थूथुकुडी अदालत ने डीएमके विधायक मार्कंडेयन की जमानत याचिका खारिज की, CM विजय पर टिप्पणी का मामला
सारांश
मुख्य बातें
थूथुकुडी की न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने 22 जुलाई 2026 को द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) विधायक जी.वी. मार्कंडेयन की जमानत याचिका खारिज कर दी। मार्कंडेयन को कोविलपट्टी में एक राजनीतिक जनसभा के दौरान तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के विरुद्ध कथित तौर पर मानहानिकारक और भड़काऊ टिप्पणी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। अब वे 3 अगस्त तक पलायमकोट्टई केंद्रीय कारागार में न्यायिक हिरासत में रहेंगे।
मामले का पृष्ठभूमि और गिरफ्तारी
थूथुकुडी जिला अपराध शाखा ने एक शिकायत के आधार पर यह मामला दर्ज किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि विलाथिकुलम विधानसभा क्षेत्र के विधायक मार्कंडेयन ने कोविलपट्टी की एक राजनीतिक सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री के बारे में आपत्तिजनक बयान दिए। पुलिस के अनुसार, उक्त भाषण में ऐसी टिप्पणियाँ थीं जो मानहानिकारक थीं और सार्वजनिक व्यवस्था को भंग करने में सक्षम थीं।
मंगलवार सुबह जिला अपराध शाखा ने मार्कंडेयन को गिरफ्तार कर जिला पुलिस कार्यालय ले जाया, जहाँ उनसे करीब 11 घंटे तक गहन पूछताछ की गई। जाँचकर्ताओं ने भाषण की विषयवस्तु, उसे देने की परिस्थितियों और मामले के अन्य पहलुओं पर विस्तार से सवाल किए।
न्यायालय की कार्यवाही
पूछताछ के बाद मार्कंडेयन को थूथुकुडी न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय संख्या 1 के समक्ष पेश किया गया। रिमांड सुनवाई के दौरान पुलिस ने आगे की पूछताछ के लिए हिरासत का अनुरोध किया, लेकिन न्यायिक मजिस्ट्रेट सुमति ने यह अनुरोध अस्वीकार कर दिया। अदालत ने मार्कंडेयन को 3 अगस्त तक 15 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया, जिसके बाद उन्हें पुलिस सुरक्षा में पलायमकोट्टई केंद्रीय कारागार स्थानांतरित कर दिया गया।
जमानत याचिका पर सुनवाई और फैसला
न्यायिक हिरासत के बाद विधायक ने थूथुकुडी अदालत में जमानत याचिका दायर कर जाँच लंबित रहने तक रिहाई की माँग की। बुधवार को अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। अभियोजन पक्ष ने याचिका का विरोध करते हुए तर्क दिया कि जाँच अभी महत्वपूर्ण चरण में है और इस समय जमानत देने से जाँच पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। बचाव पक्ष ने कहा कि मार्कंडेयन जमानत के हकदार हैं और वे जाँच में पूरा सहयोग करेंगे।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट सुमति ने जमानत याचिका खारिज कर दी। इस फैसले के साथ मार्कंडेयन न्यायिक हिरासत में बने रहेंगे।
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में सत्तारूढ़ DMK के भीतर और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तीखी हो रही है। गौरतलब है कि किसी सत्तारूढ़ दल के विधायक का इस प्रकार मुख्यमंत्री के विरुद्ध कथित मानहानिकारक टिप्पणी के आरोप में गिरफ्तार होना और जमानत न मिलना, राज्य की राजनीति में एक असामान्य घटनाक्रम है।
आगे क्या होगा
जिला अपराध शाखा मामले की जाँच जारी रखेगी। मार्कंडेयन 3 अगस्त तक न्यायिक हिरासत में रहेंगे, जब उन्हें पुनः अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा। बचाव पक्ष उच्च न्यायालय में जमानत के लिए अपील कर सकता है।