करूर भगदड़: सुप्रीम कोर्ट ने DMK की याचिका खारिज की, TVK नेताओं पर रोक से इनकार
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 7 जुलाई 2026 को करूर भगदड़ मामले में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) की उस याचिका पर सुनवाई से साफ इनकार कर दिया, जिसमें सत्तारूढ़ तमिलनाडु वेत्री कड़गम (TVK) के शीर्ष नेताओं को सार्वजनिक बयान देने से रोकने की माँग की गई थी। न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह इस याचिका को खारिज करने के पक्ष में है, जिसके बाद DMK ने याचिका वापस ले ली।
याचिका में क्या माँगा गया था
DMK के संगठन सचिव आरएस भारती ने यह याचिका दायर की थी। इसमें मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और मंत्री आधव अर्जुना सहित TVK नेताओं को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की जाँच पूरी होने तक मामले पर सार्वजनिक बयान देने से रोकने का निर्देश देने की गुहार लगाई गई थी। याचिका में यह भी अनुरोध था कि मंत्री आधव अर्जुना के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए। DMK का तर्क था कि मामले के आरोपी रहे आधव अर्जुना के बयान और पीड़ित परिवारों से सीधा संपर्क CBI जाँच की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है।
अदालत की स्पष्ट फटकार
पीठ ने सुनवाई के दौरान DMK की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार को साफ शब्दों में कहा, 'इस याचिका पर यहाँ जोर न देना ही बेहतर होगा। हम इसे खारिज करने के पक्ष में हैं।' इसके बाद रंजीत कुमार ने याचिका वापस लेने की अनुमति माँगी और कहा कि पार्टी कानून के तहत उपलब्ध अन्य उपायों का सहारा लेगी। सर्वोच्च न्यायालय ने यह अनुरोध स्वीकार करते हुए याचिका को वापस लिया हुआ मानकर खारिज कर दिया।
आधव अर्जुना के विवादित बयान
DMK की याचिका में 2 जुलाई को मंत्री आधव अर्जुना द्वारा दिए गए एक भाषण का उल्लेख किया गया था, जिसमें कथित तौर पर उन्होंने कहा था कि 'एक हिसाब बराबर करना है' और करूर हादसे के लिए पिछली DMK सरकार को जिम्मेदार ठहराया था। DMK का कहना था कि ऐसे बयान अदालत की निगरानी में चल रही CBI जाँच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते हैं। इसके अलावा, याचिका में यह भी उल्लेख था कि मुख्यमंत्री विजय करूर जाकर मृतकों के परिजनों को सरकारी सहायता, अनुकंपा नियुक्तियाँ और अन्य लाभ देने वाले हैं। DMK ने स्पष्ट किया कि उसे राहत देने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन ये परिवार महत्वपूर्ण गवाह भी हैं।
करूर भगदड़: पृष्ठभूमि
27 सितंबर 2025 को करूर में TVK की एक राजनीतिक रैली के दौरान मची भगदड़ में 41 लोगों की मौत हो गई थी और 142 लोग घायल हुए थे। यह तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हुआ। इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय इस मामले की जाँच तमिलनाडु पुलिस से लेकर CBI को सौंप चुका था। गौरतलब है कि यह मामला TVK के सत्ता में आने के बाद से ही राजनीतिक विवाद का केंद्र बना हुआ है।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद DMK अब कानूनी रूप से उपलब्ध अन्य विकल्पों की तलाश करेगी। CBI की जाँच अदालत की निगरानी में जारी है और मामले की अगली सुनवाई में TVK नेताओं के बयानों का मुद्दा फिर उठ सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस याचिका की वापसी DMK के लिए एक कानूनी झटका है, हालाँकि पार्टी ने वैकल्पिक रास्तों का संकेत दिया है।