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पोनमुडी को मद्रास हाईकोर्ट से झटका: शैव-वैष्णव टिप्पणी मामले में शिकायत रद्द करने से इनकार

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पोनमुडी को मद्रास हाईकोर्ट से झटका: शैव-वैष्णव टिप्पणी मामले में शिकायत रद्द करने से इनकार

सारांश

मद्रास उच्च न्यायालय ने DMK के वरिष्ठ नेता के. पोनमुडी की वह याचिका खारिज कर दी जिसमें शैव-वैष्णव टिप्पणी मामले में आपराधिक कार्यवाही रोकने की माँग थी। अब ट्रायल कोर्ट में मुकदमा आगे बढ़ेगा — यह DMK के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और कानूनी झटका है।

मुख्य बातें

मद्रास उच्च न्यायालय ने 2 जुलाई 2026 को DMK नेता के.
पोनमुडी की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज की।
मामला अप्रैल 2025 के एक भाषण से जुड़ा है जिसमें शैव, वैष्णव और महिलाओं के बारे में कथित अपमानजनक टिप्पणियाँ की गई थीं।
BJP पार्षद उमा आनंदन की निजी शिकायत पर 23 फरवरी 2026 को मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पोनमुडी को समन जारी किया था।
इलानथिरायण ने पोनमुडी के बचाव पक्ष की दोनों दलीलें अस्वीकार कीं।
अब मामला जॉर्ज टाउन, चेन्नई स्थित तृतीय मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट में आगे बढ़ेगा।

मद्रास उच्च न्यायालय ने 2 जुलाई 2026 को तमिलनाडु के पूर्व वन मंत्री और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के वरिष्ठ नेता के. पोनमुडी को बड़ा झटका दिया। न्यायालय ने उनके विरुद्ध दर्ज आपराधिक शिकायत में हस्तक्षेप करने से स्पष्ट इनकार कर दिया। शैव, वैष्णव और महिलाओं के बारे में कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने के इस मामले में अब ट्रायल कोर्ट में कार्यवाही जारी रहेगी।

न्यायालय का निर्णय

न्यायमूर्ति जी.के. इलानथिरायण ने पोनमुडी की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी। इस याचिका में चेन्नई के जॉर्ज टाउन स्थित तृतीय मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें पोनमुडी को 23 फरवरी 2026 को समन जारी किया गया था। मद्रास उच्च न्यायालय ने मजिस्ट्रेट कोर्ट में चल रही आपराधिक कार्यवाही को जारी रखने की अनुमति दे दी।

शिकायत की पृष्ठभूमि

यह मामला अप्रैल 2025 में चेन्नई में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान पोनमुडी द्वारा दिए गए भाषण से जुड़ा है, जब वे राज्य के वन मंत्री के पद पर थे। ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन की भारतीय जनता पार्टी (BJP) पार्षद उमा आनंदन ने शिकायत में कहा कि उन्होंने यूट्यूब पर इस भाषण का वीडियो देखा, जिसमें की गई टिप्पणियाँ उन्हें अत्यंत आपत्तिजनक लगीं।

शिकायतकर्ता के अनुसार, पोनमुडी ने एक ऐसे किस्से का उल्लेख किया जिसमें शैवों द्वारा माथे पर धारण किए जाने वाले क्षैतिज पवित्र चिह्न पट्टाई और वैष्णवों द्वारा धारण किए जाने वाले ऊर्ध्वाधर चिह्न तिरुमन की तुलना कथित तौर पर अश्लील संदर्भ में की गई थी। उमा आनंदन ने आरोप लगाया कि इन टिप्पणियों से दोनों समुदायों की धार्मिक भावनाएँ आहत हुईं और सांप्रदायिक सद्भाव को नुकसान पहुँचा।

पुलिस निष्क्रियता के बाद कोर्ट का दरवाज़ा

उमा आनंदन ने पहले पुलिस से संपर्क कर आपराधिक कार्रवाई की माँग की थी। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने बिना किसी कार्रवाई के शिकायत बंद कर दी, जिसके बाद उन्होंने मजिस्ट्रेट कोर्ट में निजी शिकायत दर्ज कराई। कोर्ट ने मामले का संज्ञान लेते हुए पोनमुडी को समन जारी किया। यह घटनाक्रम इस बात का उदाहरण है कि जब पुलिस शिकायत पर कार्रवाई नहीं करती, तो पीड़ित पक्ष सीधे मजिस्ट्रेट का रुख कर सकता है।

