे अपनी संवैधानिक सीमाओं का उल्लंघन न करें।"
आगे क्या होगा
राधाकृष्णन को जमानत मिलने के बाद मामला अदालत में विचाराधीन रहेगा। यह घटना तमिलनाडु में सत्ता परिवर्तन के बाद टीवीके और डीएमके के बीच बढ़ते राजनीतिक तनाव की एक और कड़ी है। कांग्रेस की इस मामले में प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि इंडिया गठबंधन के भीतर भी राजनीतिक मर्यादा को लेकर मतभेद उभर रहे हैं।