पोनमुडी का बचाव पक्ष

उच्च न्यायालय में पोनमुडी ने तर्क दिया कि उन्होंने किसी अन्य व्यक्ति द्वारा वर्षों पहले कही गई बातों को दोहराया था और यह एक बंद कमरे की बैठक में हुआ था। उनके अधिवक्ता ने यह भी दलील दी कि शिकायत में भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1)(ए), धारा 299 और धारा 302 के तहत अपराध नहीं बनता — ये धाराएँ समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने और जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने से संबंधित हैं। न्यायालय ने इन दोनों दलीलों को अस्वीकार कर दिया।

आगे क्या होगा

मद्रास उच्च न्यायालय के इस निर्णय के बाद अब मामला जॉर्ज टाउन स्थित तृतीय मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट में आगे बढ़ेगा। गौरतलब है कि पोनमुडी पहले भी कानूनी विवादों में घिरे रहे हैं और यह मामला DMK के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील है, क्योंकि तमिलनाडु में शैव और वैष्णव दोनों समुदायों की बड़ी उपस्थिति है। अब सभी की निगाहें ट्रायल कोर्ट की अगली सुनवाई पर होंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन न्यायालय का यह निर्णय संकेत देता है कि अभिव्यक्ति और धार्मिक भावना के बीच की रेखा कानूनी जाँच के दायरे में है। पोनमुडी का यह तर्क कि उन्होंने किसी और की बात दोहराई, कानूनी रूप से कमज़ोर साबित हुआ। DMK के लिए यह राजनीतिक असुविधा का समय है, खासकर जब राज्य में 2026 के चुनावी माहौल की तैयारी हो रही है।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पोनमुडी के खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट का फैसला क्या है?
मद्रास उच्च न्यायालय ने 2 जुलाई 2026 को DMK नेता के. पोनमुडी की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी। इसका अर्थ है कि शैव-वैष्णव टिप्पणी मामले में मजिस्ट्रेट कोर्ट में आपराधिक कार्यवाही जारी रहेगी।
पोनमुडी पर क्या आरोप हैं?
पोनमुडी पर अप्रैल 2025 में चेन्नई के एक कार्यक्रम में शैव और वैष्णव धार्मिक प्रतीकों तथा महिलाओं के बारे में कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप है। BJP पार्षद उमा आनंदन ने आरोप लगाया कि इन टिप्पणियों से धार्मिक भावनाएँ आहत हुईं और सांप्रदायिक सद्भाव बिगड़ा।
यह शिकायत किसने और कैसे दर्ज कराई?
ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन की BJP पार्षद उमा आनंदन ने पहले पुलिस में शिकायत दी, लेकिन पुलिस ने बिना कार्रवाई के मामला बंद कर दिया। इसके बाद उन्होंने जॉर्ज टाउन स्थित तृतीय मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट में निजी शिकायत दर्ज कराई, जिस पर कोर्ट ने 23 फरवरी 2026 को पोनमुडी को समन जारी किया।
पोनमुडी ने हाईकोर्ट में अपने बचाव में क्या तर्क दिए?
पोनमुडी ने कहा कि उन्होंने किसी अन्य व्यक्ति द्वारा वर्षों पहले कही गई बातें बंद कमरे में दोहराई थीं और वे उनके अपने विचार नहीं थे। उनके अधिवक्ता ने यह भी तर्क दिया कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1)(ए), 299 और 302 के तहत कोई अपराध नहीं बनता, लेकिन न्यायालय ने दोनों दलीलें अस्वीकार कर दीं।
अब इस मामले में आगे क्या होगा?
मद्रास हाईकोर्ट के निर्णय के बाद अब मामला चेन्नई के जॉर्ज टाउन स्थित तृतीय मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट में आगे बढ़ेगा। पोनमुडी को ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही में भाग लेना होगा।
राष्ट्र प्रेस
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